जोर पकड़ रहा,सरकारी कर्मियों की पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने का अभियान

भोपाल।सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेँशन स्कीम की बहाली को लेकर मुहिम धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। इस सिलसिले में  NMOPS मतलब नेशनल मूवमेंट फाॅर ओल्ड पेशन के नाम पर एक रा्ष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। जिसे लेकर लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है।यह जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश एनएमओपीएस प्रांतीय कोर कमेटी के सदस्य रमेश पाटिल ने बताया कि यह  पुरानी पेंशन बहाली  के लिए एक राष्ट्रीय अभियान है । अर्थात हम 2005 के पूर्व लागू पेंशन/पारिवारिक पेंशन की मांग कर रहे है।जो सेवानिवृत्त कर्मचारी को प्रतिमाह निश्चित वेतन की ग्यारन्टी देती है।जबक वर्तमान मे NPS अर्थात न्यू पेंशन स्कीम लागू है यह शेयर मार्केट पर निर्भर है।जो आपके अंतिम जमा राशि के 40% प्रतिशत पर ब्याज के रूप मे पेंशन मिलेगी जो बहुत कम मिलेगी।जिसमे जीवन निर्वाह की कल्पना भी नही की जा सकती।
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कर्मचारी के मृत्यु पर पति/पत्नि को भी इसी प्रकार ब्याज पेंशन के रूप मे मिलेगी और उसकी भी मृत्यु हो जाए तो 40% राशि जो आपकी थी शासन राजसात कर लेगी।पूरानी पेंशन की मांग इसलिए भी कर रहे है कि यह किसी कर्मचारी की उस सुविधा का अनिवार्य भाग है जो सुरक्षा के तौर पर पेंशन के साथ जीपीएफ, बीमा, उपादान (ग्रेच्युटी)का भाग है।एक सुविधा पुरानी पेंशन मिल गई तो अन्य सुविधा स्वतः ही मिल जायेगी।इसको ऐसा समझे कि अध्यापक की मृत्यु पर पीडि़त परिवार को 1 लाख मिलता है और उपादान मे 16•5 माह का वेतन या बीस लाख जो कम हो राशि मिलती है। उन्होने सभी से इस अभियान से जुड़ने की अपील  करते हुए कहा कि निसंकोच NMOPS अभियान से जुडे भविष्य और बुढापे को सुरक्षित करे।राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान को लेकर हलचल है।
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उन्होने बताया कि केन्द्र सरकार के कई मंत्री की मांग पर सहमति बनते जा रही है।अब ये हमारी की इच्छा शक्ति पर निर्भर है कि हम इन सुविधाओ को लागू करवाने के लिए  कितने दृढ है?अभियान को सफल बनाने के लिए  कितना हम सशरीर भागीदार होते है?NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु  उत्तरप्रदेश से है जो वहा कुछ सुविधाए लागू करने मे सफल रहे।इस अभियान का नेतृत्व मध्यप्रदेश मे  परमानन्द डेहरिया  कर रहे है।यह आन्दोलन का आन्दोलन अर्थात महाआन्दोलन है।जो देश मे 1 जनवरी 2004 के बाद पुरानी पेंशन से वंचित और कर्मचारियो अधिकारियो को उनके अधिकार दिलाने के लिए चलाया जा रहा है।मध्यप्रदेश मे यह आन्दोलन अल्प समय मे तेजी से आगे बढ रहा है।यह संघ रहित, गुट रहित  आन्दोलन है जो छोटे से छोटे कर्मचारी और उच्च अधिकार सम्पन्न अधिकारी के सहयोग से आपसी सद्भाव व समन्वय से चलाया जा रहा है।
उन्होने बताया कि  कि कर्मचारियो-अधिकारियो को पुरानी पेंशन की जगह न्यू पेंशन स्कीम(NPS) के काले कानून की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से की थी।जिस पर लम्बे समय बाद संसद की सहमति ली गई।पुरानी पेंशन/पारिवारिक पेंशन की जगह न्यू पेंशन स्कीम लागू करते समय कर्मचारियो को खुब सब्जबाग दिखाये गये।वास्तविकता उसके उलट है।निजी कंपनियो के दबाव मे लाभ पहुंचाने के दृष्टि से लिया गये फैसले ने कर्मचारियो-अधिकारियो की भविष्य और बुढापे को को चौपट और आशंकित कर दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी-अधिकारी को न्यू पेंशन स्कीम के तहत जो पेंशन मिलेगी वो उस समय के हिसाब से जीवन गुजारने और परिवार का उदर पोषण करने के हिसाब से नाकाफी होगी।
जब पुरानी पेंशन को बंद कर न्यू पेंशन स्कीम का काला कानून बना तो उस समय के मान्यता प्राप्त, गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी-अधिकारियो के संगठनो ने इसका पूरजोर विरोध न कर केवल औपचारिकता निभाई।ये संगठनो के स्वार्थ का सबसे बडा उदाहरण है कि तत्कालीन कर्मचारी-अधिकारियो के संगठनो ने स्वयं पर पुरानी पेंशन लागू होने के कारण आने वाली पीढ़ी का हितचिंतन नही किया।अब हालात ये है कि उन कर्मचारी-अधिकारियो की ही भावी पीढ़ी अपने भविष्य और बुढापे को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रही है।
पुरानी पेंशन के विरोध मे तत्कालीन सरकार के अपने तर्क थे लेकिन इस सच को भी स्वीकार करना होगा कि सरकार कर्मचारियो-अधिकारियो की सामाजिक सुरक्षा के दायित्व से भागने मे सफल हुई जो शर्मनाक है।इसी का दुष्परिणाम है कि शासकीय सेवाओ के प्रति प्रतिभाओ की रूचि घटी है।न्यू पेंशन स्कीम का सारा दायित्व NSDL के पास है । लेकिन यह रहस्यमय़ी संस्था के रूप में ही उभरकर आई है। इसके ना पर्याप्त कार्यालय मौजूद है ना ही जमा राशि की जानकारी नियमित तौर पर कर्मचारी-अधिकारियों को सप्रमाण दी जाती है। कर्मचारी-अधिकारी अपनी जमा पूंजी को लेकर हमेशा आशंकित रहते हैं। शासन की ओर से भी कर्मचारी-अधिकारियों के जमा पूंजी के सबूत के तौर पर GPF पासबुक जैसी किसी प्रामाणिक प्रणाली का विकास नहीं किया गया है।
रमेश पाटिल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कुछ युवाओं ने अटेवा (ऑल टीचर्स एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन) के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली अभियान शुरू किया था  . इसका वृहद रूप अब हमारे सामने हैं। जिसे हम n m o p s के रूप में जानते हैं। अटेवा अध्यक्ष के रुप में  विजय कुमार बंधु द्वारा जो अभियान चलाया गया था वह अब पुरानी पेंशन बहाली का राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। इस अभियान से कर्मचारी-अधिकारियों में उम्मीद की किरण जागी है की उनका भी भविष्य और बुढ़ापा सुरक्षित होगा। n m o p s अभियान अपने उद्देश्य पुरानी पेंशन बहाली मे सफल होगा ऐसा विश्वास का वातावरण बन चुका है   । लेकिन यह भी जरूरी है कि किसी भी अभियान के सफलता के लिए उस अभियान के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले कर्मचारी-अधिकारी जी जान से जुड़ जाए और तन मन धन से सहयोगात्मक स्थिति में रहे।

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