जाट आंदोलन के दौरान दर्ज मामले वापस लेगी सरकार

नईदिल्ली।हरियाणा की खट्टर सरकार फरवरी 2016के दौरान हुए जाट आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के बाद नेताओं पर दर्ज किये गए मामलों को वापस लेगी। रविवार देर रात जाट नेता और हरियाणा सरकार के बीच हुई बातचीत में ये फैसला लिया गया। दरअसल जींद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की बाइक रैली के दौरान जाट नेताओं ने अपनी मांगो को लेकर उसी समय रैली करने का फैसला लिया था। जिससे बीजेपी की चिंताएं बढ़ गए थीं।ये हरियाणा सरकार, बीजेपी नेताओं और जाट नेताओं के बीच लगातार चली बैठकों और बातचीत के कई दौर के बाद देर रात जाट रैली के रद्द होने की घोषणा इस शर्त पर की गई कि सरकार आंदोलनकारियों के खिलाफ दायर मामलों को वापस लेगी।  ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक की मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनुल जैन के साथ करीब पांच घंटे चली बैठक के बाद दोनों पक्षों में ये सहमति बनी। सीएम खट्टर ने मलिक को बातचीत के लिये बुलाया था ताकि आरक्षण को लेकर नाराज जाट नेताओं को मनाया जा सके। उन्होंने धमकी दी थी कि अमित शाह की रैली के दौरान वो भी विरोध रैली करेंगे।

बातचीत के यशपाल मलिक ने कहा कि हरियाणा सरकार ने फैसला किया है कि वो फरवरी 2016 में आरक्षण के मुद्दे पर प्रदर्शनों के दैरान हुई हिंसा में जाट नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दायर मामले वापस लेंगे।जाट संगठनों ने फैसला किया था कि उनकी मांगे पूरी न होने के खिलाफ वो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रैली के दौरान समस्या खड़ी करेंगे। 15 फरवरी को होने वाली इस रैली के दौरान 50,000 ट्रैक्टर और ट्रॉली के साथ रैली निकालने का फैसला किया था।उनकी धमकी के बाद राज्य सरकार ने अर्धसैनिक बलों की 150 कंपनियों की केंद्र सरकार से मांग की थी।मलिक ने कहा, ‘जाट आंदोलनकारियों के खिलाफ हरियाणा सरकार के तहत आने वाले दायर मामले वापस लिये जाएंगे। इसके अलावा घायलों को मुआवजा और नौकरियों की मांगों को भी मान लिया गया है।’

उन्होंने कहा, ‘राज्य में हम शांति चाहते हैं और भाइचारे को महत्व देते हैं और इसके विकाल के लिये हम सभी को ्पना योगदान देना होगा।’18 फरवरी को जाट संगठन बलिदान दिवस के रूप में मनाएंगे। इससे पहले संगठनों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से जवाब मांगने के लिये भाइचारा न्याय यात्रा निकालने का फैसला लिया था।

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