‘‘ऊँची उड़ान” के लिए शैलेष का ‘ARRIVAL’

arrivalराजधानी रायपुर में जगह है…. स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा ………. , जहाँ से बहुत दूर – दूर तक के लिए उड़ान भरने वाले लोग हवाई जहाज तक  पहुंचते है …..ऐसे प्रवेश द्वार से  ….. जिस पर हिंदी में आगमन और अँग्रेजी में ARRIVAL साफ – साफ लिखा है ……. इसी गेट के ठीक सामने……… कांग्रेस के दिग्गज नेता मौजूद हैं……….जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं……काँग्रेसियों से घिरे …..गले में फूल की माला लगाए  शैलेष पाण्डेय के चेहरे को देखकर यही पढ़ा जा सकता है … कांग्रेस प्रवेश के लिए इससे बेहतर जगह कोई और शायद ही हो सकती है । एक प्राइवेट युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से सियासत के स्टेज तक ऊँची उड़ान लगा रहे शैलेष पाण्डेय जैसी शखसियत के लिए तो यह सबसे मुफीद जगह नजर आती है…। चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए ….” कैम्पस ” से निकले किसी एजुकेशनिस्ट के सामने चैलेंज की शक्ल  में दो बातें साफ नजर आती हैं अव्वल तो उन्होने ऐसे समय कांग्रेस का दामन पकड़ा है, जिस समय सियासी रोड मैप का सिंग्नल पार्टी प्रवेशकों को बीजेपी की ओर इशारा करता हुआ दिखा रहा है। और दूजी बात ये कि उन्होने चुनावी मौसम के ARRIVAL    के संमय इस तरह का फैसला किया ।

यूँ तो शैलेष पाण्डेय होने का मतलब अब तक सिर्फ इतना ही नहीं था कि वे एक युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार भर हैं, उन्हे तो डा. सीवी रामन् विश्वविद्यालयIMG-20170704-WA0010 का पर्याय माना जाता है।अपने कुशल प्रबंधन से उन्हेने अपने वि.वि. को एक मुकाम तक पहुंचाया है। इस मकाम तक कि यह अपने ग्रुप के सबसे बड़ा संस्थान बन गया है।जहां कुलसचिव के रूप में काम करते हुए बिलासपुर शहर में सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक धार्मिक और …खेल गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी निभाते रहे हैं। और एक शिक्षाविद के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं……। पता नहीं “ सियासत “ की ओर उनका रुझान पहले से था या नहीं….लेकिन    “ अतिथि” को लेकर शुरू हुई एक बतकही ने शैलेष पाण्डेय को सियासत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। फिर एक बड़े संत की टिप्पणी के बाद सुर्खियों पर पंख लग गए। पंखों की इस उड़ान को आगे बढ़ाते हुए शैलेष पाण्डेय अब देश की सबसे पुरानी पार्टी काँग्रेस की दहलीज पार कर भीतर दाखिल हो चुके हैं। अतिथि से शुरू हुई यह सुगबुगाहट अब वहां तर पहुंच गई है कि वे शहर के हर एक घर –हर दिल में जगह बनाने एक ऊंची उड़ानके लिए जहाज में बैठ  गए हैं…..।धर्म – अध्यात्म में गहरी रुचि रखने वाले शैलेष जिस तरह अपने ही हाथों बनाए – संवारे विश्वविद्यालय से  दूर  सियासत के स्कूल की ओर  उड़ान भर रहे हैं वह किसी वैराग्य से  भी कम नहीं नजर आता,,,,।

                                            वैराग्य के साथ संघर्ष और राजनीति की ऐश्वर्य यात्रा में   वे अब अपना पद कब छोड़ेंगे……..फिर ……नया पद कब हासिल करेंगे, इस पर सही फोरकॉस्ट करने वाली मशीन अब तक किसी दुकान में नहीं दिखी है…..। लेकिन यह तो दिखता है कि जिस तरह वे रजिस्ट्रार रहते हुए सार्वजनिक मंच पर आकर अपना किरदार निभाते रहे ( जसमें उनकी बातों को लोग एक शिक्षाविद् की शक्ल में सुनते – देखते रहे) , अब कांग्रेस की  सियासत के मंच पर आकर शिक्षाविद् की तरह का किरदार निभाते रहें ( चूंकि जब कांग्रेसी बोलेगा तो…. तो लोग भी कांग्रेसी से सुनेगा…)   । यह उनके लिए भी बड़ी चुनौती होगी। जो लोग इस सियासी प्ले को अाने वाले चुनाव के खांचे में फिट करके देख रहे हैं, उनमें से किसी के भी मुंह से निकल सकता है कि-“कांग्रेस की टिकट पर भरोसा करने के लिए बड़ा जिगर चाहिए ……”। ऐसे में शैलेष पाण्डेय ने यह जोखिम का रास्ता चुना है तो उन्होने जरूर बहुत दूर के निशाने पर नजर रखकर यह फैसला लिया होगा।तभी तो ARRIVAL के समय यह कह पाना कठिन है कि उनकी  ” ऊँची उड़ान ” को अब कौन सा “ राडार “ अपनी ओर आने का सिग्नल देता है……..? ? ? ? ? ? ?  ?

 

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  1. By Bhuwan verma

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