मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा कर्मी संगठन नेताओं की नहीं हो सकी मीटिंग… हफ्ते भर में फिर मुलाकात का भरोसा…संविलयन की उम्मीद कायम

रायपुर । छत्तीसगढ़ के शिक्षा कर्मी नेताओँ के साथ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मुलाकात सोमवार की शाम नहीं हो पाई। सोमवार को ही तय की गई बैठक देर शाम अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि हफ्ते भर के भीतर मीटिंग  फिर से रखी  जाएगी। इस लिहाज से शिक्षा कर्मी संगठन के नेता अभी यह कह पाने की स्थिति में नहीं हैं कि  मुख्यमंत्री के साथ होने वाली आज की बैठक को सकारात्मक माने या नकारात्मक….। लेकिन उन्होने उम्मीद जताई है कि अगली बार होने वाली मीटिंग में सकारात्मक नतीजा निकलकर आएगा। फिलहाल शिक्षा कर्मियों के मोर्चा ने 3 फरवरी से शुरू होने वाले बोर्ड मूल्यांकन का पहले दिन सांकेतिक रूप  से बहिष्कार करने का फैसला किया है। लेकिन इसके दूसरे दिन से शिक्षा कर्मी काली पट्टी लगाकर मूल्यांकन करेंगे।
जैसा कि मालूम है कि सोमवारर की शाम यह खबर तेजी से फैली कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा कर्मी संगठन के नेताओँ से मुलाकात का समय दिया है। इस खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री के साथ सोमवार की शाम करीब 7 बजे बैठक होने वाली थी। इसके लिए प्रदेश के दूर-दराज से संगठन के नेता रायपुर पहुंच गए थे और उम्मीदों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात-बातचीत का इंतजार कर रहे थे ।  लेकिन देर शाम पता चला कि मुख्यमंत्री के साथ यह बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है। बैठक स्थगित होने के बाद जिन नेताओँ से बात हो सकी उन्होने कहा कि अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि इस पहल को सकारात्मक माना जाए या नकारात्मक….। लेकिन उन्होने यह उम्मीद जरूर जताई है कि जिस तरह हफ्ते भर के भीतर फिर से सीएम के साथ मुलाकात का समय तय किए जाने की बात सामने आई है , उससे लगता है कि आगे सरकार का रुख सकारात्मक रहेगा और आगे होने वाली बैठक में शिक्षा कर्मियों के संविलयन का फैसला हो जाएगा।
सोमवार को हुई इस हलचल के मायने निकाले जा रहे हैं। जिसमें प्रमुख रूप से यही बात सामने आ रही है कि शिक्षा कर्मी संगठन ने 3 अप्रैल से शुरू होने बोर्ड मूल्यांकन के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। समझा जा रहा है कि इसके मद्देनजर ही प्रशासन की ओर से बातचीत की पहल की गई थी। लेकिन मीटिंग अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गई। अब लोगों के बीच सवाल तैर रहा है कि मूल्यांकन बहिष्कार की चेतावनी को लेकर संगठन का क्या रुख रहेगा। इस सिलसिले में जानकारी दी गई है कि चूंकि अब तक संविलयन और दूसरे मुद्दों को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है । लिहाजा पहले दिन 3 अप्रैल को मूल्यांकन का बहिष्कार किया जाएगा। लेकिन उसके बाद के दिन से विरोध स्वरूप शिक्षा कर्मी काली पट्टी लगाकर मूल्यांकन करेंगे।
संगठन का कहना है कि आज शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के संचालकों की मुख्यमंत्री  के साथ होने वाली बैठक किन्ही अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गई। मुख्यमंत्री  ने आगामी दिनों में बैठक हेतु सहमति दी है। चूंकि मोर्चा ने 26 मार्च को जिलाधिकारी को  3 अप्रैल से परीक्षा मूल्यांकन बहिष्कार का ज्ञापन सौपा था।  उसी तारतम्य में 3 अप्रैल को जिनकी DUTY कॉपी जाँचने में लगी है वो अपनी उपस्थिति मूल्यांकन स्थल में देंगे ।लेकिन परीक्षा मूल्यांकन बहिष्कार कर अपना विरोध करेंगे एवं 4 अप्रैल से काली पट्टी लगाकर  मूल्यांकन कार्य किया जाएगा।
सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए पहुंचने वालों में   प्रांतीय  मोर्चा संचालक  संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, विकास राजपूत,केदार जैन ,
के साथ प्रांतीय उपसंचालक  बसंत चतुर्वेदी , मनोज सनाड्य , वासुदेव पाण्डेय,विवेक दुबे , प्रमोद सिंह राजपूत , जिला संचालक संतोष सिंह बिलासपुर,जिला संचालक मनोज चौबे, कोरबा,जिला उपसंचालक  कन्हैया लाल देवांगन, अमित दुबे एवं नरेंद्र चंद्रा शामिल थे।
संजय शर्मा ने बताया कि आज मुलाकात  मुख्यमंत्री से नहीं हो पाई है अगली मुलाकात में हम अपना पक्ष रखेंगे  । विकास राजपूत ने कहा की एसटी-एससी आंदोलन की वजह से संचालक चंद्र देव राय उपस्थित नहीं थे। कउन्होने कहा कि  हम शिक्षक है हमारे छात्र हमारे बच्चे ही हैं वह हमारे लिए सर्वोपरि है। हमने विरोध का तरीका बदला है काली पट्टी लगाकर हम केंद्रीय मूल्यांकन करते रहेंगे ।

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