संजय शर्मा बोले-विसंगतिरहित और ठोस प्रावधानों के साथ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए संविलियन आदेश जारी किये जाये

बिलासपुर।शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कमेटी की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करनें की मांग करते हुए साफ कर दिया कि छत्तीसगढ़ में विसंगतियों के साथ यदि कमेटी का कोई प्रस्ताव आता है तो छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों को कतई स्वीकार नहीं होगा।मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पंचायत शिक्षकों को शिक्षा विभाग कर्मचारी बनाकर ऐतिहासिक कार्य किया है लेकिन खामियां इनमें भी कई है, हालांकि वो तमाम खामियां बेहद जटिल नहीं, बल्कि मामूली है, जिसे आसानी से दूर किया जा सकता है। लिहाजा अब शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रांतीय संचालक संजय शर्मा ने मांग किया है कि छत्तीसगढ़ में संविलियन के रास्तों में उन सभी चिंताओं को दूर कर रिपोर्ट प्रस्तुत किया जावे।
चुंकि कमेटी ने राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों का दौरा कर वहां प्रचलित संविलियन मॉडल का अध्ययन कर लिया है और मीडिया में पंचायत सचिव आर पी मंडल के हवाले से जारी बयान जिसमें उन्होंने दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में कमेटी ने दो माह पूर्व ही ड्राफ्ट तैयार कर लिया है  ऐसी स्थिति में रिपोर्ट सार्वजनिक न करना कई सवाल खड़े करता है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अपने बयानों में लगातार कहा है कि मुख्यसचिव से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों के लिए बेहतर निर्णय लिया जाएगा ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि वो तत्काल कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर उस पर विसंगतिरहित और ठोस संविलियन नीति की घोषणा कर कार्यान्वयित किया जाए जिससे सरकार को शिक्षाकर्मियों का विश्वास हासिल हो सके।
शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा, प्रदेश उप संचालक हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, मनोज सनाढ्य, शैलेन्द्र पारीक, सुधीर प्रधान, विवेक दुबे ने मुख्यमंत्री जी से मांग करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में “समतुल्य वेतन निर्धारण की विसंगति दूर करते हुए समानुपातिक, क्रमोन्नति के आधार पर छठवे ( समतुल्य/ पुनरीक्षित) वेतनमान का निर्धारण कर विद्यमान वेतन पर सातवें वेतनमान के निर्धारण का लाभ देते हुए व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक के पद पर ही संविलियन स्वीकार होगा”।
संजय शर्मा ने अपेक्षा जताई है कि डॉ रमन सिंह प्रदेश के  शिक्षाकर्मियों के आशंकाओं को दूर करते हुए एक बेहतर संविलियन प्रस्ताव लाएंगे जो कि अन्य राज्यों के लिए मिसाल साबित होगी।
प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश व राजस्थान में क्रमोन्नति का प्रावधान है, तथा वहाँ कर्मोनन्ति के आधार पर छठवा वेतनमान का निर्धारण हुवा है, अतः उन दोनों राज्यों का विद्यमान वेतन छत्तीसगढ़ से ज्यादा है, राजस्थान में तो समानुपातिक वेतन का भी प्रावधान है। अतः छत्तीसगढ़ में उक्त लाभ के साथ वेतन निर्धारण का ही प्रावधान स्वीकार होगा।

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