सिटी सेन्टर को जोर का झटका…राजस्व प्रशासन ने किया सीमांकन प्रतिवेदन रद्द…संचालकों की टूटी अंतिम उम्मीद

बिलासपुर—सिटी सेन्टर का सीमांकन दुबारा किया जाएगा। राजस्व महकमा ने सिटी सेन्टर निर्माण के समय पेश किए गए सीमांकन आदेश को निरस्त कर दिया है। तहसीलदार ने पत्र जारी कर बताया है कि सिटी सेन्टर निर्माण के समय प्रस्तुत सीमांकन प्रतिवेदन कूटरचित है। लोकसुराज अभियान के प्रथम चरण में  विनय सलूजा और दिनेश वर्मा ने आवेदन देकर सिटी सेन्टर सीमांकन प्रतिवेदन को निरस्त करने की मांग की थी। आवेदन के साथ पेश दस्तावेजों के जांच पड़ताल से जानकारी मिली कि सिटी सेन्टर संचालक अशोक अग्रवाल ने टीएनसी के सामने कूटरचित प्रतिवेदन पेश किया था। इसलिए पुराने सीमांकन को निरस्त किया जाता है।

                                जानकारी के अनुसार तहसीलदार ने सिटी सेन्टर निर्माण के दौरान संचालक अशोक अग्रवाल की तरफ से टीएनसी में पेश किए गए सीमांकन प्रतिवेदन को निरस्त कर दिया है। मालूम हो कि दिनेश वर्मा और विनय सलूजा ने सिटी सेन्टर सीमांकन को निरस्त करने लोकसुराज शिविर में दो अलग-अलग आवेदन दिए थे। आवेदन को राजस्व महकमा स्वीकार कर लिया है। दोनों आवेदनकर्ताओं को पत्र जारी कर बताया है कि पेश किए गए दस्तावेज के आधार छानबीन के बाद पाया गया कि अशोक अग्रवाल ने कूटरचना कर सीमांकन प्रतिेवेदन तैयार किया है। इसलिए सिटी सेन्टर का सीमांकन निरस्त कर आवेदन स्वीकार किया जाता है।

          मालूम हो कि सिटी सेन्टर निर्माण के समय संचालक अशोक अग्रवाल समेत अ्न्य ने कूट दस्तावेज पेश कर टीएनसी से अप्रूवल लिया। सिटी सेन्टर निर्माण के बाद संचालक ने बताया कि सिटी सेन्टर तक पहुंचने के लिए निगम को दुकान हटाना होगा। निगम ने दुकान हटाने से इंकार करते हुए नए सिरे से सीमांकन करने को कहा । दुबारा नामांकन के दौरान जानकारी मिली कि सिटी सेन्टर संचालकों ने टीएनसी को अंधेरे में रखकर निर्माण कार्य किया है। शर्तों के अनुसार व्यावसायिक काम्पलेक्स तक पहुंचने के लिए कम से 40 फिट का रास्ता होना जरूरी है। लेकिन नाप जोख के बाद जानकारी मिली कि व्यावसायिक काम्पलेक्स तक पहुंंचने के लिए मात्र 30 फिट ही चौड़ी सडक है।

                        निगम इसी दौरान जानकारी मिली कि सिटी सेन्टर संचालकों ने निगम की जमीन पर अतिरिक्त निर्माण किया है। मामला कोर्ट तक पहुंंचा। कोर्टट ने सिटी सेन्टर के खिलाफ फैसला दिया। कोर्ट ने बताया कि टीएनसी अप्रुव होने के बाद निगम प्रसासन केवल 4 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण तक समझौता कर सकता है । लेकिन सिटी सेन्टर ने कूटरचना कर निगम की जमीन पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत निर्माण कार्य किया है। जाहिर सी बात है कि समझौता असंभव है। दलील सुनने के बाद कोर्ट ने निगम के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि प्रशासन अपनी जमीन और सम्पत्ति हासिल करने के लिए स्वतंत्र है। बाद में निकाय सचिव ने भी निगम के पक्ष में फैसला दिया। साथ ही पुराने सीमांकन को निरस्त करते हुए नए सिरे से सीमांकन का आदेेश दिया।

                            सिटी सेन्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की सूरत में विनय सलूजा और दिनेश वर्मा ने लोकसुराज अभियान शिविर में सिटी सेन्टर के पुराने सीमांकन को निरस्त करने की मांग की। आवेदकों ने आवेदन के साथ दस्तावेज भी पेश किए्। तहसील प्रशासन ने सिटी सेन्टर के खिलाफ आवेदन स्वीकार करते हुए पुराने सीमांकन प्रतिवेदन को निरस्त कर दिया है। तहसीलदार ने सिटी सेन्टर के सीमांकन प्रतिवेदन को विधि सम्मत नहीं  होना बताया है। सिटी सेन्टर का सीमांकन रद्द कर नए सिरे सीमांकन करने को कहा है।

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