भजिया पकौड़ा प्रेमी सावधान…थाली में बेसन का जहरीला पकवान तो नहीं?


besan_file_3बिलासपुर।हम हाटल, रेस्टारेन्ट और नुक्कड़ में मिलावटी बेसन का जहरीला पकवान तो नहीं खा रहे हैं। क्या किसी को मालूम है कि 26 जनवरी और 15 अगस्त में बटने वाली बूंदी भी मिलावटी बेसन से तो नहीं बनी  है…किसी भजिया पकौड़ा खाने वालों ने पता लगाया कि 80 से 100 रूपए प्रति किलो बिकने वाला चना दाल का बेसन 35 से 40 रूपए किलो क्यों है..?हम चना की जगह प्रतिबंधित खेसरी दाल का बेसन तो नहीं खा रहे हैं..? यदि हां तो सावधान रहें…।सीजीवाल,क्योंकि बाजार में ज्यादातर दुकानों में मिलने वाला बेसन शुध्द चना से नहीं बल्कि घटिया कनक आटा, घुने चना दाल और बेकार हो चुकी पीला मटर से तैयार होता है। ज्यादातर मात्रा प्रतिबंधित खेसरी दाल की होती है। हाटलों में चाव से भजिया पकौड़ा उडाने वालों को नहीं मालूम कि वे जिस बेसन का पकवान खा रहे हैं। वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

                              ज्यादातर हाटल,रेस्टोरेन्ट और कमोबेश सभी नुक्कड़ की दुकानों में मिलावटी बेसन से पकवान तैयार किया जाता है। 26 जनवरी और 15 अगस्त में खेसरी दाल के बेसन से तैयार बूंदी को बच्चों और बूढ़ो में बांटा जाता है। शहर में इन दिनों मिलावटी बेसन धड़ल्ले से बिक रहा है। खबर किसी को हो या ना हो खाद्य विभाग को है। बावजूद इसके अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं। व्यापार बिहार स्थित एक ट्रेडर्स में धड़ल्ले से प्रति किलो 35 से 40 रूपए में मिलावटी बेसन बेचा जा रहा है। दो महीने पहले सीजी वाल की टीम ने खाद्य विभाग से शिकायत की लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई प्रशासन ने नहीं की है।

क्या है मिलावटी बेसन

                             सामान्यतः बेसन चना दाल से तैयार किया जाता है। बाजार में चना की कीमत 80 से 100 रूपए किलो है। व्यापार विहार के कई दुकानों में बेसन 35 से 40 रूपए किलो में उपलब्ध है। जानते हुए भी शुद्ध चना दाल से बने बेसन की कीमत 120 से 140 के बीच है। बावजूद इसके मिलावटी बेसन का शहर में धड़ल्ले से व्यापार हो रहा है। व्यापार विहार स्थित इस दुकान में भाटापारा से प्रतिदिन दो से तीन ट्रक मिलावटी बेसन का आना होता है। दो तीन दिन में दो तीन ट्रक मिलावटी बेसन शहर के अलावा आस पास के गांवों में खप जाता है।सीजीवाल

मिलावटी बेसन में क्या होता है…

                            besan_file_2मिलावटी बेसन तैयार करने वाले शहर के कुछ चक्की वालों ने बतयाा कि शुद्ध चना से बेसन बनाये भी तो खरीदे कौन। शहर के बड़े व्यापारी थोक में मिलावटी बेसन की सामाग्री लेकर आते हैं। इसमें खेसरी दाल यानि तिवारा, कनकी, पीली मटर, बेकार हो चुके चना शामिल होता है। एक साथ मिलाकर पीसा जाता है। मिलावटी बेसन तैयार हो जाता है।व्यापार विहार के एक व्यापारी ने बताया कि 120-140 रूपए वाला बेसन का जमाना लद गया है। अब लोग 35-40 रूपए किलो वाला बेसन खरीदते हैं। मिलावटी बेसन 60-70 रूपए बेचते हैं तो लोगों को विश्वास हो जाता है कि मिलावट नहीं है।

