मुख्यमंत्री के हाथों 169 अबूझमाड़िया परिवारों मिलेगा भू-स्वामी का अधिकार,सोमवार को जनता बनेगी ऐतिहासिक क्षण की गवाह

नारायणपुर-सोमवार 14 मई  का दिन प्रदेश के साथ  खासतौर पर नारायणपुर जिले के विकास खण्ड ओरछा (अबूझमाड़) के लिए खास होगा । इस इलाके के दूरस्थ  पांच गांवों कोडोली, जिवलापदर, नेड़नार, ताड़ोनार और आकाबेड़ा में बसे 169 अबूझमाड़िया परिवारों के लिए बेहद ऐतिहासिक दिन होगा । मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह 14 मई को इन 169 अबूझमाड़ियां परिवारों को भू-स्वामी का अधिकार देंगे। पिछले डेढ़ वर्ष से जिला प्रशासन का राजस्व अमला आई.आई.टी. रूड़की की तकनीकी टीम के साथ अबूझमाड़ को बूझन,जाननेे का प्रयास कर रहा था।कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि मार्च 2018 तक अबूझमाड़ के 10 ग्रामों कंुदला, बासिंग, ओरछा, कुरूषनार, कंदाड़ी, कोडोली, जिवलापदर, नेड़नार, ताड़ोनार और आकाबेड़ा  का राजस्व सर्वे का काम पूर्ण किया गया है। इनमें से पांच गांव कोडोली, जिवलापदर, नेड़नार, ताड़ोनार और आकाबेड़ा का राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन पूर्ण कर दावा-आपत्ति ग्राम पंचायतों के जरिए आमंत्रित की गई थी । इसके बाद पात्र 169 हितग्राहियों को ग्राम सभा के अनुमोदन के बाद चिन्हांकित किया गया है। इन हितग्राहियों को 685 एकड़ भूमि का भू-स्वामी अधिकार पत्र प्रदान किया जायेगा। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि 800 अबूझमाड़ियां लोंगों को  रेडियों भी मुख्यमंत्री द्वारा प्रदाय किए जाएंगे । वे लोग भी देश-विदेश की जानकारी के साथ ही खेती-किसानी और अन्य प्रकार की गतिविधियों के साथ ही मनोरंजन के कार्यक्रम सुनने सकेंगे ।

कलेक्टर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथो 169 अबूझमाड़िया परिवारों को भू-स्वामी का अधिकार पत्र प्रदाय किया जाएगा। पिछले कई सौ सालों में इस इलाके के भीतर 237 गांव बसे है,लेकिन इन गांवों में रहने वाले किसी भी आदिवासी के पास जमीन या मकान का कोई कागजात नहीं है। अबूझमाड़िया जनजाति को शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। सरकार के पास भी इसकी पूरी जानकारी नहंी थी । लेकिन अब राज्य सरकार और जिला प्रशासन के बेहतर कार्ययोजना से राजस्व सर्वे का काम किया जा रहा है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में माओवादियों को गढ़ कहे जाने वाले नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ देश का ऐसा इलाका है जहां पहली बार राजस्व सर्वेक्षण का काम शुरू किया गया है। कुछ गुमराह लोगों द्वारा गांव वालों को बहकाने की भी कोशिश की जा रही है। अबूझमाड़ के राजस्व सर्वेक्षण में जिला प्रशासन के द्वारा अपने-अपने स्तर पर लगातार प्रयास किए है। पहले अबूझमाड़ में कुल कितने गांवों में किसके पास कितनी भूमि,चारागाह या सड़केें या जीवन की दूसरी जरूरी चीजों की उपलब्धता के बारे में पता नहीं था, लेकिन अब राज्य सरकार और जिला प्रशासन के बेहतर प्रयास से अबूझमाड़ को बूझने, जानने लगे है देश-प्रदेश के साथ ही अन्य देशों को लोग ।  अब यहां पारम्परिक तीज-त्यौहार, मड़ई -मेले में देश-विदेशी से सैलानी आने लगे है।

इतिहास के पन्नों को पलटने से पता चलता है कि बस्तर के 4 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके में फैले हुए नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में पहली बार अकबर के जमाने में राजस्व के दस्तावेज एकत्र करने की कोशिश की गई थी, लेकिन घने जंगलों वाले इस इलाके मंे सर्वे का काम अधूरा रह गया  । हालात ये हुइ कि अबूझमाउ़ के इलाकों में बसने वाले आदिवासी आबादी जरूरत की चीजों से वंचित रहे । 80 के दशक में नक्सलवाद ने इस इलाके में अपने पैर जमाने शुरू किए । यह वहीं दौर था, जब अबूझमाड़ के इलाके में प्रवेश के लिए कलेक्टर से अनुमति लेने का नियम बना। वर्ष 2009 में इस नियम को खत्म किया गया है।

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