कांग्रेस का रमन पर पलटवार-हमने बोनस के लिए आंदोलन किया,खिलाफत नहीं

रायपुर। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा कांग्रेस पर किसानों को बोनस देने का विरोध के गलत निराधार आरोप का कड़ा विरोध करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि विकास यात्रा में जनता की और किसानों की नाराजगी देखकर बौखलाहट में संतुलन खोकर रमन सिंह जी विकास यात्रा में कांग्रेस पर बोनस का विरोध करने का असत्य और निराधार आरोप लगा रहे है। मुख्यमंत्री रमन सिंह के दावे का कड़ा प्रतिवाद करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने कभी बोनस का विरोध नही किया।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में 300 रु. बोनस 5 साल तक देने की बात कही थी। कांग्रेस ने पांचो साल के लिये बोनस मांगा है। राज्यपाल के अभिभाषण में विधानसभा में कहा गया था कि किसानों को 5 साल तक बोनस दिया जायेगा। भाजपा के द्वारा बोनस नही दिये जाने का कांग्रेस ने विरोध किया है।

डॉ. रमन सिंह हाथ से सत्ता को फिसलते देखकर इतने विचलत हो गये है और इतने बौखला गये है कि सच्चाई को भी भूल गये है। प्रदेश में अनेक बार ब्लॉक मुख्यालयो में, जिला मुख्यालयों में उनके पुतले जलाये गये है बोनस नही दिये जाने के कारण भारतीय जनता पार्टी के सरकार के खिलाफ बलौदाबाजार से विधानसभा तक कांग्रेस ने “किसान न्याय पदयात्रा” निकली थी, बोनस की मांग को लेकर विधानसभा का घेराव किया दो-दो, तीन-तीन बार घेराव किया।

कांग्रेस ने बोनस की मांग को लेकर कांग्रेस ने कभी बोनस का विरोध नही किया है और जहां तक के कांग्रेसी किसानों के बोनस की बात है तो डॉ. रमन सिंह एक काम करे किसानों को तीन हिस्सो में बटवा दे भाजपा समर्थक किसान, आम किसान और कांग्रेसी किसान अगर उनकी यही मंशा है कि कांग्रेसी किसानों को बोनस न मिले तो इसे साफ बतायें।

आम किसानों को बोनस 5 साल का दे दे और तीन-तीन सौ रूपये के दर से भाजपा समर्थित किसानों को दुगना बोनस दे दे। रमन सिंह भाजपा के मुख्यमंत्री है या डॉ. रमन सिंह पूरे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री है उनके मुँह से ऐसी बात शोभा नही देती। सच यह है कि कांग्रेस के अन्नदाताओं के हित में किये गये आंदोलन एवं प्रदर्शनों के दबाव में ही देना पड़ा है बोनस। कांग्रेस को बोनस का विरोधी कहना हास्यास्पद है।

किसानों के बोनस को लेकर आंदोलन कर रहे, कांग्रेसियों को लाठियों से पिटवाने वाले रमन सिंह यह भी भूल गये हैं कि कांग्रेस ने दो-दो विधानसभा घेराव धान बोनस की मांग को लेकर किये, स्मृति दोष के कारण किसान विरोधी रमन सिंह, कांग्रेस को किसान विरोधी बता रहे है। 2013 से 2018 तक कांग्रेस ने किसानों को धान पर बोनस दिये जाने के लिये रमन सिंह सरकार के खिलाफ आंदोलन किये।

बोनस के लिये आंदोलन कर रहे कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज, झूठे मुकदमें और हर तरह का दबाव इस्तेमाल करने के बाद अब यदि डाॅ. रमन सिंह कांग्रेसियों पर बोनस के विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं तो इससे बड़ा झूठ और कुछ नहीं हो सकता है। अनेक बार कांग्रेस पार्टी ने किसानों को बोनस की मांग करते हुये आंदोलन किया। बोनस देने में हीलाहवाला मोदी सरकार के दबाव में रमन सिंह की सरकार द्वारा की जा रही थी। विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस के द्वारा किसानों को धान का समर्थन मूल्य 2100 रू. एवं 300 रू. बोनस देने की मांग को उठाये जाने से डरे हुये रमन सिंह ने षड़यंत्रपूर्वक लोकतंत्र की हत्या कर विपक्ष के तीखे सवालों से बचने आठ दिन तक चलने वाली विधानसभा सत्र को ढाई दिन में अनिश्चितकालीन समय के लिये स्थगित करवा दिया था। कांग्रेस ने किसानों के हक के लिये जब भी आंदोलन किया तब रमन सिंह ने प्रशासनिक और पुलिसिया आतंकवाद का इस्तेमाल कर किसानों के और कांग्रेस के आंदोलनों को कुचलने के लिये आंदोलनकारियों पर एफआईआर तक कराया गया।

