सुभाष की स्थिति अभी भी गंभीर…परिजनों ने कहा क्या कर रही पुलिस…क्यों नहीं मारा गया छजकां कार्यालय में छापा

बिलासपुर—घटना के दो सप्ताह पूरे होने के बाद भी सब इंस्पेक्टर सुभाष चौबे पर जानलेवा हमला कर फरार होने वालों को पुलिस अभी तक पकड़ नहीं पायी है। हमेशा दूसरे राज्यों से अपराधियों को पकड़ने का दावा करने वाली बिलासपुर पुलिस अपने ही जवान के गुनहगारों को पकड़ने में नाकामयाब साबित होते नजर आ रही है। शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने घटना के चश्मदीह प्रशांत त्रिपाठी से पूछताछ भी नहीं की है।  न ही घटना के बाद सुभाष चौबे के खून से लथपथ कपड़ों को ही बरामद किया है। खून से लथपथ कपड़ा अभी भी अपोलों में पुलिस प्रशासन का इंतजार कर रहा है। मामले में इतनी लापरवाही गहरे साजिश की तरफ इशारा करते हैं।

                      मालूम हो कि सुभाष चौबे जगदलपुर में एसआई पर पदस्थ हैं। छुट्टी पर सरकण्डा स्थित अपने घर आया था। 29 मार्च को करीब रात्रि 9 बजे सुभाष चौबे का पुराना साथी आशुतोष तिवारी बुलाने आया। दोनों कार में सवार होकर राजेश्वर साहू और सूर्यकांत साहू के साथ अशोक नगर स्थित छजकां नेता के कार्यालय पहुंचे। इसके बाद छजकां कार्यालय के बगल से प्लॉट में गए। मौके पर पहले से सोमी राव मौजूद था। काफी देर तक लोगों में हंसी ठहाके का दौर चला। इसी दौरान सुभाष और सोमी राव के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। बैठक से सूर्यकांत और सोमी राव चले गए। कुछ देर बाद दोनों सिद्धार्थ पांडेय और साथियों के साथ लौटकर आए। सुभाष चौबे पर लाठी, राड और बेसबाल से जानलेवा हमला कर दिया । सर पर धारदार हथियार भी चलाया। एसआई के बेहोश होने पर आरोपी  फरार हो गए।

                        घायल सुभाष को अन्य साथियों के सहयोग से सिम्स लाया गया। बाद में अपोलो में भर्ती कराया गया। फिलहाल सुभाष दो सप्ताह बाद घर लौटने की तैयारी में है। बावजूद इसके उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

         सुभाष के परिजनों की शिकायत पर पांच आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है। बावजूद इसके अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। सुभाष के परिजनों ने पुलिस की हीलाहवाली पर नाराजगी जाहिर की है। प्रशांत त्रिपाठी के छोड़ने और फरार आरोपियो के नहीं पकड़े जाने को गहरी साजिश बताया है। परिजनों ने बताया कि घटना के बाद जनता कांग्रेस युवा नेता प्रशांत त्रिपाठी को पकड़ा तो जाता है लेकिन कुछ घंटो के बाद छोड़ भी दिया जाता है। यह जानते हुए भी कि सारा घटनाक्र जनता कांग्रेस नेता प्रशांत त्रिपाठी के कार्यालय और प्लांट में ही हुआ है।

                     सुभाष  केपरिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि दूसरे राज्यों से बदमाशों को पकड़ने का दावा करने वाली पुलिस को स्थानीय आरोपी नहीं मिल रहे हैं। जो मिले थे उन्हें छोड़ दिया गया है। जबकि प्रशांत त्रिपाटी से पूछताछ किया जाना चाहिए था। उल्टे पुलिस ने प्रशांत को क्लीन चिट दे दिया। परिजनों का दावा है कि बिलासपुर पुलिस ने अभी तक सीडीआर भी हासिल नहीं किया है। यदि घटनाक्रम के बाद प्रशांत त्रिपाठी के कार्यालय पर छापा मारा जाता तो भारी मात्रा मे हथियार बरामद हो सकते थे। लेकिन पुलिस ने छापा मारना जरूरी नहीं समझा गया। आज भी छापामार कार्रवाई की जाए तो कार्यालय से खतरनाक हथियार मिल सकते हैं।

                                परिजनों के अनुसार सुभाष का खून से लथपथ कपड़ा आज भी अपोलो में है। वाह रे बिलासपुर की पुलिस उसे आज भी बरामद नहीं किया गया है। घटना के बाद फरार आरोपी ऋषि तिवारी, ऋषि शर्मा, मनुराज पांडेय, अतुल यादव, योगेश गंधर्व, सूर्यकांत साहू और अन्य को पकड़ना तो दूर पता भी लगाया नहीं जा सका है। जबकि घायल होने वाला सामान्य नहीं बल्कि प्रदेश का युवा नौजवान अधिकारी है। ऐसे में पुलिस की चुप्पी परेशान करने वाली है।

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