टीएस से मनीष दत्त ने बताया कला और कलाकारों को संरक्षण की जरूरत..चाहिए भारत भवन की सुविधा..रतनपुर को बनाएं केन्द्र

बिलासपुर— चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने से पहले कांग्रेस पार्टी के नेता जिले में लगातार लोगों से सीधा सम्पर्क कर रहे हैं। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव पिछले तीन दिनों से आम जनता से लेकर वर्ग विशेष बाजार हाट चौक चौराहों और घर पहुंचकर घोषणा पत्र तैयार करने से पहले फीड़ बैक ले रहे हैं। इसी क्रम में आज टीएस सिंह ने छत्तीसगढ़ भवन में मशहूर मंच कलाकार,साहित्याकर मनीष दत्त से भी बातचीत की। उन्होने बातचीत के दौरान कलाकरों के उम्मीदों को टटोलने का प्रयास किया।

                        छत्तीसगढ़ भवन में मशहूर रंगकर्मी मनीष दत्त और नेता प्रतिपक्ष विधानसभा छत्तीसगढ़ टीएस सिंह ने खुलकर बातचीत की। इस दौरान स्पीक मैके के अजय श्रीवास्तव और अभय दुबे के अलावा अभय नारायण,पंकज सिंह समेत कांग्रेस नेता भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान मनीष दत्त ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक से बिलासपुर समेत प्रदेश के कमोबेश सभी जिलों में कलाकार और कला का क्षरण महसूस किया ज रहा है। मनीष दत्त ने टीएस बाबा को परामर्श दिया कि प्रदेश में मध्यप्रदेश की तर्ज पर कला संस्कृति और अन्य साहित्यिक,रंगकर्म गतिविधियों,के लिए वातावरण बनाने की जरूरत है।

                मनीष दत्त ने कहा कि मध्यप्रदेश की तरह प्रदेश में भी भारत भवन जैसा कोई निर्माण होना चाहिए। बिलासपुर समेत अन्य महत्वपूर्ण जिलों में भारत भवन की ही तरह भवन संगठन खड़ा किया जाए। कला संस्कृति से जुड़े लोगों को जोडा जाए। रतनपुर प्रदेश का ऐतिहासिक स्थल है। यहीं कहीं पहाड़ियों के आस पास भवन का निर्माण किया जाए। राजधानी को केन्द्र बनाकर भारत भवन की तरह भवन का निर्माण किया जाए।

                                   मनीष दत्त ने टीएस को बताया कि भवन नहीं मिलने से सांस्कृतिक गतिविधियों पर असर को साफ देखा जा सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कार्यक्रम के लिए भटकना होता है। लखीराम आडिटोरिम, देवकीनंदन दीक्षित सभागार जैसे सरकारी जगहों की तरह कलाकारों को समर्पित भवन का निर्माण किया जाए। देखने में आया है कि इन भवनों में कार्यक्रम देने से कलाकार आर्थिक बोझ से दब जाता है। इसलिए प्रत्येक जिलों में जिला प्रशासन की निगरानी में सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों को भवन की उपलधता बिजली और सफाई चार्ज पर हो।

    टीएस के सवाल पर क्या सांस्कृति संगठनों का पंजीयन होना जरूरी है। मनीष दत्त ने बताया कि हो भी सकता है और नही भी। लेकिन जिला प्रशासन की निगरानी में कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाए। मनीष दत्त ने कहा मैं और मेरे जैसे सैकड़ों कलाकार काव्य भारती और इप्टा से जुड़े हैं। लेकिन राज्य गठन के बाद सुविधाएं नहीं मिलने से लोगों के हौसले टूट रहे हैं।

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