कांग्रेस संसदीय पार्टी की बैठक में सोनिया गांधी बोलीं-राहुल गांधी मेरे भी बॉस हैं

नईदिल्ली।कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि राहुल गांधी उनके भी बॉस हैं, इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए। दिल्ली में आज (8 फरवरी) कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि बैठक में मौजूद सांसदों से कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए वे राहुल के साथ मिलकर काम करें। सोनिया ने बैठक में कहा, “कांग्रेस का अब एक नया अध्यक्ष है और मैं आपके तरफ से और खुद अपने भी तरफ से मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं, अब वह हमारे भी बॉस हैं, इसके बारे में कोई संदेह नहीं होनी चाहिए।” इस बैठक में सोनिया गांधी केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी बरसीं। सोनिया ने कहा कि मोदी सरकार अधिकतम प्रचार, न्यूनतम सरकार और अधिकतम मार्केटिंग तथा न्यूनतम परिणाम दे रही है। सोनिया ने कहा कि मोदी सरकार वास्तविकता से दूर है, प्रचार और झूठ पर जी रही है, लोकसभा में प्रधानमंत्री का भाषण इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए हम समान सोच वाले दलों के साथ काम करेंगे ताकि भारत लोकतंत्र, समावेश, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता और आर्थिक प्रगति के रास्ते पर चले। सोनिया ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं छिटपुट नहीं हैं बल्कि संकीर्ण राजनीतिक फायदे के लिए समाज का ध्रुवीकरण करने की साजिश के तहत उन्हें जानबूझकर अंजाम दिया गया है।

सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि लगभग चार साल हो गये इस सरकार को सत्ता में आए हुए। ये एक ऐसा वक्त रहा जिसके दौरान वे संस्थाएं जो हमारे लोकतंत्र की स्तंभ थीं, उनपर लगातार हमला हुआ है, इसमें संसद, न्यायपालिका, मीडिया और सिविल सोसायटी शामिल है। सोनिया गांधी ने कहा कि गुजरात और राजस्थान में हुए हाल के उपचुनाव में हमने कठिन परिस्थितियों में उम्दा प्रदर्शन किया, यह दिखाता है कि बदलाव की बयान आनी शुरू हो गई है।

सोनिया गांधी ने सरकार की कश्मीर नीति पर भी सवाल उठाए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा बदस्तूर जारी है और विकास को बढ़ावा देने के लिए बेहद कम काम किया गया है। सोनिया ने कहा, “हमें ताकत के साथ सीमापार आतंकवादा से लड़ना होगा, इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। हम उन जवानों को नमन करते हैं तो सीने पर गोली झेल रहे हैं, हमारी संवेदना उन परिवारों के साथ है, जिनके लोगों ने देश की सेवा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया है। लेकिन इसके साथ साथ हमें यही भी पूछना होगा कि ये जख्म पर मरहम लगाने की नीति कहां गई, विकास को बढ़ावा देने के वादे का क्या हुआ, राजनीति सक्रियता कहां है जो तभी देखने को मिलती थी जब डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।”

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