भावी पीढ़ी स्वस्थ रहे यही स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य-अजय चन्द्राकर

रायपुर।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अजय चन्द्राकर ने सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम भवन में 09 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप छह बच्चों को कृमि नाशक दवा एल्बेंडाजोल खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर अजय चन्द्राकर ने कहा कि जितने भी बीमारियों के लिए इस तरह के कार्यक्रम चालाए जा रहे उनका प्रमुख उद्देश्य है आने वाले पीढ़ी स्वस्थ्य और तंदरूस्त बने, किसी भी बीमारी से ग्रस्त न हो। इसके लिए राज्य सरकार प्रदेशवासियों के सहयोग से शत-प्रतिशत कृमि मुक्त राज्य बनाने के लिए प्रयास कर रही है। मंत्री चन्द्राकर ने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में लोग काम कर रहे है वह वास्तविक में वह दैवीय कार्य संपादित करने के समान है। उन्हांेने इस अभियाान में सबको सहयोग करने की अपील की, ताकि प्रदेश कृमि मुक्त राज्य बन सके।अजय चन्द्राकर ने कुमारी शोभा वर्मा, वृत्तिका यादव, अविनाश ठाकुर, योगेश ध्रुव, गौरव और यश को कृमि नाशक दवा खिलाया। उन्हांेने कहा कि प्रदेश में कृमि मुकित के लिए पंाच बार यह कार्यक्रम चालाया गया। इस कार्यक्रम के तहत एक वर्ष से उन्नीस वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों और आंगनबाड़ियों में कृमि मुक्ति दवा की खुराक दिए जाते है। गत माह 92 लाख से अधिक बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा दी गई। कल नौ फरवरी को कृमि मुक्ति दवा खिलाए जाएंगे। ऐसे बच्चे जिनकी तबियत खराब है या किसी कारणवश स्कूल या आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं आये उनके लिए 15 फरवरी को मॉप-अप दिवस में दवा दिया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुब्रत साहू ने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान केन्द्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। बच्चों में आंतों के कृमि संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए छŸाीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 9 फरवरी 2018 को आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत  1 से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियाँ खिलाकर कृमि मुक्त किया जाएगा। श्री साहू ने बताया कि एल्बेंडाजोल की खुराक 1 से 2 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को आधी गोली तथा 3 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को एक पूरी गोली दी जाएगी। उन्हांेने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के सभी बच्चों के स्वास्थ्य, पोषक सम्बन्धी स्थिति और संज्ञानात्मक विकास तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्हें कृमि मुक्त करना है। देश में कृमि संक्रमण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संवेदनशील है। डब्ल्यू. एच. ओ. के अनुसार 5 से 14 साल तक की उम्र के 22 करोड़ से भी अधिक बच्चों में कृमि का प्रभाव पाया जा सकता है । डब्ल्यू. एच. ओ. यह भी घोषित करता है कि विश्व में भारत उन देशों में से एक है जहाँ कृमि संक्रमण और इससे सम्बन्धि रोग सबसे ज्यादा हैं। आंत के कृमि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षित और लाभदायक एल्बेंडाजोल की दवा प्रमाण आधारित और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य एक प्रभावकारी उपाय है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना इस तरह से तैयार किया गया है कि सभी बच्चे इसकी पहुंच में आ सकें।

श्री साहू ने बताया कि प्रदेश में बच्चों को दवा खिलाने के लिए 54240 शि़क्षकों और 43591 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका गया है। एल्बेंडाजोल दवा खिलाने के कुछ हल्के विपरीत प्रभाव होते हैं। खासकर वे बच्चे जो कृमि से अत्यधिक संक्रमित हैं उन्हें मितली आना, उल्टी आना और चक्कर आना जैसे विपरीत प्रभाव हो सकते हैं। इसके लिए व्यापक प्रतिकूल घटना प्रोटोकॉल (प्रबन्धन) बनाये गये हैं और सभी स्तर के उपयुक्त अधिकारियों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव अनिल साहू, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रानू साहू, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक डॉ. सर्वेश्वर दयाल भूरे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्यायाण विभाग के संचालक डॉ. आर.आर. साहनी, राज्य टीकाकरण अधिकारी सहित मितानीन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *