बंधक बनाकर किया ASI ने अत्याचार…मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप…दर्ज हो मानव तस्करी का मामला…बचा रही पुलिस

बिलासपुर— मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पत्रकार वार्ता के दौरान सिविल लाइन एएसआई और शिक्षिका पत्नी पर मानव तस्करी के तहत आरोप दर्ज करने की मांग की है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि एएसआई शैलेन्द्र सिंह और पत्नी शिक्षिका शशि सिंह ने बच्ची के साथ अत्याचार की हदों को पार किया है। जब तक दोनों के खिलाफ पुलिस मानव तस्करी के तहत अपराध पंजीबद्ध नहीं करती है। मामले को किसी भी सूरत में शांत नही होने दिया जाएगा। प्रियंका शुक्ला,नंद कश्यप और निलोत्पल शुक्ला ने बतायाक  दोनों दंतेवाड़ा में रहने के दौरान भी इस प्रकार की गतिविधियों को अंजाम दिया है। अब कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्ची के माता पिता को भी बंधक बनाकर मामले को रफा दफा करने का प्रयास कर रहा है। पुलिस भी मदद कर रही है।

                         आप नेत्री और मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला ने बताया कि दो साल पहले सिविल लाइन एएसआई शैलेन्द्र सिह और उसकी पत्नी शिक्षिका शशि सिंह बीजापुर से नाबालिग बच्ची को बिलासपुर लाया। तात्कालीन समय बच्ची की उम्र 16 साल थी। दोनों ने बच्ची के गरीब माता-पिता को बताया कि बच्ची को घर का सदस्य बनाकर रखेंगे। वेतन के साथ खाना खर्च कपड़े देंगे। यदि बच्ची पढ़ना चाहेगी तो उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे भी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। शैलेन्द्र ने ना तो वेतन दिया। ना ही अपने घर के सदस्यों की तरह नाबालिग बच्ची को पाला पोशा।

                प्रियंका,नीलोत्पल और नन्द कश्यप ने बताया कि शैलेन्द्र सिंह और शशि सिंह अभिलाषा परिसर सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में रहते हैं। इन दो सालों में नाबालिग को उसके माता पिता और परिजनों से मिलने नहीं दिया गया। बात बात पर बच्ची के साथ मार पीट किया जाता रहा। पति पत्नी जब अपने डूय्टी पर जाते तो उसे एक कमरे में ताला मारकर बंद कर दिया जाता था। खुद बच्ची ने भी पुलिस को यह जानकारी दी है। बच्ची ने खुद बताया है कि कई बार तो पति पत्नी उसके साथ पशुओं की तरह लात घुसों से मारपीट किया। एक बार तो शशि सिंह ने उसके चेहरे पर लात से मारा। उसकी अंगुलियां भी तोड़ दी गयी है।

                                           प्रियंका निलोत्पल और नन्द ने बताया कि बच्ची के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी हेमलता ने हेल्पलाइन सेंन्टर को दी। इसके बाद उसे ताला तोड़कर छुड़ाया गया। लोगों ने देखा कि बच्ची की दाएं हाथ की छोटी उंगली टूट चुकी है। जख्म अभी भी हरा है। बायें आंख पर खून का थक्का जम चुका है।लोगों को देखते ही बच्ची रोने लगी। इस दौरान सबके सामने अपनी पीड़ा को रो रो कर बताय़ी।

मामले को रफा-दफा का प्रयास

                     पत्रकार वार्ता में मौजूद वकील दिव्या और निकिता ने बताया कि मामले को सिरगिट्टी पुलिस रफा दफा का प्रयास करने लगी। काफी जिद के बाद थाना प्रभारी ने एफआईआर तो दर्ज किया। लेकिन मानव तस्करी एक्ट लगाने से इंकार कर दिया। जबकि दो साल पहले बच्ची की उम्र मात्र 16 साल थी। इन दो सालों में बच्ची को उसके माता पिता से मिलने नहीं दिया गया। चूंकि दोनो आरोपी सरकारी कर्मचारी है। खासौतर पर शैलेन्द्र सिंह पुलिस अधिकारी भी है। इसलिए जानबूझकर पुलिस ने शैलेन्द्र और चकरभाठा में पदस्थ शिक्षिका शशि सिंह के खिलाफ मानव तस्करी की धारा 307(7) का मामला दर्ज नहीं किया गया। ना ही जुवेनाइल एक्ट का मामला लगाया गया। यद्यपि काफी जिद के बाद दोनों के खिलाफ सिरगिट्टी थाना प्रभारी ने एट्रोसिटी की धारा को लगाया तो जरूर है। लेकिन मामले को रफा दफा करने का प्रयास अभी भी किया जा रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार और अनुसूचित जन जाति से करेंगे शिकायत

               मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि मामले की जानकारी राष्ट्रीय संगठन और अनुसूचित जनजाति आयोग से करेंगे। दोनों आरोपियों के खिलाफ जुबेनाईल एक्ट और मानव तस्करी के तहत कार्रवाई की मांग करेंगे। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिळाफ 342,294,506,504,34 आईपीसी और एसी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है।

माता पिता को बनाया बंधक

                       मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बताया कि शैलेन्द्र और शशि ने बच्ची के माता पिता को बुलाकर बंधक बनाया। माता पिता को लोगों से ना मिल सके इसके लिए सेंसर की तरफ काम किया। जानकारी दी जा रही थी कि बच्ची को दंतेवाड़ा भेज दिया गया है। कभी बताया गया कि बच्ची के मामता पिता लौटकर चले गए हैं। जबकि बच्ची के पिता को घर में बंधक बनाकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश होती रही है। प्रियंका ने बताया कि फोन पर बच्ची के पिता ने कहा कि साहब से पंगा लेना ठीक नहीं है। इसलिए मुझे मामले में कुछ नहीं कहना है। प्रियंका के अनुसार आरोपी दम्पत्ति बच्ची के पिता चन्नु पुनेम पर दबाव डालकर मामले को रफा दफा कर रहे हैं। लेकिन मंसूबों पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

पूर्व में भी कई आरोप

            मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार एएसआई शैलेन्द्र और शशि ने पहले भी गरीब माता पिता की बच्चियों कों काम के बहाने घर ले गया। बंधक बनाकर अत्याचार किया। कई मामलों में तो जांच भी हुई है। बावजूद इसके दोनों के खिलाफ आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है।

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