पूर्वी राज्यों के सम्मेलन में पोलावरम मामले पर छत्तीसगढ़ का पक्ष पुरजोर ढंग से रखा मंत्री बृजमोहन ने

कोलकाता।जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज कोलकाता में आयोजित जल संसाधनों पर पूर्वी राज्यों के एक दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन में ओड़िशा और आंध्रप्रदेश की अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में प्रदेश सरकार के प्रस्तावों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। केन्द्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में जल संसाधन मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार के पक्ष को जोरदार ढंग से रखा। जल संसाधन मंत्री ने केन्द्रीय जल आयोग से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चयनित छत्तीसगढ़ की तीन सिंचाई परियोजनाओं में से केलो वृहद परियोजना की पुनरीक्षित लागत 990 करोड़ 34 लाख रूपए की स्वीकृति जल्द दिलाने का अनुरोध किया।

सम्मेलन में पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के जल संसाधन मंत्री शामिल हुए। झारखण्ड और बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में मौजूद थे।श्री अग्रवाल ने सम्मेलन में ओड़िशा की ईब नदी पर प्रस्तावित सिंचाई परियोजना सहित तेलगिरी मध्यम सिंचाई परियोजना, नवरंगपुर सिंचाई परियोजना, खड़गा बैराज परियोजना, अपरजोंक अंतर्राज्यीय परियोजना (पतोरा बांध), पोलावरम अंतर्राज्यीय परियोजना, इंद्रावती जोरा नाला विवाद, गोदावरी (इंचमपल्ली)-कावेरी (ग्राण्ड एनीकट) लिंक परियोजना के संबंध में छत्तीसगढ़ के पक्ष को जोरदार ढंग से रखा। उन्होंने केलो वृहद परियोजना, मिडिल कोलाब बहुउद्देश्यीय परियोजना तथा उरमाल परियोजना (मैनपुर-जिला गरियाबंद) के संबंध में सम्मेलन के दौरान चर्चा की। श्री अग्रवाल ने ओड़िशा सरकार द्वारा ईब नदी पर प्रस्तावित सिंचाई परियोजना के अंतर्गत जलाशय के जल स्तर पर आपत्ति की।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना में छत्तीसगढ़ की 110 हेक्टेर कृषि भूमि डूबान में आने वाली है। इससे प्रभावित किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्र में कमी हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में ईब नदी के जलग्रहण क्षेत्र के बहाव का 25 प्रतिशत जल इस परियोजना को देने के बावजूद छत्तीसगढ़ को विद्युत और सिंचाई का लाभ नहीं मिलेगा। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ओड़िशा में इंद्रावती की सहायक तेलगिरी नदी पर प्रस्तावित सिंचाई परियोजना के निर्माण से छत्तीसगढ़ के उपयोग के लिए प्राप्त होने वाले इंद्रावती नदी के जल की मात्रा में कमी होने की पूरी संभावना है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि गोदावरी जल विवाद अभिकरण के अनुबंध अनुसार जगदलपुर गेज एवं डिस्चार्ज साइड में छत्तीसगढ़ राज्य के उपयोग के लिए वार्षिक पानी की मात्रा 47.80 टीएमसी तथा गैर मानसून अवधि में पानी की मात्रा 8.115 टीएमसी उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से तेलगिरी परियोजना प्रस्तावित है।उन्होंने कहा कि ओड़िशा में खड़गा नदी पर खड़गा बैराज परियोजना प्रस्तावित है। खड़गा नदी तेल नदी की सहायक नदी है और तेल नदी महानदी की सहायक नदी है। इस तरह खड़गा नदी महानदी कछार के अंतर्गत है। इस बैराज का प्रस्तावित जल ग्रहण क्षेत्र एक हजार 890 वर्ग किलोमीटर है।

बैराज की लम्बाई 317 मीटर और ऊंचाई 10 मीटर है। बैराज से 23 हजार 500 हेक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है। बैराज की फिजीबिलिटी रिपोर्ट पर अंतर्राज्यीय समझौते के तहत केन्द्रीय जल आयोग के माध्यम से छत्तीसगढ़ से सहमति प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि वर्तमान छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) और ओड़िशा के बीच निष्पादित अंतर्राज्यीय समझौते में यह बैराज शामिल नहीं है। दोनों राज्यों के बीच महानदी कछार के वाटर एलोकेशन के लिए प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय मे विचाराधीन है। इसलिए वर्तमान में इस बैराज पर अभिमत देना उचित नहीं होगा।

