कुलपति नियुक्ति के खिलाफ राष्ट्रपति को चिठ्ठी…अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी…कहा नियुक्ति में हुई नियमों की अनदेखी

बिलासपुर— जनता  कांग्रेस ने रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का एलान किया है। मणिशंकर ने राष्ट्रपति को लिखित शिकायत भेजकर कुलपति की नियुक्ति को नियम विरूद्ध बताया है। मामला उचित कदम उठाने की भी मांग की है। मणिशंकर के अनुसार कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति नियुक्ति के समय नियम कायदों और शर्तों का पालन नहीं किया गया है।

                       राष्ट्रपति से लिखित शिकायत कर जनता कांग्रेस पार्टी उत्तर क्षेत्र प्रवक्ता मणिशंकर ने कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति मान सिंह परिहार को हटाए जाने की मांग की है। मणिशंकर ने बताया कि कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति की नियुक्ति के समय नियमों और शर्तों की अनदेखी की गयी है। मामले में हाईकोर्ट जाउंगा…।

                                       जनता कांग्रेस नेता के अनुसार कुलाधिपति के आदेश पर कुलपति की योग्यता के लिए कुछ नियम और निर्देश नियम हैं। लेकिन कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति की नियुक्ति के समय नियम निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। यद्यपि नियुक्ति को लेकर कई नेताओं ने राज्यपाल को भी पत्र लिखा। जांच पड़ताल के बाद आरोप भी सहे पाए गए। बावजूद इसके कुलपति डॉ.मान सिंह परमार को नहीं हटाया गया।

                 मणि शंकर ने बताया कि शर्तों के अनुसार कुलपति के लिए कुलाधिपति ने कम से कम 10 साल प्राध्यापकी का अनुभव निश्चित किया था। लेकिन मानसिंह परमार को जब कुलपति बनाया गया तो उस समय उनके पास मात्र पांच साल का अनुभव था। जबकि तात्कालीन समय और वर्तमान में भी कुलपति परमार से कहीं ज्यादा अनुभवी प्राध्यापक हैं। बावजूद इसके उनकी योग्यता को नजरअंदाज कर जूनियर को कुलपति बनाया गया।

                      मणिशंकर ने बताया कि जरूरी दस्तावेज के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाउंगा। राष्ट्रपति से फरियाद नहीं मिलने पर मामले को कोर्ट के सामने पेश करूंगा। उम्मीद है कि हाइकोर्ट बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जरूरी कदम उठाएगा।

  भूपेश बघेल ने भी उठाया था सवाल

                   मालूम हो कि पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी मामले की शिकायत राज्यपाल और सचिव से की थी। छानबीन के बाद कुलपति की नियुक्ति को शर्तों के अनुसार नहीं पाया गया। मामले में सचिव ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी पत्र भेजा। बावजूद इसके किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई।

खोज समिति की सिफारिश पर नियुक्ति

                कुलाधिपति के निर्देश पर कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय कुलपति चयन के लिए शोध कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में तीन लोग शामिल थे। विश्वविद्य़ालय आयोग अधिनियम 2004 की धारा 11(2) और उपधारा 6 के तहत तीन सदस्यों को चुना जाना था। चुने गए प्राध्यापकों के पास कम से कम 10 साल का अनुभव अनिवार्य किया गया। लेकिन नियुक्ति के समय शर्तों की अनदेखी की गयी।

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