भोरमदेव अभ्यारण्य बनेगा टाईगर रिजर्व,कान्हा से आएंगे बारहसिंघा

भोरंदेव_index♦बारनवापारा मेें मध्यप्रदेश से लाए जाएंगे काले हिरण
♦तमोर पिंगला मे हथियों के लिए बचाव और पुनर्वास केंद्र

रायपुर।मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में वन्यजीवों के संरक्षण के लिये कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बैठक में कबीरधाम जिले के भोरमदेव वन्य जीव अभ्यारण्य को टाईगर रिजर्व घोषित करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया।भोरमदेव अभ्यारण्य देश के कान्हा टाईगर रिजर्व की सीमा से लगा हुआ है।इस अभ्यारण्य की जैव विविधता कान्हा टाईगर रिजर्व के जैसे है।351.24 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभ्यारण्य में वन्य जीवों के लिये पानी की उपलब्धता है। भोरमदेव  अभ्यारण्य में संकरी और फेन नदी का उद्गम तथा सीमावर्ती रेंगाखार के वनक्षेत्र में बंजर एवं हेलो नदी का उद्गम क्षेत्र है जो कान्हा टाईगर रिजर्व में बड़ी नदी का रूप ले लेती है।

                              बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भोरमदेव अभ्यारण्य में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से बारहसिंघा को लाया जाए। क्योंकि यहां का पर्यावरण एव रहवास बारहसिंघों के लिये उपयुक्त है। इसी प्रकार बारनवापारा अभ्यारण्य में मध्यप्रदेश से 40 काले हिरण लाने का निर्णय लिया गया। बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों के लिये बाड़े का निर्माण किया जा रहा है।

                             बारनवापारा अभ्यारण्य से वन्य जीव 40 गौर को गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में ले जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में जंगली हाथियों से जन-धन हानि को रोकने के लिये नई रणनीति पर विचार किया गया। जिसके अनुसार हाथियों का नए क्षेत्रों बलौदाबाजार एवं महासमुंद जिले में प्रसार रोकने के लिये विशेषज्ञों की सहायता से हाथियों को इन जिलों से बाहर किया जाएगा।

                          तमोरपिंगला अभयारण्य में हाथियों के लिये बचाव और पुनर्वास केंद्र बनाने का निर्णय लिया गया। इसी तरह हाथियों के लोकेशन जानने के लिये विशेषज्ञों की सहायता से बारह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया गया। हाथियों को मुख्य रूप से गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान और एलीफेंट रिजर्व-तमोरपिंगला, सेमरसोत और बादलखोल अभ्यारण्य तथा बड़े वन क्षेत्रों में सीमित रखने की रणनीति अपनाई जाएगी।

                         बैठक में वनमंत्री महेश गागड़ा, संसदीय सचिव तोखन साहू, मुख्य सचिव विवेक ढांड, वन विभाग के प्रमुख सचिव आर.पी.मंडल, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर.के.सिंह सहित कई क्षेत्रों से वन्यजीव विशेषज्ञ और संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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