प्रदेश के दस हजार से अधिक गांव बने राजस्व विवाद मुक्त गांव

रायपुर।राजस्व संबंधी विषयों पर कई तरह के विवाद राजस्व न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में लंबित रहते हैं। विवाद होने के कई कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण राजस्व अभिलेखों का अद्यतन नहीं होना है। इससे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन आदि के मामले लंबित होते जाते हैं। राजस्व संबंधी इन्हीं कठिनाईयों के निराकरण के उद्देश्य से राज्य शासन ने वर्ष 2015 में निर्णय लिया कि हर साल प्रदेश के सभी जिलों में प्रत्येक पटवारी हल्के के एक ग्राम को राजस्व मामलों की दृष्टि से ‘राजस्व विवाद मुक्त ग्राम’’ बनाया जाएगा। यह प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष तीन माह की अवधि में पूरी की जाएगी। अगले वर्षों में पटवारी हल्के के दूसरे गांवों का चयन कर उन्हें राजस्व विवाद मुक्त बनाने की कार्रवाई की जाएगी। इस तरह चार-पांच वर्षों में उस पटवारी हल्के के समस्त गांवों को राजस्व विवाद मुक्त बनाया जाएगा। प्रदेश में वर्ष 2015 से लेकर अब तक कुल 10 हजार सात सौ 92 गांवों को राजस्व विवाद मुक्त गांव बनाए जा चुके हैं।

विवाद मुक्त गांव बनाने के लिए चयनित गांव के सीमांकन संबंधी सभी प्रकरणों को तीन माह के भीतर सुलझाया जाता है। इन ग्रामों में बी-वन पढ़कर सुनाया जाता है साथ ही फौती नामांतरण के मामले दर्ज कर सभी वारिसानों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। इसके अलावा किसानों की ऋण पुस्तिका में संशोधन किया जाता है।

भूमि अन्तरण के अन्य प्रकार जैसे-खरीदी बिक्री, दान पत्र आदि को भी राजस्व अभिलेख में दर्ज किया जाता है। बंटवारे के ऐसे प्रकरण जिनमें आपसी राजीनामे से खाते का बंटवारा हुआ हो, उनको अद्यतन किया जाता है। बन्दोबस्त त्रुटि सुधार का काम भी किया जाता है। ग्राम के आवासहीनों का सर्वेक्षण कर ग्राम पंचायत के माध्यम से आबादी भूमि उपलब्ध कराने कार्रवाई की जाती है। ग्राम में निस्तार के सुरक्षित शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण का चिन्हांकन कर पंचायत के सहयोग से अतिक्रमण हटाया जाता है।

राजस्व विवाद मुक्त ग्राम बनाने के लिए तीन माह की समय सीमा निर्धारित की गई है। समयावधि में कार्य पूरा होने के बाद तहसीलदार द्वारा राजस्व विवाद मुक्त गांव का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। राजस्व विवाद मुक्त ग्राम बनाये जाने की प्रक्रिया निरन्तर जारी रहेगी और प्रदेश भर के समस्त राजस्व गांवों को राजस्व विवाद मुक्त गांव बनाया जाएगा।

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