देखें Video:अशोक अग्रवाल बोले-बदले की भावना से अपने विरोधियों को दबा रही है BJP,जनता जागरूक होगी तभी होगा बिलासपुर का विकास

eba_ashok_agrawal_indexमीडिया के आज के दौर में सियासत Byte…से चलती है…।आरोप हो…प्रत्यारोप होया किसी को अपनी कोई बात सामने रखना हो…Byte…के जरिए ही लोगों तक पहुंचती है….। “एक ….Byte …और…” के जरिए हम सियासत में आ रहे बदलाव से जुड़े सवालों को लेकर राजनीतिक लोगों तक पहुंच रहे हैं, जिसके जरिए यह समझने की कोशिश है कि आखिर ये बदलाव क्या है,क्यों है….कैसा है….और इसका राजनीति पर क्या असर पड़ रहा है। इस सीरीज में अब कि बार अशोक अग्रवाल के साथ cgwall.com की बातचीत के अँश शेयर कर रहे हैं…छत्तीसगढ़ और बिलासपुर की राजनीति में पिछले करीब चार दशक से सक्रिय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिलासपुर नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल मानते हैं कि राजनीति मे गिरावट आ है और इसका अवमूल्यन हुआ है। cgwall.com की खास पेशकश एक …Byte…. और.. में अपनी बात रखते हुए अशोक अग्रवाल ने कहा अब बदले की भावना से राजनीति अधिक हो रही है और सत्ता में बैठी भाजपा बदले की भावना से अफने विरोधियों को दबा रही है।
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अशोक अग्रवाल 1972 से राजनीति में हैं और इस दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं । उनसे पूछा गया था कि इस दौरान वे राजनीति में किस तरह का बदलाव देखते हैं….. इस पर उन्होने कहा कि राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में अलग तरह की राजनीति होती थी। जब अलग छत्तीसगढ़ राज्य बना तो यह उम्मीद बंधी थी कि अब नए प्रदेश में अलग तरह की राजनीति होगी। बरसों से उपेक्षित रहे इस इलाके की तरक्की होगी….। यहां का को-ऑपरेटिव्ह मूव्हमेट भी महाराष्ट्र- गुजरात की तरह होगा। लेकिन दुर्भाग्य है कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद यहां की राजनीति में बहुत गिरावट आई है। ….चाहे वह कोई भी पार्टी हो, नेतृत्व का अभाव नजर आता है। अशोक अग्रवाल याद करते हैं कि पहले यहां एक-से-एक दिग्गज नेता हुआ करते थे और राजनीति में छत्तीसगढ़ के नेताओँ का दबदबा रहा। उन्होने इस सिलसिले में कांग्रेस के विद्याचरण शुक्ल, श्यामाचरण सुक्ल और बीजेपी में लखीराम अग्रवाल- दिलीप सिंह जूदेव जैसे नेताओँ के नाम भी गिनाए। लेकिन इसके बाद के जनरेशन में राजनीति में अवमूल्यन हुआ है।

उन्होने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होने काग्रेस-जनता पार्टी और बीजेपी की सरकारों का काम देखा है। काग्रेस के काल में इँदिराजी को डिक्टेटर कहा जाता था। लेकिन आज महसूस होता है कि कांग्रेस डिक्टेटर नही हुई थी, बल्कि आज भाजपा में नरेन्द्र मोदी डिक्टेटर हो गए हैं…। आज भाजपा के लोग बदले की भावना से विरोधियों को दबा रहे है…। वह दिन भी याद है, जब अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे और सुंदर लाल पटवा नेता प्रतिपक्ष रहे। उस दौरान विधानसभा में डिवेट होता था- विरोध होता था। लेकिन बाहर दोनों पार्टी के लेग भाईचारा के साथ रहते थे। लेकिन दुर्भाग्य से आज देश और छत्तीसगढ़ में लोग प्रेमभाव भूलकर अपनी पार्टी और अपने स्वार्थ को ही देख रहे हैं और बदले की भावना से काम कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का राजनीति में शराब और पैसे के बढ़ते असर से जुड़े सवाल पर अशोक अग्रवाल कहते हैं कि समाज के लोग ही राजनीति में हैं। इसलिए अवमूल्यन तो हुआ है और लोग पैसे-शराब के बल पर चुनाव जीतते आ रहे हैं। लेकिन इस साल होने वाले चुनाव में एक पार्टी तो शराब नहीं बांट सकती। क्यूंकि शराब का ठेका सरकार खुद चला रही है। ऐसे में यदि जो शराब सरकार बांटेगी वही बंट पाएगी…। बिलासपुर के नेतृत्व से जुड़े सवाल पर उन्होने कहा कि शहर का विकास फेल्योर है। यहां भाजपा के विधायक हैं। जो टेम्स नदी बनाने की बात करते हैं। लेकिन दस साल में एक खीला नहीं लगा। सिवरेज भी दस साल से बन रहा है। उन्होने याद किया कि डॉ. श्रीधर मिश्रा के कार्यकाल में शहर में अँडरग्राउन्ड नाली का काम शुरू हुआ था। उस समय तिलक नगर से देवरी खुर्द तक काम भी हुआ छथा। लेकिन मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ के सौतेला व्यवहार होता रहा।जिससे पैसे की कमी हमेशा रहती थी। नगर निगम में किसी तरह तनख्वाह ही बंट पाती थी। ऐसे में फंड के अभाव में अंडरग्राउन्ड नाली का काम रुक गया था। आज का काम सभी देख रहे है और उसका खामियाज भी भुगत रहे हैं। आज भ्रष्टाचार ज्यादा हो रहा है औऱ विकास कम हो रहा है। सड़क कहीं भी- कभी भी धसक जाती है। हाल ही में कलेक्टर के इँस्पेक्शन में भी यह बात सामने आई। अशोक अग्रवाल कहते हैं कि बिलासुर की जनता सीधी-साधी है। जनता जब तक अपने हित के लिए जागरूक नहीं होगी, तब तक शहर की तरक्की नहीं हो सकती।

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