मुंगेली पुलिस की कसावट में आयी कमी,पुराने ढर्रे आयी मुंगेली की आबोहवा

मुंगेली-अपराध और कानून व्यवस्था पर चोट करती घटनाओं में अक्सर सुर्खियों में बना रहने वाला मुंगेली अब एक बार फिर कानून व्यवस्था की पकड़ से बाहर जाता दिखाई दे रहा है । एक बार फिर कहने से तातपर्य बीते समय से है आपको बता दे कि बीते समय मे लगभग 1 वर्ष तक मुंगेली में पुलिसिया व्यवस्था को इतना सख्त कर दिया गया था कि असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले तत्वों पर नकेल कसी जा चुकी थी लेकिन जिस तरह इतिहास खुद को दोहराता कहा जाता है ठीक उसी तरह एक बार फिर मुंगेली की आबोहवा में कानून व्यवस्था की ढिलाई नज़र आने लगी है, जो कि नगर की शांति व्यवस्था को लगातार भंग किये दे रही है, पुलिस विभाग में हुए बड़े बदलाव के बाद पुलिस कप्तान की बागडोर नीतू कमल के बाद पारुल माथुर के हाथ मे सौपी गयी वही तत्काल नगर के एकमात्र थाने सिटी कोतवाली में पदस्थ प्रभारी में किया गया परिवर्तन ने पुलिसिया समीकरण को कुछ हद तक डांवाडोल कर दिया।

प्रभार पर आए नए प्रभारी को एकाएक मिली जिम्मेदारी से वर्कलोड बढ़ना भी लाजमी दिखने लगा, सिटी कोतवाली थाने का क्षेत्र बड़ा होना और जांच अधिकारियों के साथ साथ टेबल वर्क पर लिखने वाले अनुभवी पुलिसकर्मियों की कमी ने सिटी कोतवाली में कार्य का दबाव बढ़ा दिया है।फलस्वरूप PCR गाड़िया होने के बावजूद पहले के समय के मुकाबले अब नगर में चोरी वाद विवाद,अवैध शराब की बिक्री जुए और सट्टा जैसे मसलो से सम्बन्ध रखने वाले तत्व एक बार फिर अपना सिर उठाने लगे है। वर्कलोड अधिक होने की वजह से सिटी कोतवाली पुलिस के स्वभाव में भयंकर परिवर्तन देखा जा रहा, प्रभारी पर कार्य का बोझ उनके बदले स्वभाव से प्रदर्शित होने लगा है।

शहर में कानून व्यवस्था शिथिल होती नजर आ रही है वही आम जनता और पुलिस के बीच तालमेल बढ़ने की बजाय कम होता नजर आने लगा है इस पर अधिकारियों को गंभीरता से विचार कर नगर के एकमात्र थाने सिटी कोतवाली पुलिस को वर्क लोड से राहत दिलाने कोई ठोस कदम उठाए ऐसी उम्मीद आमजनता को पुलिस कप्तान से है। ताकि मुंगेली में एक बार फिर पहले की तरह पुलिस और आमजनता के बीच एक की दूरी कम करते हुए नगर में कानून एवं शांति व्यवस्था की स्थापना की जा सके।

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