जब कांग्रेसियों ने कहा..जल जंगल जमीन हमारी..फिर बिजली महंगी क्यों….उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

बिलासपुर–ज़िला शहर कांग्रेस कमेटी और पार्षद दल ने संयुक्त रूप से बिजली की आंख मिचौली वाली व्यवस्था के खिलाफ तिफरा स्थित संभागीय बिजली कार्यालय का घेराव किया। नाराज कांग्रेसियों ने लिखित शिकायत पेश कर एक सप्ताह के अन्दर बिजली व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त करने का अल्टीमेटम दिया। कांग्रेसियों ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि व्यवस्था में किसी प्रकार की सुधार नहीं किया जाता है तो बिजली विभाग उग्र आंदोलन का सामना करने को तैयार रहे।

                तिफरा स्थित संभागीय बिजली कार्यालय का कांग्रेस नेताओं ने घेराव किया। कांग्रेसियों ने अधिकारियों को बताया कि खपत कम होने के बाद भी शहर को बिजली की आंख मिचौली से जूझना पड़ रहा है। मुख्य अभियंता की अनुपस्थित में कांग्रेसियों ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता और सुपरिटेंडेट इंंजीनियर भगत को लिखित शिकायत की। एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार करने को कहा। व्यवस्था में किसी प्रकार की सुधार नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी।

                                    कांग्रेस नेताओं ने बताया कि थोड़ी सी हवा पानी से शहर कई कई घण्टे अंधेरे में डूब जाता है। जनता बढी हुई बिजली दर से परेशान है। तेज गर्मी के बीच बिजली नहीं होने से शहरवासियों को बर्दास्त करने की क्षमता कम हो चुकी है। व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता है तो बिजली कर्मचारियों को आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

        कांग्रेस नेताओं कहा कि शहर की बिजली व्यवस्था एक ठेकेदार के भरोसे चल रही है। विभाग में कर्मचारियों का टोंटा है। शहर में जगह जगह खुला ग्रिप्स मौत का निमंत्रण दे रहे हैं। ठेकेदार के लोग औसत रिडिंग कर बिल थमा देते हैं…उपभोक्ताओं में भयंकर नाराजगी है। कांग्रेसियों ने कहा कि बिजली सब स्टेशनों की कमी ,शहर के अंदर दोहरी लाइन बिछाना, स्तर से कमतर केबल का उपयोग करने की खामियो को जल्द से जल्द ठीक किया जाए।

                               इस अवसर पर शहर अध्यक्ष नरेंद्र बोलर और नेता प्रतिपक्ष शेख नजीरुद्दीन ,शेख गफ्फार ,प्रवक्ता शैलेश पांडेय ने बिजली विभाग मंत्री प्रदेश के मुखिया रमन सिंह पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिजली विभाग और विवादों के बीच चोली दामन का संबध है। नकली ट्रांसफार्मर खरीदी,मीटर शिफ्टिंग, इलेक्ट्रिक पोल घोटाला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री मौन है।

                                                         कांग्रेसियो ने कहा कि जल जंगल जमीन सभी कुछ प्रदेशवासियो का है। बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में बिजली की दर 5 रुपये से ज्यादा प्रति यूनिट है।  दिल्ली सरकार बाहर से बिजली खरीदती है लेकिन कम दर पर जनता को सेवा दे रही है । छत्तीसगढ में इसके उल्टा हो रहा है बिजली भी प्रदेश में बनती है। दर भी अधिक है..और यहां की जनता अधेरे में रहने को मजबूर है।

          कांग्रेसियों ने बताया कि सरकार कहती है कि छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिक हब है। लेकिन आए दिन पढ़ने सुनने और देखने को मिल जाता है कि हॉस्पिटल में भर्ती मरीज का आपरेशन टार्च की रोशनी में किया जा रहा है। घंटो बिजली गायब होने से पानी के लिए लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं। प्रतियोगी बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन मंत्री और बड़े अफसरों के घर की बिजली से गुलजार हैं। यही कारण है कि बिजली गुल होने के दर्द का अहसास अधिकारियों को नहीं है।

                     बिजली आफिस घेराव के दौरान प्रदेश सचिव रामशरण यादव ,पूर्व शहर अध्यक्ष विजय पांडेय,रविन्द्र सिंह,पूर्व महापौर राजेश पांडेय,पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश बाजपाई,एस पी चतुर्वेदी,शिवा मिश्रा,ऋषि पाण्डेय, शैलेन्द्र जायसवाल,अखिलेश बाजपाई,रमाशंकर बघेल,काशी रात्रे,जसबीर गुम्बर,तरु तिवारी,धर्मेंद्र शुक्ला,सुभाष ठाकुर,विकी आहूजा,बद्री यादव,भरत लोनिया,करम गोरख,प्रेमदास मानिकपुरी,जयपाल निर्मलकर समेत दो दर्जन से अधिक नेता मौजूद थे।

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