कांग्रेसियों ने साधा निकाय मंत्री पर निशाना…कहा..15 साल में बनेगा आवास…जनता जानती है झूठ और सच

बिलासपुर— जिला कांग्रेस ने निकाय मंत्री के जनसंपर्क पदयात्रा को जनता के साथ छलावा बताया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि स्थानीय विधायक सुर्खियां बटोरने के लिए सड़क के लिए घूम रहे हैं। पदयात्रा के बहाने जनता के खोए हुए विश्वास को जीतने की कोशिश कर रहे हं। प्रायोजित आरती उतरवा रहे है। जबकि जनता ने पहले से ही सोच लिया है कि चुनाव में क्या करना है।

                          प्रदेश महामंत्री अटल श्रीवास्तव,ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी,शहर अध्यक्ष नरेंद्र बोलर ,सम्भागीय प्रवक्ता अभय नारायण राय. शेख नजरूद्दीन ने बताया कि नगर विधायक फिर से बिलासपुर की जनता को मृग मरीचिका दिखाने के लिए  सड़को पर घूम रहे हैं। गरीब जनता को सब्ज बाग दिखा रहे हैं कि भाजपा सरकार 30 हज़ार प्रधान मंत्री आवास  बना कर देगी । जबकि जनता अच्छी तरह समझ रही है कि गुमराह किया जा रहा है।

                               प्रेस नोट जारी कर कांग्रेस नेताओं ने बताया है कि जनता गुमराह नहीं होने वाली है। टेम्स नदी का वादा और सीवेज प्रोजेक्ट से परिचित हो चुकी है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार सामान्य हालात में एक वर्ष में अधिकतम 2 हज़ार से ज्यादा मकानों का निर्माण नही किया जा सकता है। सरकारी व्यवस्था को हर कोई जानता है । ऐसे में 30 हजार मकान बनने में कम से कम 15 वर्ष लगेंगे। चूंकि चुनाव सिर पर है भाजपा के लोग जीतने के लिए कोई भी हथकंडे अपना सकते है।

                    कांग्रेसियों ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि अशोक नगर,जटिया तालाब,मिट्टी तेल गली,चिंगराज पारा, चांटीडीह,नाग नागिन तालाब, डिपू पारा से  हटाये गए गरीब परिवार आज भी मकान के लिए भटक रहे । मकान देते समय ऐसी ऐसी शर्तों को रखा गया कि पात्र हितग्राही ,भी अपात्र हो गए । कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है कि आज तक विस्थापित लोगों को मकान क्यो नही मिला ? जबकि मंत्री महोदय उसी विभाग को संभालते हैं।

                         कांग्रेसियों ने प्रेस नोट में बताया है कि गरीब विरोधी नीति के चलते कई बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। ,मरीज़ स्वास्थ्य सुविधा और छत विहीन होने के कारण मौत के मुंह में चले गए। अतिक्रमण हटाने के पहले मिट्टी तेल गली के सिंधी भाई सामाजिक कार्य के लिए समय मांग रहें थे लेकिन निगम प्रशासन के कान में जूंं तक नहीं रेंगा। तब 30 हज़ार मकान की बात क्यों नहींं हुई।

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