कांग्रेस के द्वारा की गई किसान हित के आंदोलन को तारीख सहित बता रहा हूं। 17 जून से 25 जून 2014 को प्रदेश के सभी जिला एवं ब्लाक मुख्यालय में समर्थन मूल्य एवं बोनस की मांग को लेकर आंदोलन किया गया। 1 जुलाई 2014 को मुख्यमंत्री निवास का घेराव हुआ, जिसमें लाठिया बरसाई गयी और हजारों किसानों को और कांग्रेसियों को जेल भेजे। सितंबर 2014 में वादा निभाओं रैली हुई।

5 अक्टूबर को सभी जिला एवं ब्लाक मुख्यालय में बोनस और समर्थन मूल्य की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। 8 से 20 अक्टूबर 2014 को रमन सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश भर में प्रदर्शन हुआ। 1 नवबंर 2014 को बोनस और समर्थन मूल्य की मांग को लेकर आर्थिक नाकाबंदी हुई। 10 नवंबर 2014 को किसानों की इन्हीं मांगो को लेकर कांग्रेस का जेल भरों आंदोलन हुआ।

1 दिसंबर 2014 को प्रदेश के सभी धान खरीदी केन्द्रों में प्रदर्शन किया गया। 10 दिसंबर को किसान विरोधी नीतियों के विरोध में दिल्ली में संसद भवन का घेराव हुआ। 15 जनवरी 2015 को प्रदेश भर में फिर से धरना प्रदर्शन किया गया। 11 मार्च 2015 बलौदाबाजार से सेमरिया तक किसान मजदूर न्याय पदयात्रा हुई और 16 मार्च को विधानसभा घेराव किया गया जिसमें हजारों की संख्या में किसानों के साथ कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर दमनकारी कार्यवाही की।

9 मई 2015 को छत्तीसगढ़ प्रवास पर आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने किसानों की मांगों के लिये प्रदेश भर में आंदोलन किया गया। 26 मई प्रदेश भर में मौन जुलूस निकाला गया। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने 15 एवं 16 जून को किसान बचाओं आंदोलन-पदयात्रा जांजगीर चांपा जिले में डभरा में निकाली।

13 सितंबर 2015 को बोनस और समर्थन मूल्य की मांग को लेकर प्रदेश व्यापी चक्का जाम किया गया। 22 दिसंबर 2015 को प्रदेश स्तरीय रैली आंदोलन कर माननीय राज्यपाल को बोनस और समर्थन मूल्य की मांग को लेकर ज्ञापन सौपा गया। 15 जून 2016 को प्रदेश के सभी जिला एवं ब्लाक मुख्यालय में धरना प्रदर्शन हुये। 7 अक्टूबर 2016 को गरियाबंद में विशाल किसान सम्मेलन कर किसानों की मांगे उठाई गई।

1 नवंबर 2016 को राज्य स्थापना दिवस के दिन किसानों की मांगों को लेकर प्रदेश स्तरीय जेल भरों आंदोलन हुआ। 12 दिसंबर 2016 को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय में आंदोलन किया गया। 10 फरवरी से 13 फरवरी 2017 तक जनवेदना पदयात्रा जगदलपुर से कोण्डागांव तक किया गया। 11 जुलाई 2017 को प्रदेश व्यापी किसान सत्याग्रह किया गया। 6 अग्रस्त 2017 को विधानसभा के मानसून सत्र को स्थगित किये जाने के विरोध में जन विधानसभा लगायी गयी एवं पुतला दहन किया गया।

9 अगस्त 2017 को दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन किया गया। 10 अगस्त 2017 राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया गया। 28 अगस्त 2017 को प्रदेश स्तरीय आक्रोश रैली हुआ। 3 अक्टूबर 2017 को किसानों की मांगो के समर्थन में प्रदेश के सभी जिला एवं ब्लाक मुख्यालय में प्रदर्शन किया गया। 2 से 3 नवंबर 2017 मंुगेली जिला में जन अधिकार महासभा किया गया। 13 नवंबर 2017 को डोंगरगढ़ से खुर्सीपार भिलाई तक प्रियदर्शनी इंदिरा जनाधिकार पदयात्रा किया गया। 12 दिसंबर 2017 को शिवरीनारायण से नंदेली तक किसान जन अधिकार पदयात्रा किया गया।

19 फरवरी 2018 को प्रदेश के सभी कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया। इसके बावजूद यदि मुख्यमंत्री रमन सिंह कहते है कि कांग्रेस ने बोनस का विरोध किया तो इससे ज्यादा दुखद और दुर्भाग्यजनक और कुछ भी नहीं हो सकता।

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