अपर जोंक परियोजना से छत्तीसगढ़ को पानी देने की मांग
श्री अग्रवाल ने सम्मेलन में कहा कि छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के अपरजोंक अंतर्राज्यीय परियोजना (पतोराबांध) के संबंध में तत्कालीन मध्यप्रदेश और ओड़िशा सरकार के बीच 1983 में लिए गए निर्णय अनुसार छत्तीसगढ़ के 810 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई हेतु अनुबंध किया गया है। इस संबंध में 24 दिसम्बर 2003 को दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के पांचवीं अंतर्राज्यीय बैठक में छत्तीसगढ़ के लिए 0.6966 क्यूसेक पानी दिए जाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से छह करोड़ 43 लाख रूपए का राज्यांश भी ओड़िशा सरकार को तीन किश्तों में भुगतान कर दिया गया। बैठक में अपरजोंक अंतर्राज्यीय जलाशय परियोजना में जलभराव के अनुसार अनुपातिक पानी छत्तीसगढ़ को दिए जाने की सहमति दी गई। बैठक में लिए गए निर्णय के बाद भी छत्तीसगढ़ को इस परियोजना से 0.6966 क्यूसेक पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिसके कारण निर्धारित 810 हेक्टेयर में सिंचाई नहीं हो पा रही है।

पोलावरम परियोजना में बांध की ऊंचाई 177 फीट रखने पर छत्तीसगढ़ को आपत्ति
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि इंदिरासागर (पोलावरम) परियोजना आंध्रप्रदेश की वृहद बहुउद्देश्यीय परियोजना है। यह परियोजना आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन है। इससे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा तहसील का क्षेत्र डूबान में संभावित है। पोलावरम बांध कोंटा से लगभग 130 किलोमीटर नीचे की ओर बन रहा है। पोलावरम बांध के निर्माण के संबंध में तत्कालीन मध्यप्रदेश के समय सात अगस्त 1978 के अनुबंध के तहत कोंटा में बैकवाटर प्रभाव सहित अधिकतम जल स्तर 150 फीट रखने की सशर्त सहमति प्रदान की गई थी। इस सहमति के विपरीत अधिकतम जल स्तर (बांध की ऊंचाई) 177 फीट होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को आपत्ति है। यह प्रकरण उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।

ओड़िशा में कंट्रोल स्ट्रक्चर से छत्तीसगढ़ को इंद्रावती-जोरा नाले से नहीं मिल रहा पानी
श्री अग्रवाल ने सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती जोरा नाला मामले की ओर भी केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।  उन्होंने कहा कि ओड़िशा के किसानों और स्थानीय निवासियों द्वारा इंद्रावती में निर्मित कंट्रोल स्ट्रक्चर में रूकावट पैदा करने के कारण  छत्तीसगढ़ को गर्मी के मौसम में अनुबंध के अनुसार पानी नहीं मिल रहा है। अनुबंध के अनुसार गर्मी में इंद्रावती नदी में जल बहाव आधा हिस्सा छत्तीसगढ़ को मिलना चाहिए।

गोदावरी-कावेरी एनीकट लिंक परियोजना में छत्तीसगढ़ का डूबान क्षेत्र अस्पष्ट
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि गोदावरी (एकीनेपल्ली)-कावेरी ग्राण्ड एनीकट लिंक परियोजना से छत्तीसगढ़ में डूबान का क्षेत्रफल अस्पष्ट है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की जल उपयोगिता का आंकलन भी कम किया गया है। केन्द्र सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। श्री अग्रवाल ने कहा कि ओड़िशा के कोरापुट जिले में कोलाब नदी पर मिडिल कोलाब परियोजना के बनने से छत्तीसगढ़ के लिए आवश्यक जल की मात्रा की उपलब्धता में कमी होने की आशंका है। मिडिल कोलाब परियोजना के अंतर्गत पहला व्यपवर्तन बैराज बनने से छत्तीसगढ़ और ओड़िशा राज्य की सीमा में कोलाब नदी पर पानी की मात्रा कम हो जाएगी। इससे नगरनार एनएमडीसी स्टील प्लांट को स्वीकृत जल की मात्रा का मिलना संभव नहीं होगा। कोलाब नदी (शबरी) में प्रस्तावित पांच कम्पनियों द्वारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर उत्पादन के लिए ग्राम तोलावाड़ा जिला बस्तर में कुल 53 क्यूसेक जल की आपूर्ति प्रभावित होगी। सुकमा जिले में कोलाब नदी प्रवेश करने पर 2751 वर्ग किलोमीटर केचमेन्ट क्षेत्र का ओड़िशा राज्य द्वारा उपयोग किए जाने से सुकमा जिले में कोलाब नदी में जल प्रवाह कम हो जाएगा।

सम्मेलन में गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखण्ड में तेल नदी पर उरमाल एनीकट का निर्माण पुनः शुरू करवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एनीकट में डायफाम वाल निर्माण के लिए गाइडवाल निर्माण तथा अपस्ट्रीम में 50 मीटर का कार्य हो चुका है। इस एनीकट के निर्माण को वर्ष 2013 से ओड़िशा के ग्राम बाबरिया के किसानों द्वारा बंद करवा दिया गया है।

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