अमित जोगी बोले – पेंड्रा-मरवाही की तरक्की नहीं चाहती कांग्रेस, एनजीटी के जरिए रेल कारीडोर पर अड़ंगा लगाने की कोशिश

रायपुर। अजीत जोगी के अथक प्रयासों से आदिवासी बाहुल्य मरवाही क्षेत्र से होकर बनने वाली पेण्ड्रारोड से गेवरा ईस्ट-वेस्ट रेल कारीडोर परियोजना के कार्य को दूसरे क्षेत्र में बनवाने का परिवाद एनजीटी में दायर करना कांग्रेस नेताओं के द्वारा कोयला माफियाओं के साथ मिलकर किया गया षड़यंत्र है। ऐसा षड़यंत्र करके कांग्रेस नेता मरवाही, कोटा,तानाखार एवं कटघोरा क्षेत्र का विकास बाधित करना चाहते हैं क्योंकि इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों को रेल सुविधा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र का औद्योगिक विकास भी तेजी से होगा ।

उपरोक्त बयान जारी करते हुये मरवाही विधायक अमित जोगी ने आरोप लगाया कि मरवाही क्षेत्र से होकर बनने वाली पेण्ड्रारोड से गेवरा ईस्ट-वेस्ट रेल कारीडोर परियोजना को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत रोकने की साजिश रच रहे है इसलिये उन्होने अपने समर्थक अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के माध्यम से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में परिवाद दायर कराया है और इस परिवाद के माध्यम सेएनजीटी में इस कार्य का मार्ग पेण्ड्रारोड से गेवरा रोड के स्थान पर परिवर्तन कर सलका से सीपत होते हुए बनाने का मांग किया है।

मरवाही विधायक ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के द्वारा मरवाही क्षेत्र के आदिवासियों के विकासके विरूद्व कोई भी साजिश सफल नही होने दिया जायेगा। उन्होने कहा कि इस रेल्वे कारीडोर के निर्माण से मरवाही, कोटा, तानाखार,कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के गावों को जहां एक ओर लोगों और वनोपज के आवागमन और व्यापार के लिये रेल्वे सुविधायें मिलेंगी वहीं दूसरी ओर इस रेल लाईन से क्षेत्र का औद्योगिक विकास तेजी से होगा ।

उन्होने कहा कि 122 किलोमीटर की यह रेल लाईन सिर्फ कोयला, कृषि-उद्यानिकी और वनोपज परिवहन ही नही बल्कि क्षेत्र के विकास के अनेक सम्भावनाओं का आधार बनेगा परंतु कांग्रेस नेता ने एनजीटी में इस रेल लाईनका मार्ग बदलने का परिवाद दायर कर इस योजना को खटाई में डालने और इस योजना को भटकाने का प्रयास किया है क्योंकि याचिका दायर करवाने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदासमहंत नही चाहते है कि इस क्षेत्र में यातायात की सुविधा बड़े जिससे यहां के लोग सम्पन्न हो सके।

ये लोग सिर्फ आदिवासियों के नाम की राजनीति करते है, इन्हें आदिवासियों के विकास से कोई लेना-देना नही है,इसलिये एनजीटी द्वारा नियुक्त किये गये कमिश्नर की जांच के दौरान इन्होने याचिकाकर्ता के साथ बिलासपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष एवं अन्य नेताओं को रेल लाईन का काम रोकने के समर्थन में पेण्ड्रारोड भेजा है ।

उन्होने कहा कि इस रेल लाईन के मार्ग परिवर्तन के मामले में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उईके की भूमिका भी संदेहास्पद है क्योंकि उन्होने अब तक इस मामले में कोई बयान जारी नही किया है जबकितानाखार क्षेत्र के विकास से भी ये मामला जुडा हुआ है ।

अमित जोगी ने कहा कि एनजीटी में याचिका दायर करने वाले और कराने वाले को अच्छे से पता है कि एनजीटी पर्यावरण से सम्बंधित मामलों में बहुत गंभीर है तथा एनजीटी को निर्णय लेने के साथ-साथ अपने निर्णय पर कार्यवाही करने का भी अधिकार प्राप्त है इसलिये याचिका में वन भूमि के पेड़ों की कटाई को रोकने तथा टाइगर रिजर्व एवं हसदेव अरण्य के जंगली जानवरों की सुरक्षा का हवाला देकर इस रेल लाईन को सलका सीपत की ओर से बनाने का मांग करते हुये यह दलील भी दिया गया है कि पेण्ड्रारोड से गेवरारोड रेल लाईन में आने वाली लागत राशि की अपेक्षा मात्र 25 प्रतिशत लागत में सलका-सीपत रेल लाईन बन जायेगा।

उन्होने यह भी कहा कि यदिवन विभाग की एनओसी के बगैर कहीं पेड़ काटे गये है या किसी किसान के साथ मुआवजा वितरण में लापरवाही बरती गई है तो दोषियों के विरूद्व दण्डात्मक कार्यवाही होना चाहिये परंतु मरवाही,कोटा, तानाखार, कटघोरा क्षेत्रवासियों के विकास को ध्यान में रखकर इस रेल लाईन का कार्य नही रोका जाना चाहिये बल्कि इस कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण किया जाना चाहिये ।

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