महापंचायत में शिक्षाकर्मियों की हुंकार…… संविलयन नहीं हुआ तो……परिवर्तन यात्रा मे बदल देंगे विकास यात्रा को…

रायपुर — कल तक खाप पंचायत की धमक देश में सुनने को मिलती थी। लेकिन आज छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की महापंचायत की धमक मंत्रालय से लेकर प्रदेश के कोने कोने में पहुंच गयी है। रायपुर स्थित बूढा तालाब मैदान में शिक्षाकर्मियों की गूंज से रायपुर प्रशासन दंग हो गया है। उम्मीद नहीं थी कि चिलचिलाती धूप में हजारों हजार की संख्या में शिक्षाकर्मी एकजुट हो जाएँगे। शिक्षाकर्मी नेताओं के भाषण सुनकर उम्रदराज हो गए शिक्षाकर्मियों के साथ साथ युवा शिक्षाकर्मियों का जोश देखने ही लायक है। महापंचायत की भीड़ और शिक्षाकर्मियों की जिद ने जाहिर कर दिया कि यदि कुछ करने को ठान लिया जाए तो प्रशासन को झुकना ही पड़ेगा । फिलहाल शिक्षाकर्मियों की महापंचायत की एक एक गतिविधियों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

                           दोपहर एक बजे तक सूर्य का तापमान 44 डिग्री पार को छू दिया है। लेकिन इससे ज्यादा पारा बूढ़ातालाब मैदान स्थित शिक्षाकर्मियों में देखने को मिल रहा है। महापंचायत में प्रदेश के कोने कोने से ऐसा कोई गांव या शहर नहीं जहां से शिक्षाकर्मी महापंचायत में शामिल होने नहीं पहुंचे हों। माधे से पसीने की धार भी उन्हें महापंचायत में शामिल होने से नहीं रोक पाया है। जैसा कि कल तक प्रशासन समझ रहा था कि शायद ही इतनी संख्या में शिक्षाकर्मी महापंचायत में शामिल होंगे।

विशाल पंडाल के अलावा दूर दूर तक शिक्षाकर्मियों ने छांव का सहारा लेकर शासन को ललकारा है। 9 सूत्रीय मांग से टस से मस नहीं होने का शपथ दोहराया है। मंच से हजारो हजार शिक्षाकर्मियों को संबोधित करते हुए मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार शिक्षाकर्मियों की मांग को नहीं मानती है तो उपस्थित सभी शिक्षाकर्मी साथियों को शपथ लेना होगा कि विकास यात्रा को परिवर्तन यात्रा में जल्द से जल्द बदल दिया जाए।

                                             मंच से शिक्षाकर्मियों को बालोद के प्रदीप साहु बालोद, सुकमा के आशीष राम, महासमुंद के शोभा सिंह देव,कोरिया से उदयप्रताप सिंह और रायपुर से पवन सिंह ने सबोधित किया।मंच से सभी नेताओं ने कहा कि शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। लेकिन आज शिक्षक अपने परिवार का भरण पोषण करने में मजबूर है। नौनिहालों को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले शिक्षाकर्मी लगातार गर्त में जा रहा है। सरकार सत्ता के नशे में मगरूर है। अब सबक सिखाने का समय आ गया है।

                 शिक्षक मोर्चा संचालकों ने कहा कि दुख होता है सोचकर हर बार राष्ट्रियता का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षकों को ही सरकार क्यों दोयम व्यवहार करती है। शिक्षकों को मजदूर बना दिया गया है। पिछले 20 सालों से शिक्षाकर्मियों का शोषण किया जा रहा है। 23 कमेटियां बन चुकी हैं। रिपोर्ट रद्दी की टोकरी में चली गयी है। 24 वीं कमेटी की भी हालत कुछ ऐसी ही होने वाली है।

                   मोर्चा संचालकों ने कहा कि चुनावी साल है…सरकार को फैसला करना होगा कि संविलियन को लेकर क्या रूख है। यदि  9 सुत्रीय मांंग को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया तो…हमे ऐलान करने में कोई हिचक नहीं है कि सरकार की गतिविधियों को लेकर हम जरूर गंभीर हैं। प्रदेश के एक लाख 80 शिक्षाकर्मियों के साथ-साथ उनके परिजन विकास यात्रा के पीछे परिवर्तन यात्रा कों झण्डी दिखाने में देरी नहीं करेंगे। ।

                          शिक्षक मोर्चा नेता हेमेन्द्र साहसी ने बताया कि 35 हजार शिक्षाकर्मी महापंचायत में शामिल हो चुके हैं। दो तीन घंटे बाद संख्या पचास हजार पहुंच जाएगी। फिलहाल अभी तक प्रशासन से भरपूर समर्थन मिल रहा है।

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  1. By Ravindra

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