बाँधवगढ़ नेशनल पार्क की एक सच्ची कहानी..पिता टाइगर का दिल धड़कता है..अपनी सन्तान के लिए!!

( प्राण चड्ढा )  अवधारण है कि टाइगर मेटिंग के बाद अलग हो जाता है और माँ ही शावकों को पलतीं और शिकार की ट्रेनिंग देती है,पर मध्यप्रदेश के बान्धवग़ढ नेशनल पार्क, में बाघिन मां के मारे जाने पर उनके पिता ‘बमेरा सन’ ने अपने तीन शावको को पाला है। ये तीन शावक इस पार्क के मगदी जोन में बने एनक्लोजर पर लगाए गए ग्रीन नेट के भीतर सैलानियों को शाम दिखाई देते हैं।
   विश्वविख्यात बांधवगढ़ नेशनल पार्क बीते साल अक्टूबर में खुला तब तीन शावकों की मां कनकटी नहीं दिखाई दी और तीनों शावक अपने पिता ‘बमेरा सन’ याने T37 के साथ दिखाई देते,वही शिकार करता और बच्चे साथ मिलकर खाते।
     पर फिर एक दिन पार्क में टाइगर की हड्डियों का ढांचा मिला और ये पुष्टि हो गयी कि ये कनकटी है। यहां अभी तक दो मत है, पार्क मैनेजमेंट इस मौत को टाइगर से लड़ाई का नतीजा और जानकाऱ इसे शिकार का मामला मानते हैं। इसी तरह “बमेरा सन’ ने तीनों शावकों को कितने दिन पाला इस पर भी मतभिन्नता है क्योंकि पार्क वर्षाकाल में बन्द था और बारिश बाद जब खुला तो बच्चे बाप के साथ दिखाई देते रहें। ये अवधि 10 दिन से दो माह भी हो सकती है।
     अब इन् शावकों को बचाने की चिंता थी। इनमें दो नर और एक मादा है। फिर योजना बना कर एक बड़ा एनक्लोजर फील्ड डायरेक्टर मृदुल पाठक ने मगदी जोन में जुट कर बनवाया। तब शावक कुछ माह के थे, इन शावकों को लोहे के इस मज़बूत घेरे में रख कर पाला गया। अब ये शावक करीब पंद्रह माह के हो गए हैं। यदि कोई शिकार एनक्लोजर में डाल दिया जाए तो ये उसको दबोच कर मार् के पेट भर लेते हैं। इस लिए माना जा रहा है शिकार का सहज गुण बढ़ता जा रहा है और कभी वक्त आने पर ये आज़ाद जीवन व्यतीत करेंगें।
 शावक एनक्लोजर में हैं, पर पिता ‘बमेरा सन’ यदा कदा इसके इर्दगिर्द आता है, अपनी संतान की कुशलक्षेम का पता लगाने। वह् जबड़े जो शिकार की सांस रोक देते हैं उसके शरीर में भी वह् दिल है जो अपनी संतान के लिए अब भी धड़कता है।

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