राष्ट्रीय पोषण मिशन में छत्तीसगढ़ के 15 जिले शामिल,पीएम राजस्थान में करेंगे शुभारंभ

रायपुर।केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 27 में से 15 जिलों को राष्ट्रीय पोषण मिशन में शामिल कर लिया है। यह मिशन रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, दुर्ग,बेमेतरा, बालोद,राजनांदगांव, कबीरधाम, बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, कांकेर, कोरबा और जशपुर जिले में संचालित किया जाएगा।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आठ तारीख को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के झुुुंझनू में पूरे देश के लिए इस मिशन का शुभारंभ करेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इस मिशन के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने राष्ट्रीय पोषण मिशन के लिए चयनित जिलों में इसके लिए हो रही तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने इस अवसर पर राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत सूचना एवं संचार प्रणाली आधारित त्वरित निगरानी व्यवस्था के लिए चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का भी शुभारंभ किया। इसमें संबंधित विभिन्न जिलों से महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों और परियोजना अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी लोग जमीनी स्तर पर बेहतरीन कार्य कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरुप महिला एवं बाल विकास विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है ।उन्होंने कहा कि आप सभी मन लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त कीजिए ताकि राष्ट्रीय पोषण मिशन में भी हमारा राज्य सबसे अच्छा परिणाम लेकर आए ।श्रीमती साहू ने इस अवसर पर 05 मास्टर ट्रेनरों को स्मार्ट फोन प्रदान किये ।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत प्रदेश के 08 जिलों के 17 हजार 51 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया स्मार्ट फोन दिया जाएगा। इससे पहले प्रदेश में विश्व बैंक की सहायता से 17 जिलों में संचालित इस्निप योजना का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है जिसके तहत 11 हजार 75 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन मिल चुका है जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से योजनाओं और कार्यकलापों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग की जा रही है। राष्ट्रीय पोषण मिशन में इस्निप परियोजना का ही विस्तार किया जा रहा है ।

कार्यशाला में विभाग की सचिव डॉ एम गीता ने भी सभी मास्टर ट्रेनरों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि स्मार्ट फोन में मौजूद सॉफ्टवेयर के माध्यम से माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्तायें सभी आवश्यक आंकड़े और जानकारियां सीधे भारत सरकार के सर्वर को भेज सकेंगी। इस तरह से सभी आंकड़े डिजिटल हो जायेंगे और इनका विश्लेषण सुगम होगा जिससे कुपोषित बच्चों और माताओं का चिन्हांकन आसानी से किया जा सकेगा सॉफ्टवेयर के माध्यम से योजना की वास्तविक और त्वरित निगरानी (रियल टाइम  मोनिटरिंग) भी संभव होगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस मोबाइल आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बहुत आसान है और इसके लिए किसी विशेष तकनीकी योग्यता की जरुरत नहीं है। हमारी आंगनबाड़ी  कार्यकर्ताएं आसानी से इसका उपयोग कर सकती हैं ।इस प्रशिक्षण में विभाग के संयुक्त संचालक प्रतीक खरे ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर आंगनबाड़ी में विभिन्न कार्यकलापों और योजना के लिए संधारित 13 रजिस्टरों के बोझ को कम करेगा। इस तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के समय की बचत होगी और कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होगी।

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