शिक्षक मोर्चा संचालक विकास का दो टूक..सरकार करे राजस्थान मॉडल को जाहिर… अब आर पार की बारी

बिलासपुर— शिक्षाकर्मियों में कमेटी के साथ बैठक के बाद आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। कमेटी की रवैया देखने के बाद शिक्षाकर्मी एक बार एकजुट होने लगे हैं। मोर्चा नेताओं की माने तो सरकार राजस्थान मॉडल से डर गयी है। इसलिए अब मध्यप्रदेश मॉडल की बात कह रही है। सच्चाई तो यह है कि जब मध्यमप्रदेश में शिक्षाकर्मियों का अभी तक संविलियन ही नहीं हुआ है तो किस बात का अध्ययन करने कमेटी भोपाल जाएगी।

                             नवीन शिक्षाकर्मी संघ के अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत और उपाध्यक्ष अमित कुमार नामदेव ने बताया कि राजस्थान में संविलियन और  शासकीयकरण का प्रावधान है। राजस्थान में शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति देने की भी व्यवस्था है। वर्ग तीन के लिए समानुपातिक व्यवस्था है। जबकि राजस्थान में शिक्षाकर्मियों को 7 वां वेतनमान भी दिया जा रहा है। टीम ने अध्ययन में पाया है कि राजस्थान के शिक्षाकर्मियों को जीपीएफ और समग्र में सीपीएस की भी व्यवस्था है।

                                 मोर्चा नेता  विकास और अमित ने बताया कि राजस्थान का माडल छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मियों के लिए सकारात्मक है। शायद यही कारण है कि छत्तीसगढ़ शासन इस माडल को अपनानने के लिए तैयार नहीं है।यह जानते हुए भी कि मध्यप्रदेश में अभी तक संविलियन का आदेश भी नहीं हुआ है। बावजूद इसके कमेटी मध्यप्रदेश जाकर वहां का मॉडल देखना चाहती है। शासन का ऐसा कहना बहकाने के अलावा कुछ नहीं है।

                   शिक्षाकर्मी नेता ने बताया कि कमेटी को अच्छी तरह से मालूम है कि मध्यप्रदेश में अभी तक आदेश ही नही हुआ है। तो फिर किस बात का अध्ययन करने कमेटी मध्यप्रदेश जाएगी। यदि कमेटी मध्यप्रदेश जाती भी है तो वहीं शिवराज सिंह के घोषणा पत्र के अलावा कुछ हासिल नहीं होना है। प्रदेश के एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मी चाहते हैं कि राजस्थान का रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए।राजस्थान मॉडल की तर्ज पर प्रदेश के शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाए। सभी शिक्षाकर्मियों को  शासकीयकरण के अलावा, क्रमोन्नति, समानुपातिक, 7 वां वेतनमान दिया जाए।

                          अमित नामदेव ने बताया कि शिक्षक मोर्चा बैठक के बाद निर्णय लिया गया है कि कमेटी और शासन का रुख मांगो को लेकर सकारात्मक नही है। 11 मई को रायपुर में महापंचायत किया जाएगा। महापंचायत में प्रदेश के सभी शिक्षाकर्मी शामिल होगें। आम सहमति के बाद आगामी कार्यक्रम का एलान किया जाएगा।

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