मनेन्द्रगढ़ से आया शर्मिला मेहमान…रेंजर ने बताया…रेस्क्यू टीम ने पकड़कर लाया कानन जू

बिलासपुर– मनेन्द्रगढ़ से वनमंडल में भटके चिंकारा को रेस्क्यू कर बिलासपुर के कानन पेन्डारी में लाया गया है। चिंकारा भटका और न काफी परेशान था। मनेद्रगढ़ वनमंडल से जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर वनमंडल की रेस्क्यू टीम ने भटके हुए चिंगारा को पकड़कर कानन पेन्डारी लायी है। कानन पेन्डारी  रेंजर सुनील बच्चन ने बताया कि चिंगारा पूरी तरह से स्वस्थ्य है। इस समय कानन पेन्डारी में कुलांचे भर रहा है।

                              कानन पेन्डारी रेंजर सुनील बच्चन ने बताया कि मनेन्द्रग़ढ से कानन पेन्डारी में नया मेहमान आया है। नया मेहमाल कोई और नहीं बल्कि चिंकारा है। चिंकारा को मनेन्द्रगढ़ से रेस्क्यू कर लाया गया है।  रेंजर ने बताया कि रेस्क्यू कर लाए गए चिंकारा को इंडियन ग़ज़ल भी कहा जाता हैं।

         बच्चन ने बताया कि चिंकारा प्रजाति दक्षिण एशिया में भारत समेत बांग्लादेश ईरान और पाकिस्तान में पाया जाता है। विश्व में सर्वाधिक 80 प्रतिशत चिंकारा भारत मे है। चिंगारा को विलुप्त प्रायः प्राणी की श्रेणी में रखा गया है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में चिंगारा को शेड्यूल वन में रखा गया है। चिंगारा छत्तीसगढ़ में मनेन्द्रगढ़ वनमंडल और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता हैं।

              कानन जू के रेंजर ने जानकारी दी कि इंडियन गजेल  शर्मिला स्वभाव का प्राणी है। इंसानों की आबादी से बचता है। बिना पानी के यह लंबे दिनों तक रह सकता है।  चिंंगारा एकांतप्रिय प्राणी है..कभी कभी 1-4 के झुंड में भी पाया जाता है। इसकी ऊंचाई 65 से.मी., वजन करीब 23 किलो और लम्बाई सवा मीटर तक होती है। नर के साथ मादा में भी सिंग पायी जाती है । राजस्थान में विश्नोई समाज चिंगारा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते है। बच्चन ने बताया कि रेस्क्यू के बाद कानन जू में चिंगारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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