फिर ठगे जा रहे हैं सहायक शिक्षक पँचायत,प्रमोशन-इन्क्रीमेंट में रोक लगाने से हर महीने हो रहा 10 से 12 हजार का नुकसान

बिलासपुर।कुछ समय से शिक्षाकर्मियो के बीच  संविलियन की तेज होती माँग के कारण राज्य की भाजपा सरकार जबदस्त दबाव में है।इसी दबाव के चलते शासन के अंदर भी संविलियन कार्यवाही की हलचल चालू हो गई है  । शिक्षआ कर्मी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण विकास यात्रा में cm का संविलियन के सम्बंध में ताजा बयान को मान रहे  है।इन सब के बीच सहायक शिक्षक पँचायत फिर से अपने अहित को लेकर चिंतित व खिन्न है । वजह है सहायक शिक्षक से शिक्षक पँचायत में अपने पदोन्नति पर शासन द्वारा लगाी गई  रोक है।शिक्षक पंच./ननि एम्पलाइज एसोसिएशन के प्रदेश सचिव शिव सारथी ने बताया कि एक लंबे अरसे के बाद सहायक शिक्षक पँचायतो का वर्ग 2 में पदोन्नति होने की प्रक्रिया चालू की गई थी।  इसी बीच संविलियन की माँग  ने जोर पकड़ लिया।जिसके कारण राज्य शासन अपने नफे नुकसान को सोचते हुए इस पदोन्नति पर रोक लगा दिया है  ।
जिससे सहायक शिक्षको को हर माह 10 से 12 हजार का आर्थिक नुकसान वर्तमान में उठाना पड़ रहा हैं । यह नुकसान संविलियन होने पर और भी ज्यादा जो जाएगा और अगर संविलियन डेट से ही प्रथम ज्वाइनिंग निर्धारित कर पुराने सर्विस को शून्य घोषित किया जाता है तो सहायक शिक्षक तो जबरदस्त घाटे में रहेंगे ।  इन सब के निराकरण के लिए जरूरी है रिक्त पदों पर योग्यताधारियो को तत्काल पदोन्नति तथा पदोन्नति से वंचित वर्गों को क्रमोन्नत वेतनमान के साथ संविलियन यह फार्मूला ही शिक्षाकर्मी और राज्य शासन दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा  । नही तो जिस मंशा से सरकार संविलियन की सोच रहा है वह फलीभूत नही होगा   । इसका कारण शिक्षाकर्मियों का सबसे बड़ा वर्ग सहायक शिक्षक पँचायत का अपने वाजिब हक से वंचित रहना होगा  । जो राज्य के भाजपा सरकार को मुसीबत में डालने का मद्दा रखता है।
सचिव शिव सारथी ने यह भी बताया है कि शासन पदोन्नति कर साथ ही  साथ वार्षिक वेतन वृद्धि, समयमान वेतनमान और पुनरीक्षित वेतनमान के लाभ को भी प्रदेश के जिला सीईओ के माध्यम दे रोके रखा है ।  जिस पर आम शिक्षाकर्मी आक्रोशित है ।  यही कारण है कि सचिव शिव सारथी ने अपने संघ शिक्षक पँचायत/ननि एम्पलाइज एसोसिएशन की ओर से माँग की है कि सहायक शिक्षको की पदोन्नति में तेजी लाये तथा बाकी के लिए क्रमोन्नत का लाभ देते हुए  संविलियन किया जाए ।  साथ ही वार्षिक वेतनवृद्धि, समयमान और पुनरीक्षित वेतन को सामान्य प्रक्रिया के तहत देने की मांग की है।

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