प्रीपीजी तैयारियों की जायजा लेने सिम्स पहुंंची एमसीआई टीम…रिपोर्ट लिफाफे बंद…प्रबंधन की जगी उम्मीद

बिलासपुर— मेडिकल काउंसिल और इंडिया कीन तीन सदस्यीय टीम गुरूवार को सिम्स पहुंची। सिम्स को प्री पीजी की मान्यता देने के पहले टीम ने संबंधित विभागों की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। मेडिकल कौंसिल आॅफ इंडिया की तीन सदस्यीय टीम का यह चौथा दौरा है। निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने जानने का प्रयास किया कि क्या सिम्स पीजी कोर्स के लिए तैयार है।  टीम ने सिम्स में कार्यरत सभी डॉक्टरों की आईडी और अन्य प्रमाण पत्रों का भी जायजा लिया।  जांच पड़ताल के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार कर लिया है। रिपोर्ट को जल्द ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के हवाले किया जाएगा।

                                मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की तीन सदस्यीय टीम पीजी की मान्यता देने से पहले सिम्स का चौथी बार दौर किया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने प्रीपीजी की तैयारियों का एसेसमेन्ट किया। इसके अलावा अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान दिया। मालूम हो कि साल जून 2016 में एमसीआई की टीम ने  प्री पीजी सीट की मान्यता दिए जाने को लेकर सिम्स का निरीक्षण किया था। तात्कालीन एसेसमेन्ट में टीम ने सिम्स की फैकल्टी में 14 फीसदी और रेसिडेंट में 22 फीसदी की कमी को दर्ज किया था।

               एसेसेमेनन्ट के बाद टीम सिम्स प्रबंधन को जरूरी खामियों को दूर करने का निर्देश भी दिया था।  इसके बाद टीम ने दिसम्बर 2016 में भी निरीक्षण कर रिपोर्ट काउंंसिल को सौंपा था। इस दौरान टीम ने सिम्स में 16 प्रतिशत और रेसिडेंट में 22 प्रतिशत कमियों की तरफ प्रबंधन को ध्यान दिलाया। सिम्स प्रबंधन ने एमसीआई को आश्वासन दिया कि सभी खामियों को तीन महीने के भीतर दूर कर लिया जाएगा।

                      इसके बाद एमसीआई की टीम औचक निरीक्षण करने मई 2017 में सिम्स पहुंच गयी। टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि फैकल्टी में 19 और  रेसिडेंट में 23 प्रतिशत कमियां बरकरार है। इस दौरान एक बार फिर सिम्स प्रबंधन ने अस्पताल की तमाम खामियों को दूर कर एक बार फिर 2017 नवम्बर में प्रीपीजी एक सौ पचास सीटों की मान्यता के लिए केंद्र शासन को प्रस्ताव भेजा गया।  इसी क्रम में एमसीआई कि तीन सदस्यीय टीम गुरुवार को सिम्स का निरीक्षण करने पहुंची।

                                        टीम के सदस्य सबसे पहले डीन डाॅ. आर के पात्रा के चेंबर में पहुंचे। टीम के तीनों सदस्य अलग-अलग विभागों में जाकर व्यवस्थाओं का  निरीक्षण किए। निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने मनोवैज्ञानिक विभाग में स्टाफ की कमी पाया। इसके अलावा एमआरडी को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकरण नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। टीम के सदस्यों ने महसूस किया कि सिम्स अभी प्री पीजी कक्षाएं संचालित करने की स्थित मे नही है। तमाम वार्डों के निरीक्षण के बाद टीम के सदस्य  सिम्स अधीक्षक कार्यालय कांफ्रेंस हॉल पहुंचे। इस दौरान सुबह से शाम तक बारी बारी से नोट बनाते बिगाड़ते रहे।

                   प्री पीजी एसेसमेन्ट करने पहुंची तीन सदस्यीय टीम में कर्नाटका,उत्तराखंड और आंध्रप्रदेश के विशेषक्ष लोग शामिल थे। तीन सदस्यों ने अस्पताल का गहन निरीक्षण किया। सिम्स प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार सिम्स को प्रीपीजी के एक सौ पचास सीटों की मान्यता मिल जाएगी। फिलहाल घंटो जांच पड़ताल के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार कर लिया है। रिपोर्ट को जल्द ही केंद्र शासन के हवाले किया जाएगा।

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