शिक्षाकर्मियों के लाखों आवेदनों पर लोकसुराज में कोई फैसला नहीं… संजय शर्मा बोले- फिर टूटी आस

♦लोकसुराज का हुआ समापन, पर संविलियन के मुद्दे पर नही मिला जवाब
♦शिक्षाकर्मियो ने लोकसुराज में आवेदन लगा कर उठाया था संविलियन का मुद्दा
♦लोकसुराज के समाप्त होने के बाद संविलियन पर जवाब नही मिलने से शिक्षाकर्मियों की फिर टूटी आस
बिलासपुर।शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा  है कि शिक्षाकर्मियों के लिए यह लोकसुराज अभियान केवल और केवल कागजों पर सिमट कर रह गया  । प्रदेश के हजारों – लाखों शिक्षाकर्मियों ने लोकसुराज अभियान की घोषणा होते ही एक सधी हुई रणनीति के तहत पहले चरण में अपने परिजनों के नाम से संविलियन की मांग को लेकर आवेदन सौंपा और पावती लेकर जवाब का इंतजार करते रहे ।  आलम यह था कि प्रदेश में सबसे अधिक आवेदन शिक्षाकर्मियों से संबंधित पंचायत विभाग से जमा हुए। पंचायत विभाग से संबंधित आवेदनों की संख्या 7 लाख से भी अधिक थी।
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जिसकी पुष्टि स्वयं सरकारी रिकॉर्ड करती है। आज लोकसुराज के अंतिम दिन जब लोक सुराज मुहिम का समापन हो गया और सरकार ने जोर शोर के साथ 99% आवेदनों के समाधान की घोषणा कर दी तो केवल शिक्षाकर्मी ही शायद वह लोग बच गए , जिनके समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ ।क्योंकि जिन शिक्षाकर्मियों ने हजारों की संख्या में ऑनलाइन आवेदन किया था , उन्होंने जब अपने आवेदन को चेक किया तो आज भी आवेदन की स्थिति उन्हें अपूर्ण मिल रही है।
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अंतिम समय तक शिक्षाकर्मी करते रहे जवाब की प्रतीक्षा
शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने बताया कि शिक्षाकर्मियों ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत लोक सुराज में आवेदन जमा कराया था। ताकि उनके हाथ में लिखित रूप में यह जवाब रहे कि उनका संविलियन किया जाएगा या नहीं ।  जिन शिक्षाकर्मियों के परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी या जिला पंचायत सीईओ के नाम से आवेदन जमा किया था , उनके आवेदनों में यह जवाब दे दिया गया कि संविलियन के विषय में शासन द्वारा कोई फैसला नहीं लिया गया है ।  जिसके चलते उनका संविलियन संभव नहीं है ।  जबकी नियमानुसार सक्षम न होने की स्थिति में जवाब देने के बजाय उपरोक्त आवेदन सक्षम अधिकारी को प्रेषित करना था ।  यहां पर भी नियमों का अधिकारियों ने स्पष्ट रुप से उल्लंघन किया ।  जबकि लोक सुराज में यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि आवेदन आपके विभाग या आपके स्तर से संबंधित न हो तो उसे सही विभाग तक प्रेषित कर दें ।  इसके बावजूद कई अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही शिक्षाकर्मियों को जवाब थमा दिया। यह तो उन आवेदनों की अनदेखी की बात हुई,  जिन्हें शिक्षाकर्मियों ने इस विषय में निर्णय लेने में अक्षम अधिकारियों के नाम से सौंपा था ।  लेकिन अधिकांश शिक्षाकर्मियों ने पंचायत विभाग के अपर मुख्य सचिव के नाम से आवेदन किया था ।  ताकि विभाग उन्हें जानकारी देने में विवश हो जाए । लेकिन पंचायत विभाग ने आज तक उनके आवेदनों को अपूर्ण रखा है और शायद सरकार जिन 1 प्रतिशत आवेदनों के निराकरण नहीं होने की बात कह रहे हैं उसमें यह आवेदन शामिल है।

जब करना ही नहीं था निराकरण तो क्यों मांगा आवेदन
शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि लोक सुराज के प्रथम चरण से ठीक पहले 1 सरकारी प्रपत्र निकल कर सामने आया था ।  जिसमें यह जानकारी थी कि किस-किस विभाग से संबंधित किस किस विषय में आवेदन किया जा सकता है ।  इस में शिक्षाकर्मियों के संविलियन के संबंध में भी जिक्र था ।  इसके बाद शिक्षाकर्मियों के परिजनों ने जोर शोर से आवेदन जमा किए ।  अब आम शिक्षाकर्मी भी पूछ रहे हैं कि जब संविलियन के विषय में लोक सुराज में कोई निर्णय ही नहीं करना था तो फिर आवेदन मांग कर यह ढकोसला क्यों किया गया।प्रदेश के लाखों शिक्षाकर्मियों ने सरकार के लोक सुराज अभियान पर विश्वास करते हुए ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन जमा किया था ।  ताकि उनके समस्याओं का भी निराकरण हो सके । लेकिन आज जब 3 माह चले लोक सुराज अभियान के अंतिम चरण के अंतिम दिन वह अपने आवेदन की स्थिति चेक कर रहे हैं तो आज भी उनका आवेदन अपूर्ण बताया जा रहा है ।  जिसका स्पष्ट मतलब है कि शिक्षाकर्मियों के आवेदन को गंभीरता से लिया ही नहीं गया है और लोक सुराज भले ही किसी के लिए भी कितना ही सार्थक क्यों ना हो शिक्षाकर्मियों के लिए पूर्णत: निरर्थक रहा । आज फिर से एक बार शिक्षाकर्मी खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं और जिसके कारण उनका आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है  ।

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