शिक्षाकर्मियों की मांगों को लेकर सरकार गंभीर नहीं..बढ़ रहा असंतोष..सांकेतिक विरोध जारी

बालोद–जिले के शिक्षाकर्मी शिक्षक पंचायत न नि मोर्चा के आह्वान पर संविलियन सहित 9 सूत्रीय मांगो के समर्थन मे आज 15 वे दिन जिले के एक मात्र बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन केंद्र शासकीय आदर्श बा उ मा वि बालोद मे काली पट्टी लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन लगातार कर रहे है।सांकेतिक प्रदर्शन के 15 वे दिन आज जिला मोर्चा के सहसंचालक वीरेंद्र देवांगन,शेष लाल साहू,शिवेन्द्र बहादुर साहू,तुकाराम साहू एवं गुरूर ब्लाक मोर्चा संचालक सूरज गोपाल गंगबेर के नेतृत्व मे जिले के शिक्षा कर्मियो ने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन काली पट्टी लगाकर जारी रखा है। तथा काली पट्टी लगाकर मूल्यांकन कर रहे है।

आज मोर्चा के पदाधिकारियो के साथ  मधुमाला कौशल,सुषमा पटेल, चैलेंश साहू ,रोशनी साहू,नरेश नागवंशी,खेमन साहू,राधारमन वारदे,सिवाने,देवनारायण सिन्हा,राम सिंह ठाकुर सहित कई शिक्षाकर्मियो ने सांकेतिक विरोध किया व संविलियन पर निर्णय होने मे हो रहे विलंब पर नाराजगी जताई ।शिक्षा कर्मियो की मांगो पर बनाई गई कमेटी का कार्यकाल दोबारा एक माह के लिए बढाने व राजस्थान माडल के अध्ययन के लिए अधिकारियो को राजस्थान भेजने के फैसले से शिक्षा कर्मियो मे नाराजगी है।

तथा इस फैसले को शिक्षा कर्मियो ने केवल समय बिताने का सरकार का बहाना बताया है।जबकि छत्तीसगढ़ पंचायत ननि शिक्षक संघ द्वारा अगस्त क्रांति के समय से राजस्थान के तर्ज पर संविलियन किये जाने का मांग के साथ राजस्थान के आदेश व नियमावली की प्रति सौपकर अधिकारियों के समक्ष पूर्व मे ही प्रमुखता से रखा जा चुका है।फिर अन्य राज्यो के दौरे की आवश्यकता नही है ।

शासन अपने कर्मचारियों से हर काम समय पर करने की अपेक्षा रखती है। लेकिन जब उन्हीं कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने हेतु कमेटी का गठन होता है तो 3 महीने की लंबी समयावधि के बाद भी कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाती है और उसे 1 माह का एक्सटेंशन दिया जाता है ।बढ़े हुए कार्यकाल में भी कमेटी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाती है और फिर शासन द्वारा उसे फिर से 1 माह का एक्सटेंशन दे दिया जाता है जो शिक्षाकर्मियों के लिए छलावे से बढ़कर कुछ भी नहीं है। ।जिससे शिक्षा कर्मियो मे नाराजगी बढ रही है।

विदित हो कि मुख्यमंत्री ने संविलियन के विषय पर कमेटी बनाने की बात कही थी लेकिन कमेटी केवल स्थानांतरण, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति और वेतन भत्ते को लेकर बनाई गई है लेकिन संविलियन, सातवां वेतनमान, क्रमोन्नति और 8 वर्ष के सेवा बंधन जैसे मुद्दों को कमेटी में स्थान ही नहीं दिया गया है। जिससे कमेटी की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह पहले से लगा हुआ है और बढ़ाएं गए समय सीमा में भी इस विषय को शामिल नहीं किया गया है जैसी कि सभी शिक्षाकर्मियों को उम्मीद थी ।इससे यह बात परिलक्षित हो रही है कि शासन अभी भी शिक्षाकर्मियों की मांग को लेकर गंभीर नहीं है ।

शिक्षक पं न नि मोर्चा के जिला संचालक दिलीप साहू एवं प्रांतीय सहसंचालक प्रदीप साहू ने बताया कि लगातार कमेटी के कार्यकाल को बढाने व मोर्चा द्वारा राजस्थान सहित अन्य राज्यो के संविलियन के 157 पेज के दस्तावेज तथ्यात्मक रूप से कमेटी को पहले से सौंपे जाने के बावजूद अधिकारियो को राजस्थान भेजे जाने के फैसले से शिक्षा कर्मियो मे नाराजगी है।तथा प्रांतीय निर्देश व रणनीति अनुसार जिले मे सांकेतिक विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रखा जाएगा।जिला मोर्चा ने शासन से शीघ्र संविलियन सहित सभी मांगो पर अतिशीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।

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