शिक्षाकर्मी नेताओं की खुली चेतावनी…मैट्रिक्स आधार पर करें 7 वें वेतनमान का निर्धारण..विसंगति दूर होने के बाद ही संविलियन मंजूर

बिलासपुर— शिक्षक मोर्चा संचालक संजय शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति के आधार पर सातवां वेतनमान दिया जा रहा है। इसी तरह छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों को भी सातवां वेतनमान दिया जाए। शिक्षाकर्मी नेता ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि मध्यप्रदेश में 12 साल सेवा पूरी करने पर क्रमोन्नति का प्रावधान है। फिर छत्तीसगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है।

                                   जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती है तब तक शिक्षाकर्मी अपने आंदोलन को लेकर पूरी तरह सजग रहेंगे। रिपोर्ट अनुकूल नहीं होने पर आने वाले समय में उचित कदम उठाएंगे। यह बातें प्रेस नोट जारी कर शिक्षाकर्मी मोर्चा संचालक संजय शर्मा कही है। संजय शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में 12 साल की सेवा के बाद क्रमोन्नति के आधार पर सातवां वेतनमान मतलब उच्च प्रवर्ग का वेतनमान दिया जा रहा है।फिर यह छत्तीसगढ़ में क्यों संभव नहीं हो सकता है। प्रदेश के शिक्षाकर्मियों को भी सरकार को क्रमोन्नति, समानुपातिक आधार पर वेतन निर्धारण करना होगा।

                                               संजय शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भूतलक्षी प्रभाव से क्रमोन्नत वेतनमान निरस्त हो चुका है। शिक्षक मोर्चा प्रदेश संचालक  ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में दिए जा रहे वेतन का तुलनात्मक चार्ट पेश कर बताया है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियो को आर्थिक नुकसान हो रहा है। जहां मध्यप्रदेश में 1998 में नियुक्त वर्ग एक को 48876, वर्ग दो को 41406 और वर्ग तीन को 37404 वेतन मिलता है तो वहीं छत्तीसगढ़ में 1998 के आधार पर ही वर्ग एक को 39760, वर्ग दो को 36912 और वर्ग तीन को 26973 रूपए वेतन दिया जाता है।

                                  संजय शर्मा ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि मध्यप्रदेश औव छत्तीसगढ़ में अंतर वर्ग एक का 9116, वर्ग दो 4494 और वर्ग तीन का अन्तर 10431 है। इसी तरह 2005 और उसके बाद नियुक्त सभी शिक्षाकर्मियो के वेतन में भी अंतर है।

               शिक्षक मोर्चा प्रदेश संचालक संजय शर्मा, प्रदेश उप संचालक हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, मनोज सनाढ्य, शैलेन्द्र पारीक, सुधीर प्रधान, विवेक दुबे ने कमेटी को सुझाव दिया था। अब भी आगाह किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश का वेतन, सातवा वेतन मान के पूर्व छत्तीसगढ़ से बहुत ज्यादा है। सरकार पुनरीक्षित वेतनमान के विसंगतियों को दूर करें। भूतलक्षी प्रभाव से क्रमोन्नति, समानुपातिक आधार पर वेतन निर्धारण के बाद छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के वेतन मैट्रिक्स के आधार पर सातवे वेतनमान का निर्धारण हो। इसके बाद ही व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक के पद पर संविलियन किया जाए।

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  1. By Tankesh

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