घानापार कोलवाशरी पर कलेक्टर ने कहा..माइनिंग से करवाएंगे जांच…एनओसी का हो जाएगा खुलासा

बिलासपुर—घानापार में पारस पावर एन्ड कोलवाशरी को लेकर 9 मार्च को जनसुनवाई है। कोलवाशरी के खिलाफ ग्रामीणों में भयंकर आक्रोश है। प्रभावित 11 गांव के लोगों ने सरपंच और कोलवाशरी मालिक पर ग्रामीणों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि जब हम लोगों ने पिछली बार ही क्षेत्र में कोलवाशरी का विरोध किया था तो दुबारा घानापार पर कोलवाशरी थोपना समझ से परे है। लेकिन हम लोग हार नहीं मानेंगे पिछली बार की तरह इस बार भी कोलवाशरी का विरोध करेंगे। फिर भी कोलवाशरी थोपने का प्रयास किया गया तो पुरजोर तरीके से जवाब भी देंगे।

                                                        ग्रामीणों के साथ कोलवाशरी का विरोध कर रहे नेता दिलीप अग्रवाल ने बताया कि पिछली बार पारस पावर एण्ड कोलवाशरी का विरोध किया गया था। बावजूद इसके दुबारा कोलवाशरी को गांव पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि कोलवाशरी मालिकों ने ना तो एनओसी लिया है और ना ही सभी सरपंचों से रायशुमारी ही की है। कमोबेश आधे से ज्यादा गांव के सरपंच पारस पावर या किसी भी कम्पनी की कोलवाशरी को अपने क्षेत्र में नहीं चाहते हैं। हम लोगों ने जिला प्रशासन और जिला क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय को लिखित शिकायत में कोलवाशरी के खिलाफ विरोध जाहिर कर चुके हैं।

पुराना एनओसी नया प्रोजेक्ट

               सूत्रों के अनुसार 2.5एमटीएन क्षमता वाला कोलवाशरी घानापार में खोला जाएगा। जबकि प्लांट मालिकों के पास सम्बधित विभागों से एनओसी भी नहीं है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि पारस पावर ने केन्द्रीय पर्यावरण विभाग से 2.5एमटीएन क्षमता वाली कोलवाशरी की अनुमति गलत तरीके से हासिल किया है। इसके पहले पारस पॉवर ने .99 एमटीएन क्षमता की कोलवाशरी घानापार में खोलने का प्रयास किया। लेकिन लोगों के विरोध  के बाद कम्पनी को पीछे हटना पड़ा। अब 2.5 एमटीएन क्षमता की कोलवाशरी प्लांट लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि सभी एनओसी पुराने प्लांट के हैं। इसकी जानकारी एनओसी देने वाले सभी विभाग प्रमुखों को भी है। मजेदार बात है कि नया प्रोजेक्ट हासिल करते समय पुराने प्रोजेक्ट को केन्द्रीय पर्यावरण विभाग के सामने पेश ही नहीं किया गया। यदि ऐसा किया जाता तो शायद जालाजी का खुलासा हो जाता ।

कलेक्टर ने कहा कराएंगे जांच

                                       मामले में कलेक्टर पी.दयानन्द ने कहा कि ऐसे किसी प्रकार की जानकारी फिलहाल नहीं है। माइनिंग से कहेंगे कि मामले में जानकारी इकठ्ठा करें। दस्तावेजों की जांच पडताल करें। यदि एनओसी गलत है तो उचित कदम उठाया जाएगा।  जानकारी उपर तक भेजी जाएगी। यह सच है कि क्षेत्र में पानी की कमी है। लेकिन प्लांट को लेकर किसी प्रकार की गड़बडी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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