300 करोड़ का तेदूपत्ता बोनस घोटाला..शासन को देना होगा जवाब…नेताम की याचिका पर हाईकोर्ट ने किया तलब

बिलासपुर—- संतकुमार नेताम ने तेंदूपत्ता लघु उपज फेडरेशन में करोड़ों का भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। तेंदूपत्ता बिक्री, बोनस में करोड़ों के घपले को लेकर संतकुमार नेताम के वकील सुदीप श्रीवास्तव ने मंगलवार को हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस टी.बी. राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की युगलपीठ में याचिका दाखिल कर बताया कि भ्रष्टाचार के खेल में दस लाख से अधिक आदिवासी समाज के लोग प्रभावित हुए हैं। डबल बेंच याचिका को मान्य करते हुए शासन से जवाब तलब किया है।

                          संतकुमार नेताम के वकील सुदीप श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तेंदूपत्ता में भारी घोटाले की बात रखी है। याचिका में बताया गया है कि तेंदूपत्ता बिक्री और बोनस में करोड़ों का खेल हुआ है। मुख्य  न्यायाधीश टीब.बी.राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की युगलपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए शासन और लघु उपज फेडरेशन को निर्देश जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। मामले में अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी।

  याचिका दाखिल करने के बाद संतकुमार नेताम ने बताया कि 2004 में तेंदुपत्ता अधिनियम में संसोधन के आधार पर 2017 और 2018 में तेंदुपत्ता की खरीदी-बिक्री और टेंडर समेत बोनस दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी हुई है।याचिका में बताया गया है कि पिछले साल की तुलना में 51 प्रतिशत की गिरावट आदिवासियों के लाभ में देखी गई है। याचिका में करीब तीन सौ करोड़ रुपए की राशि घपले करने का आरोप लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शासन और तेंदुपत्ता फेडरेशन को जवाब तलब किया है। मामले में अब 21 मार्च को सुनवाई होगी।

                                संतकुमार और सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि प्रदेशभर में 10 लाख तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले आदिवासी समाज के लोग प्रभावत हुए। आदिवासियों को  तेंदूपत्ता संग्रहण के एवज में मजदूरी मिलती है। बेचे गए तेन्दुपत्ता का 80 प्रतिशत लाभ बतौर बोनस दिया जाता है।  आदिवासियो को पिछले साल का ना तो बोनस दिया गया है और ना ही मेहनताना। यह लाभ घटकर अब 51 प्रतिशत हो गया है। जाहिर सी बात है कि 2019 में दस लाख परिवनार को अब नुकसान उठाना ही पड़ेगा। आदिवासियों को करीब 300 करोड़ का नुकसान होगा।

     संतकुमार नेताम का आरोप है कि सारा खेल राज्य शासन के शह पर हो रहा है। आरोप लगाया है 2018 चुनावी वर्ष है।  सरकार वाहवाही लूटने और आदिवासियों को वोट हासिल करने के लिए  बिक्री में लाभ का बोनस बाटेगी। जबकि पिछले साल 51 प्रतिशत कम ख़रीदी हुई है! जिसका असर बोनस पर पड़ेगा। जाहिर सी बात है कि दस लाख आदिवासियों का नुकसान होगा। हाईकोर्ट से मामले में स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई जांच की मांग की गयी है।

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