चुनाव आहट–डॉ. रमन को जोगी का चैलेंजःदो और दो पाँच बनाने का खेल…

(गिरिजेय )“तूने…अभी देखा नही,,,, देखा है तो जाना नहीं….. जाना है तो माना नहीं…… मुझे पहचाना नहीं…..दुनिया दिवानी मेरी… मेरे पीछे –  पीछे भागे…… किसमें है दम यहां …..ठहरे जो मेरे आगे…..मेरे आगे आना नही…. मुझसे टकराना नहीं….. किसी से भी हारे नहीं हम….. जो सोचे , जो चाहे , वो कर के दिखा दे…… हम वो हैं, जो दो और दो पाँच बना दे…….।“ये गाना …. याद कीजिए…. 80 के दशक में अमिताभ और शशि कपूर के साथ रुपहले परदे पर आई हिन्दी फिल्म “ दो और दो पाँच “ … का है। छत्तीसगढ़ में चुनाव के साल यह गाना फिट और हिट होता नजर आ रहा है। एक तरफ चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश और दूसरी तरफ दो और दो के जोड़ को पाँच बनाने का फेर ….।दरअसल इस बार दो नहीं बल्कि तीन पार्टियां चुनाव मैदान में उतरने के लिए ताल ठोंक रही हैं….और इससे बनने वाले तिकोने मुकाबले का बैलेंस बिगाड़ने या अपनी तरफ करने के लिए जो खेल चल रहा है, उसमें गणित का फार्मूला कुछ यूं हो गया है कि 2 और 2 को जोड़ 5 हो जाए … । अंकगणित और रेखा गणित के बेजोड़ मिलाप के साथ शुरू हो रहा यह चुनावी गणित अभी से बड़ा दिलचस्प नजर आ रहा है। जिसमें अब सीधी रेखा की तरह बनने वाले सीधे मुकाबले को त्रिभुज – त्रिकोण पर ले जाने की कवायद भी चल रही है….. हर कोई अपने कोण को मजबूत बनाने के फिराक में है…और इसी कवायद में से दोस्ती –दुश्मनी को साबित करने वाली गेंद निकलकर एक – दूसरे पर उछलने लगी है…..।




और इस सीरीज का ताजा एपीसोड यह है कि सूबे के पूर्व और प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मौजूदा और द्वितीय मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के खिलाफ राजनाँदगांव सीट से चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य के लोगों ने अपने सत्रह बरस के इतिहास में सिर्फ दो मुख्यमंत्री ही देखे हैं ….. और मुकाबला सचमुच  आज की तारीख के हिसाब से होता है तो यहाँ के लोग  इन्ही दोनों के बीच एक चुनावी आजमाइश भी देख लेंगे……? “ अगर “ इसलिए लिखना पड़ रहा है कि – सियासत के मैदान में जैसे दोस्ती और दुश्मनी स्थाई नहीं होती , उसी तरह चुनौतियाँ भी कहां मुस्तकिल रह पाती हैं…..।

सीधे तौर पर कहें तो इस बार विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में त्रिकोणीय मुकाबले का मौसम बन रहा है। जिसमें एक तरफ प्रदेश में सरकार चला रही बीजेपी और दूसरी तरफ परंपरागत प्रतिद्वंदी कांग्रेस के साथ अब जोगी कांग्रेस का नाम भी जुड़ गया है। वैसे अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने से इस इलाके में चुनावी फैसला मुख्य रूप से दो ही पार्टी कांग्रेस – बीजेपी के बीच ही होता रहा है। मुकाबले में भले ही कितनी पार्टियां हों…। लेकिन इस सीधे मुकाबले के बीच अपनी जगह बनाने तीसरी पार्टी जोगी कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है।जिससे प्रदेश में अब तीन राजनैतिक ताकतें दिखाई देने लगीं हैं । जिसमें स्वाभाविक रूप से हर एक मामले में दो पार्टियां तीसरे पर निशाना साध रही हैं। यह निशानेबाजी प्रदेश के लोगों के लिए नईं है…. । लोग इस तरह की निशानेबाजी के आदी नहीं रहे हैं। लिहाजा दो की जगह तीन तरफ से आ रहे तीरों के झुण्ड के बीच लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि सही कौन है…. और गलत किसे करार दिया जाए…? सियासी हवा में कन्फ्यूजन की धूल भी मिल गई है…… और इसी हवा का रुख भांपकर प्रदेश के मतदाताओँ के सामने एक समझ तैयार करने एक “ सीन क्रिएट “ करने की कवायद चल रही है।



