शिक्षा कर्मी मोर्चा द्वारा सौंपे दस्तावेज के आधार पर ही संविलयन करे सरकार…संगठन के नेताओँ ने उठाई माँग ….राजस्थान के दौरे से होगा समय खराब

रायपुर ।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे शिक्षा कर्मियों की मांगों और समस्याओँ के निराकरण के लिए गठित हाईपॉवर कमेटी की ओर से राजस्थान प्रदेश की व्यवस्था का अध्ययन करने संबंधी खबरों को लेकर शिक्षा कर्मी संगठन मे प्रतिक्रिया हुई है। संगटन की ओर से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि इस सिलसिले में उनकी ओर से सभी राज्यों से संबंधित दस्तावेज कमेटी को सौंप दिए गए हैं। इस आधार पर संविलयन का फैसला किया जा  सकता है। अब राजस्थान की व्यवस्था के अध्ययन के नाम पर अनावश्यक समय खराब किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों को कितना मिलना चाहिये ?…क्या-क्या मिलना चाहिये ? कैसे मिलना चाहिये और कब-कब मिलना चाहिये..?..इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए पंचायत विभाग के अफसरों की टीम अब राजस्थान जायेगी। राजस्थान सरकार की नियमावली और शिक्षाकर्मियों को दी जा रही सहूलियतों और सुविधाओं के आधार पर ही छत्तीसगढ़ सरकार भी अपने शिक्षाकर्मियों के लिए प्रावधान लागू करेगी। हाईपावर कमेटी की पिछली बैठक में इस बात का फैसला लिया गया था कि एक टीम बनाकर अफसरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जायेगा.. उन राज्यों में शिक्षाकर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर ही छत्तीसगढ़ में वेतन, भत्ते, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति और स्थानांतरण नीति का प्रावधान लागू किया जायेगा।
चीफ सिकरेट्री की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी के निर्णय़ के बाद चार डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों को राजस्थान भेजने का फैसला लिया गया है.. इस टीम में डिप्टी डायरेक्टर केसी काबरा, टीके साहू के अलावे पंचायत विभाग के उप संचालक बीएन मिश्रा और आरके जैन भी शामिल हैं। ये टीम राजस्थान में विजिट कर अपनी रिपोर्ट पंचायत विभाग के एसीएस को सौंप देंगे.. और फिर वो रिपोर्ट कमेटी के सुपूर्द की जायेगी। जिसके बाद कमेटी फिर अपना आगे निर्णय लेगी। स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव आईआर कापले के हस्ताक्षर से ये आदेश जारी किया गया था।Shikshakarmi,virendra dubey
नवीन शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेशाध्यक्ष व मोर्चा के प्रान्तीय संचालक विकास सिंह राजपूत ने कहा है की राजस्थान की तरह पंचायत विभाग मे कार्यरत शिक्षाकर्मियों को छत्तीसगढ़ मे भी शिक्षा विभाग मे समायोजन कर शासकीय कर्मचारियो की तरह वेतन भत्ते व अन्य सुविधाएं सरकार देना चाहती है तो अधिकारियो के राजस्थान जाकर अध्ययन करने के स्थान पर शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के द्वारा सौपे गये राजस्थान राज्य के दस्तावेज का गम्भीरता से अध्ययन कर वेतन विसंगति मे सुधार कर आठ वर्ष के बन्धन समाप्त कर समस्त शिक्षाकर्मियों के शिक्षा मे संविलियन का निर्णय सरकार को जल्दी ही लेना चाहिए।

शिक्षक पंचा/ननि मोर्चा के संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा है कि लगातार कमेटी के कार्यकाल को बढाने पर शिक्षाकर्मी आक्रोशित है, शासन को पूर्व में ही राजस्थान मॉडल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश  में शिक्षको के संविलियन संबधी आवश्यक तथ्य पहले ही सौप चुका है। डिजिटल इंडिया के जमाने मे किसी राज्य का भ्रमण करना केवल समय खरांब करना है। शासन को चाहिए कि जल्द ही संविलियन पर निर्णय  लेना चाहिए।

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