जब छात्रों ने बढ़ाया हाथ….कैंसर के जबड़े से बाहर निकलने लगी लल्ली…मेधावी छात्रा को बचाने एक जुट हुआ स्कूल

बिलासपुर— साथी हाथ बढ़ाना…गाना बहुत अच्चा है…अक्सर सुनने को मिल जाता है। लेकिन देखने का मौका कभी कभी ही मिलता है। सौभाग्य है कि मुजे पहले सुनने का फिर देखने का भी अवसर मिला। जी हां हम कहते हैं कि लोग संवेदनहीन हो गए। लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे मिल जाते हैं…कि सारी बातें झूठी लगने लगती है। सकरी में साथियों ने हाथ बढ़ाया और मजदूर की कैंसर पीड़ित बेटी आज ालोगों के सहयोग और दुआओं के दम पर मेकाहारा अस्पताल रायपुर में इलाज करवा रही है।

                          खबरों की दुनिया में ऐसे ख़बर कम ही मिलते हैं…जो अन्दर से हिलाकर रख देती है। खास तौर उस समय..जब देश में उपभोक्ता संस्कृति ने गहरे तक जड़ फैला लिया हो। ऐसे माहौल में जब लोग कहते हैं कि संवेदनाओं को समाज में कोई स्थान ही नहीं रह गया है। जब उदाहरण मिलता है तो आंखे फटी की फटी रह जाती है। आंख से प्रेम की धार फूट पड़ती है। सोचने को मजबूर होना पड़ता है कि नहीं…आज भी लोग अन्दर से जीवित है…। जी हां पूरी तरह से जीवित और स्वस्थ्य हैं।

                             बिलासपुर से लगा सकरी नगर पंचायत में मानवीय संवेदना का शानदार उदाहरण देखने को मिला है। कहानी मजदूर की बेटी लल्ली की है। लल्ली यादव उम्र 14 साल..शासकीय कन्या हाइस्कूल सकरी में कक्षा 9 की छात्रा है। मजदूर की बेटी लल्ली को स्कूल के शिक्षकों से मेधावी छात्रा का तमगा भी हासिल है। एक दिन जब शिक्षकों को मालूम होता है कि लल्ली को कैंसर है तो पूरा स्कूल दिल थामकर बैठ जाता है।

                       दरअसल लल्ली कई दिनों से स्कूल नहीं आ रही थी। हमेशा स्कूल आने वाली लल्ली के सहपाठियों और शिक्षकों को आश्चर्य हुआ कि आखिर लल्ली स्कूल क्यों नहीं आ रही है। क्योंकि लल्ली ना केवल रोज स्कूल आती थी..बल्कि समय पर स्कूल पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों को अंजाम भी देती थी। लगातार स्कूल नहीं आने से परेशान एक दिन क्लास के कुछ छात्र छात्राएं लल्ली के घर पहुंच गए। लल्ली गम्भीर हालत में अपने बिस्तर में मिली।

                                          जानकारी मिलते ही लल्ली के क्लास टीचर अपनी मेधावी छात्रा को देखने घर पहुंच गए। जब क्लास टीचर को जानकारी मिली कि लल्ली कैंसर से पीड़ित है तो उनहें ऐसा लगा कि जैसे पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी है। एक मजदूर परिवार की बेटी को कैंसर जैसी होना अपने आप में बहुत बड़ी त्रासदी है। क्योकि मजदूर को पता है कि उसकी हैसियत कैंसर के सामने कुछ नहीं है। खासकर लल्ली यादव के पिता को बस इतना ही मालूम था कि आज नहीं तो कल लल्ली को अंतिम विदाई देना है।

                लेकिन लल्ली  के शिक्षकों को अच्ची तरह से मालूम था कि लल्ली न केवल स्कूल की लाड़ती है..बल्कि स्कूल की आन बान शान भी है। जब लल्ली के दोस्तों को मालूम हुआ कि लल्ली को कैंसर जैसा घाक बीमारी ने पकड़ लिया है और बचना मुख्सिल है। सबको बहुत दुख हुआ। अपने दोस्त और मेधावी छात्रा को बचाने के लिए शिक्षक और छात्रों ने ऐसा अभियान चलाया कि जिसे शायद ही कोई कभी भूलना चाहेगा।

                  कैंसर से पीड़ित लल्ली को बचाने के लिए शिक्षक और छात्र छात्राओं ने स्कूल स्तर पर राहत कोष का गठन किया। सबने अपनी दोस्त और मेधावी छात्रा को यथा संभव आर्थिक मदद करना शुरू किया। देखते ही देखते इतना रुपया इकठ्ठा हो गया कि मजदूर पिता के पैरों को खड़े होने के लिए ताकत मिल गयी। लोगों की मदद से मजदूर पिता ने अपनी लाडली को रायपुर स्थित मैकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों का कहना है कि लल्ली की तबीयत में लगातार तेजी से सुधार हो रहा है। इस खबर के बाद लोगों के मरझाए चेहरों पर रौनक लौटने लगी है।

                      फ़िलहाल लल्ली की सफलतापूर्वक कीमोथेरेपी की जा रही है। डॉक्टरों का दावा है कि यदि लल्ली ने लम्बे समय परहेज का पालन किया तो कैंसर को हर हालत में हारना ही होगा।

                       फिलहाल इस घटना के बाद मानना ही होगा कि समाज में अभी संवेदना बाकी है। कैंसर पीड़ित लल्ली के इलाज में आर्थिक मदद करने वाले लगातार सामने आ रहे हैं। लोगों का मानना है कि हम लोग लड़ेंगे…एक दूसरे की शिकायत भी करेंगें…लेकिन इसके लिए हमको एक दूसरे के दुख और सुख का ख्याल भी रखना होगा। हम लोग मिलकर लल्ली को मौत के मुंह से खींचकर लाएंगे। चाहे इसकी कीमत कितनी भी क्यों ना हो।

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