बजट के बहाने मतदाताओं को घेरने का प्रयास..कांग्रेसियों ने कहा..भावनाओं को कैश करती बाहुबली फिल्म की तरह

  बिलासपुर—कांग्रेस नेताओं ने केन्द्रीय बजट को भावनाओं को ठगने वाला बताया है। बजट में किसानों को पोस्ट डेटेड चेक थमाया है। आदिवासी और अनुसूचित समाज को योजनाओं के नाम पर भ्रमित करने वाला कहा है। कांग्रेसियों ने कहा कि चुनाव को ध्यान में रखकर मतदाताओं को रिझाने के लिए बजट में जमकर तानाबाना बुना गया है। लेकिन इस बार मतदाता इन्द्रजाल में फंसने वाले नहीं है। क्योंकि जनता ने सरकार को बदलने का फैसला कर लिया है।

                     कांग्रेस नेता अटल श्रीवास्तव,राजेन्द्र शुक्ला,नरेन्द्र बोलर,अभय नारायण राय, शेख नजरूद्दीन और शैलेन्द्र जायसवाल ने केन्द्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने एक बार फिर जनता को निराश किया है। दरअसल अरूण जेटली ने संसद में सबका साथ…भाजपा का विकास वाला बजट पेश किया है। बजट में जनता को केवल पोस्ट डेटेड चेक थमाया गया है। ताकी लोकलुभावन में फंस कर जनता भाजपा के जाल में फंसे। लेकिन जनता ने भी फैसला कर लिया है कि बार-बार धोखा नहीं खाने वाले।

          कांग्रेस नेताओं के अनुसार भाजपा सरकार ने अपना अंतिम बजट पेश किया है। महामंत्री अटल श्रीवास्तव ने कहा कि बजट से जनता को बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन पिछले चार सालों की तरह अंतिम साल का भी बजट निराश करने वाला साबित हुआ है। बजट का तानाबाना चुनाव को लेकर तैयार किया गया है। लेकिन जाल में जनता फंसने वाली नहीं है।

                  अटल ने कहा कि मध्यम वर्ग अपने आप को छला महसूस कर रहा है । बजट में बड़े बड़े वादे किए गए हैं। लेकिन रूपए आएंगे कहां से कुछ नहीं बताया गया है। आदिवासी समाज का वोट हासिल करने के लिए बड़े बड़े सपने दिखाए गएं हैं। पुराने वादों को आज तक पूरा नहीं किया गया है। शहर अध्यक्ष नरेंद्र बोलर ने कहा कि बजट में 70 लाख रोजगार की बात की गई है । नोटबन्दी और जीएसटी से लाखो नौकरियां छीन ली गयीं। उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर फिर धोखा दिया जा रहा है। 2022 में किसानों की आय दो गुनी करने की बात की जा रही है। लेकिन वर्तमान में किसानों की आत्महत्या को लेकर किसी प्रकार का प्रयास नहीं किया गया है। बजट कुछ बाहुबली फिल्म की तरह है। जिसमें भोली भाली जनता की भावनाओं को जमकर कैश किया गया है।

                   नई नौकरी की बात हास्यास्पद सा लगता है । ग्रामीण अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि बजट में कहा गया है कि किसानों की फसल को लागत का  डेढ़ गुना मूल्य पर  खरीदा जाएगा। लेकिन यह नहीं बताया गया कि फसल खर्च का आकलन कैसे होगा ,कौन करेगा ? गम्भीर प्रश्न है क्योंकि किसानों का फसल बीमा तो की जाती है पर क्षतिपूर्ति के नाम पर  पैसे में भुगतान किया जाता है । यही स्थिति एमएसपी का होगा ?

                               सम्भागीय प्रवक्ता अभय नारायण राय ने कहा कि बजट चुनावी है। खाली पुलाव का पिटारा से ज्यादा कुछ नही है। गरीब परिवारों के लिये बिजली,स्वास्थ्य बीमा,गैस कनेक्शन की बात की गई है। क्ष्य तक पहुचना सन्देह के घेरे में है। क्योंकि इसके पूर्व पहले के बजटों को आज तक कागज से धरातल पर उतारा नहीं जा सका है।

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