जब पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने कहा राष्ट्रपति जी….छत्तीसगढ़ी को दिलाएं राजभाषा का दर्जा…जीवन की एक-एक सांस और पल को इंतजार

नई दिल्ली— बड़ा पत्रकार वह जो जनहित में मौका मिलते ही बेहतर तरीके से अपनी बातों को ना केवल रखे। बल्कि सामने वाले को अनुकूल जवाब देने को मजबूर भी कर दे। राष्ट्रपति भवन स्थित दरबार हाल में पद्म अलंकरण के दौरान…. छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पहले अध्यक्ष पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने….सत्तर साल की पत्रकारिता अनुभव को कुछ इस तरह पेश किया कि राष्ट्रपति को पद्मश्री की बातों को गंभीरता से लेना पड़ा। प्रधानमंत्री ने भी सौजन्य मुलाकात के दौरान पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी को राजभाषा दिए जाने के अनुरोध को गंभीरता से लिया। साथ ही बेहतर स्वास्थ्य रखने की सलाह दी है।

                        सोमवार को पद्म अलंकरण के दौरान पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने वह कर दिखाया। जिसे लेकर पूरा छत्तीसगढ़ एक दशक से संघर्ष कर रहा । पद्मश्री लेने के बाद पंडित श्यामलाल लाल चतुर्वेदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सौजन्य मुलाकात की। पद्मश्री श्यामलाल ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा दिलाने को लेकर एक पत्र राष्ट्रपति के सचिव को दी। राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान पद्मश्री ने कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ियां साहित्य और पत्रकारिता के लिए आप के प्रयास से पद्मश्री दिया गया। यह मेरे और मेरी जन्मभूमि के लिए गौरव की बात है।

                       छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पहले अध्यक्ष  पंडित श्याम ने कहा कि मामले में अपनी भावनाओं को पत्र के माध्यम से आपके सचिव को दिया है। करबद्ध प्रार्थना है कि सवा दो करोड़ छत्तीसगढियों की अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा को केन्द्र की आठवीं अनुसूची में शामिल कर राज्यभाषा का संवैधानिक दर्जा प्रदान करें। यदि ऐसा हो गया तो मैं अपने जीवन को धन्य मानूंगा।

            सौजन्य मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति से पंडित श्यामलाल ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अनुसूचित जाति,जनजाति,पिछड़े और अल्पसं्यक बहुल छत्तीसगढी को राजभाषा का दर्जा देकर राज्य को देश में विशेष पहचान बनाने का गौरव प्रदान करेंगे। क्योंकि मैने अपने जीवन की हर सांस और हर पल को छत्तीसगढ़ी राजभाषा के रूप में प्रतिष्टित होते हुए देखने की प्रतीक्षा है।

                    पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी की बातों को सुनने और पत्र पढ़ने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मामले में परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही आपका सपना साकार होगा।

                                  राष्ट्रपति के बाद पद्मश्री श्यामलाल चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी सौजन्य मुलाकात की। पंडित जी ने प्रधानमंत्री के सामने छ्तीसगढ़ी को राजभाषा दर्जा के लिए आठवीं अनुसूची में स्थान दिए जाने की मांग की। प्रधानमंत्री ने बातों को गौर से सुना। आश्वासन के साथ स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।

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  2. By Dr sushma sharma

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