जिससे छत्तीसगढ़ में अभी से त्रिकोणीय मुकाबला नजर आने लगे। कांग्रसे तो शुरू से नहीं चाहती है  कि ऐसा कुछ दिखे। कांग्रेसी अपने साथ बीजेपी का सीधा मुकाबला मानते रहे हैं और उसकी दलील रही है कि छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय पार्टी का कोई वजूद नहीं रहेगा। लेकिन कांग्रेस से अलग हुए अजीत जोगी की पार्टी तो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना चाहेंगी ही। उधर बीजेपी का ऐसा सोचना गलत नहीं लगता कि मुकाबले का त्रिकोण बने तो कांग्रेस को नुकसान होगा और बीजेपी की जीत आसान होगी…। तभी तो …. पूरा चुनावी गणित इस फार्मूले के चारों तरफ ही घूमता नजर आने लगा है।तभी तो….यह साबित करने की होड़ दिखने लगी है कि कौन…. किसका दुश्मन नंबर एक हैं….. और कौन दोस्ती निभा रहा है…। तभी तो…… खुद को दुश्मन नंबर एक और सामने वाले को दोस्त नंबर एक साबित करने के लिए जब भी मौका मिलता है, लोग गेंद एक – दूसरे की तरफ उछाल देते हैं और वोटर का चेहरा पढ़ने की कोशिश करने लगते हैं कि उसे कौन… किसका दोस्त और कौन… किसका दुश्मन दिखाई देने लगा है।




पिछले कुछ समय के राजनैतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो सिलसिलेवार पूरा सीन सामने से गुजर जाएगा। याद कर सकते हैं कि एक दिन सीएम का बयान आ गया कि जोगी कांग्रेस को कम नहीं आँक सकते और मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। लोग मतलब निकालने लगे कि बीजेपी क्या चाह रही है…? बीच बहस में कई और उदाहरण जोड़ दिए गए…. इस बीच मामले में एक घुमावदार मोड़ के बाद खुली सड़क नजर आई , जब जाति के मामले में जोगी समर्थकों को जश्न मनाने का मौका मिल गया। कांग्रेस ने इसे फौरन लपक लिया और इसे “ दोस्ती का जश्न “ साबित करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी……। असर तो होना ही था….। बतकही में “ दोस्ती- जुगलबंदी “ को सच मानने वाले लोगों की तादात बढ़ती नजर आने लगी…..। स्वाभाविक है इससे बीजेपी और जोगी कांग्रेस दोनों कम्फर्ट महसूस नही कर रहे थे।अब सामने हैं इस सीरीज का अब तक का ताजा-आखिरी एपीसोडः जिसमें पूर्व सीएम ने मौजूदा सीएम के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरने का बड़ा ऐलान कर दिया है । लोगों को यह समझाने के लिए यह दाँव काफी है कि दोस्त कौन है और दुश्मन कौन है…..।




छत्तीसगढ़ बनने के बाद एक बात हर समय नजर आती रही है कि पिछले सत्रह बरसों में अजीत जोगी यहां की राजनीति   में हर समय केन्द्र बिन्दु ही बने रहे।कितने ही चुनाव हुए…. उन्होने इस सवाल को कभी अपने से दूर नहीं होने दिया कि अजीत जोगी का क्या होगा….. अजीत जोगी क्या करेंगे….?  जो सोचे… जो चाहें …. वो करके दिखा दे…. की तर्ज पर उन्होने फिर सुर्खियां बटोर ली है……। और इस समय फिर से मीडिया की सुर्खियों में आ गए हैं।दो और दो को पाँच बनाने के खेल में माहिर चतुरसुजान के खाते में एक बड़ी जमा पूँजी यह भी है कि बिना किसी की परवाह किए  किसी को चुनौती दे देना उनके लिए नई बात नहीं है। वे पहले भी इस तरह की चुनौतियां देकर सुर्खियों में रहे हैं और खुद को सभी तरह से मजबूत बनाने में इसका फायदा भी उठाते रहे हैं। इस बार उनके इस नए चैलेंज का क्या होगा , यह आने वाला वक्त ही बताएगा। यह भी आने वाला वक्त ही बता पाएगा कि इस प्रदेश के लोग एक पूर्व और एक मौजूदा सीएम के बीच चुनावी मुकाबला देख पाएंगे या नहीं…….?




लेकिन चुनाव के इस साल आज की तारीख में तस्वीर कुछ ऐसी है कि कांग्रेस यह सोचकर खुश है कि जोगी के बिना चुनाव मैदान में उतरने से फायदा कांग्रेस को होगा….इसी सोच के साथ पार्टी ने पीसीसी चीफ भूपेश बघेल सहित टीएस सिंहदेव और डॉ. चरण दास महंत को आगे कर सामूहिक नेतृत्व की तस्वीर पेश की है । रमन को खिलाफ चुनाव लड़ने की जोगी की चुनौती को राजनीतिक से ज्यादा आर्थिक बताकर भी कांग्रेस पुरानी यादों को ताजा करने का दाँव चल चुकी है.। बीजेपी खुश है कि जोगी की पार्टी से कांग्रेस को नुकसान होगा …..और डॉ. रमन सिंह की चौथी पारी का रास्ता आसान हो जाएगा । और उधर सीधे 14 साल के सीएम को चुनौती देकर जोगी पार्टी के लोग खुश हैं कि इसका फायदा सिर्फ राजनांदगाव में ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में मिलेगा और अजीत जोगी के रूप में एक विकल्प – एक बड़ा नेता पेश करने में पार्टी कामयाब होगी। इसी तरह की खुशफहमियों के साथ यह चुनावी कारवाँ आगे बढ़ रहा है।कौन मंजिल तक पहुंचेगा – यह वक्त बताएगा।

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