शहर में सबसे ज्यादा बिक्री 

                                          व्यापार विहार के थोक विक्रेता ने अंजाने में बताया कि मिलावटी बेसन का उपयोग गांव से ज्यादा शहर में होता है। छोटे हाटलों और नुक्कड़ के दुकानों में सबसे ज्यादा खपत होती है। मौका लगने पर 80-90 रूपए के भाव में भी बेचते और खरीदते हैं।व्यापारी ने बताया कि मिलावटी बेसन में तीन दर है। 35 रूपए किलों वाले बेसन से बूंदी बनती है। 40 रूपए वाले से भजिया..क्योंकि थोड़ा नरम होता है..मिलावट प्रतिशत कम होती है।  50 रूपए किलो वाले से पकौड़ा तैयार होता है।

राष्ट्रीय पर्व पर बूंदी बनाने में उपयोग

                                व्यापारी ने बताया कि 26 जनवरी 15 अगस्त में 35 रूपए किलो वाले बेसन की मांग बढ़ जाती है। इसमें मिलावट की मात्रा अधिक होती है। इसमें चना दाल का प्रतिशत 10 प्रतिशत होता है।

मिलावट में क्या-क्या

                  मिलावटी बेसन में 50 -60 प्रतिशत खेसरी दाल की होती है। 30 से 20 प्रतिशत कनकी आटा …पीली मटर 10 प्रतिशत…। बाकी हिस्सा टूटे हुए चना दाल की होती है।

क्या है खेसरी दाल

                          पड़ोसी देशों समेत भारत के कई राज्यों में खेसरी दाल पर प्रतिबंध है। एक समय कोर्ट ने खेसरी दाल के सेवन besan_file_1पर प्रतिबंध लगाया था। बावजूद इसके आज भी खेसरी दाल का उपयोग हो रहा है। खेसरी दाल को लेकर विद्वानों में अलग अलग राय है। खेसरी दाल में बोवा जहर‘ होता है। लगातार सेवन से शरीर के निचले हिस्से में लकवा की शिकायत आ जाती है। इसे लथाइरिज्म कहा जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि खेसरी दाल पौष्टिक होता है। लेकिन जिन क्षेत्रों में सूखे की हमेशा शिकायत रहती है। वहां से पैदा खेसारी दाल में बोवा की आशंका रहती है।

मिलावट के खिलाफ कानून

भारत सरकार ने मिलावट करने वालों के खिलाफ कानून बनाए हैं। 1954 में खाद्य अपद्रव्यीकरण निवारक अधिनियम के तहत के तहत मिलावट करने वालों और मिलावटी सामाग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है। कानून को 1955 में लागू किया गया।

क्या कहता है खाद्य विभाग

                                   खाद्य विभाग निरीक्षक विन्ध्यराज ने बताया कि दो महीने पहले संबधित दुकान पर छापा मारा गया। दुकानदार ने बताया कि कलश ब्रांड का बेसन पशुओं के लिए है। इसमें मिलावट पायी गयी है। बेसन का सैम्पल जांच के लिए भेजा गया। मामला एडिश्नल कलेक्टर के पास है। मिलावटी बेसन बेचने पर कार्रवाई होगी।  इंसानों के लिए बेसन की गुणवत्ता ठीक नहीं है।

                                  बहरहाल मिलावटी बेसन धड़ल्ले से बाजार में बिक रहा है। लोग निःसंकोच होकर मिलावटी बेसन का भजिया,पकौड़ा खा रहे हैं। खासतौर पर नुक्कड़ के हाटलोंं में मिलावटी बेसन से खाने की चीजें बनाई जा रही हैं। लेकिन खाद्य विभाग की इस तरफ नजर नहीं है। यदि दुकानदार ने कलश ब्रांड को पशुओ के लिए तैयार किया है तो कम से कम हाटलों और नुक्कड़ में बिकने वाले सामानों और बेसन का सैंपल तो लिया जाना चाहिए। जांच के बाद पता चल जाएगा कि बनने वाली चीजें मिलावटी या फिर प्योर बेसन से तैयार किया जा रहा है।

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *