अरपा बचाओ अभियान तो बहाना है…एल्डरमैन ने कहा…भू-माफियों की शह पर दुर्दशा के जिम्मेदार लोग तलाश रहे जमीन

बिलासपुर—विकास जिनकी जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही पिछले छह दशकों तक लूटपाट की। सत्ता हाथ से चली गयी तो विकास की याद आने लगी। वही लोग विकास को ढूंढ रहे हैं जिन्होने विकास को वनवास दिया था।अब सामने है तो आंख में खराबी के कारण उन्हें कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है। यदि उन्हें अरपा की चिंता होती तो आज अरपा की यह दुर्दशा नहीं होती। भारतीय जनता पार्टी सरकार ने जब अरपा विकास का बीड़ा उठाया तो उन्हें अपने भूल का अहसास हुआ। हाथ में डंडा और झंडा लेकर लोगों को बरगलना शुरू कर दिया। जनाधार की जमीन तलाशने अरपा बचाओ अभियान का नाटक शुरू कर दिया। यह बातें एल्डरमैन मनीष अग्रवाल ने पत्रकारों से कही। मनीष अग्रवाल ने कहा कि दरअसल भू-माफियों की टोली अपनी जमीन बचाने के लिए अरपा बचाओ अभियान की वैशाखी से वैतरणी पार करने का सपना देख रही है।

                                          एल्डरमैन मनीष ने कांग्रेसियों की अरपा बचाओ अभियान पर चुटकी लेते हुए कहा कि भू-माफियों का जत्था अभियान के बहाने अपनी जमीन को बचाने निकली है। जिन्होने पिछले साठ साल से केवल लूट खसोट किया है। लेकिन अब जमीन मिलना असंभव है। मनीष ने बताया कि अरपा प्रोजेक्ट कांग्रेसियों की गैरजिम्मेदार हरकतों के बाद अरपा को हरा भरा बनाने के लिए लाया गया हैं।

            मनीष अग्रवाल ने कहा कि छह दशकों से अरपा के साथ अन्याय हुआ। यदि कांग्रेसियों ने प्रयास किया होता तो भाजपा सरकार को नई योजना के तहत अरपा को हरा भरा बनाने के लिए प्रोजेक्ट लाने की जरूरत ही नहीं होती। इन्ही कांग्रेसियों ने अरपा का चीरहरण किया है। कभी रेत उत्खनन किया तो कभी तट की जमीनों पर कब्जा किया। खोडरी स्थित अरपा के उद्गग्म स्थल अमरपुर को भी नहीं छोड़ा। सच तो यह है कि अरपा की वर्तमान स्थिति के लिए केवल और केवल तथाकथित  कांग्रेसी छाप भू-माफिया ही जिम्मेदार हैं।

               ऐल्डरमेन मनीष अग्रवाल ने बताया कि एक तरफ कांग्रेसी कहते हैं कि 50 हजार परिवारों को बंधक बनाया गया है। वास्तविकता से सभी लोग परिचित हैं। प्रोपेगेंडा खड़ा करना कांग्रेसियों की फितरत है। ऐसा सच भी है तो बताएं कि अरपा तट पर किसने जमीनों पर बेजाकब्जा किया है। किसने हॉटल मॉटल बनवाया है।

                           यह सच है कि समस्याएं कई हैं। प्राथमिकता के आधार पर सभी समस्याओं का निराकरण जरूरी है। अरपा को हरा भरा होना ही है। आश्चर्य होता है कि जब अरपा को बीहड़ बनाने लोग ही राग अलापने लगें। जब कांग्रेसियों की जनसंपर्क रैली फ्लाफ हो गयी तो अरपा का दामन थाम कर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। जबकि यही लोग अरपा की बरबादी के कारण भी है।

          मनीष ने कांग्रेसियों पर दोहरे चरित्र का भी आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि मां अरपा की सच्ची सेवा करनी ही है तो दलगत भावना से परे एकला की नीति से हटकर सामूहिक प्रयास करना होगा। कुटिल राजनीति की आदतों को छोड़ना होगा। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर पांच साल तक कांग्रेसियों को अरपा की याद क्यों नहीं आयी। चुनाव के समय ही याददास्त तेज कैसे हो गयी।

                       मनीष ने कहा कि यदि कांग्रेसी अरपा को लेकर सचमुच गंभीर है तो उनकी पुरानी करतूतों को भूलकर अभियान का स्वागत करते हैं। लेकिन हम अरपा को वोट बैंक बनाए जाने की राजनीति से नफरत करते हैं। जैसा पूर्व केन्द्रीय मंत्री चरणदास महंत और पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने किया, वैसा हम कभी भी नहीं सपने में भी नहीं करना चाहेंगे।

                      मनीष ने कहा कि अरपा के बहाने कांग्रेसियों के बीच टिकट के लिए रिले रेस हो रही है। सरल शब्दों में कहें तो कांग्रेसी अरपा बचाओ अभियान के पीछे टिकट जुगाड़ अभियान में है। सच्चाई तो यह है कि कांग्रेसियों को बिलासपुर के विकास से, अरपा माई से कोई वास्ता ही नहीं है। बड़े घरानों के भूमाफियों के इशारे पर अरपा तट की बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए अरपा बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। क्योंकि अरपा प्रोजेक्ट में पुराने समय में कई ऐसे सफेदपोश लोगों की नजूल की जमीनों का आवंटन हैं। सब सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। दरअसल आंदोलनकारियों को आगे करके भूमाफिया अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।

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