एनएसयूआई ने की विश्वविद्यालय की शिकायत

IMG20170221140317बिलासपुर—एनएसयूआई नेताओं ने बताया है कि बिलासपुर विवि में प्रश्र पत्रों को सेट करने माडरेशन कमेटी का गठन नही किया गया है। जिसके चलते स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षा के पर्चे में त्रुटियों का अंबार है। यही कारण है कि सेमेस्टर परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थी फेल हो गए हैं। एनएसयूआई छात्र नेता और समर्थकों ने रैली निकालकर जिला प्रशासन को राज्यपाल और एमएचआरडी को शिकायत पत्र दिया है।

               एनएसयूआई नेता आशीष अवस्थी ने बताया कि बिलासपुर विश्वविद्यालय में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। आशीष ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन भी व्यवस्था को सुधारना नहीं चाहता है। जिसके चलते छात्रों को भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सिटी मजिजस्ट्रेट को राज्यपाल और केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के नाम पत्र देने के बाद आशीष अवस्थी ने पत्रकारों से बातचीत की।

                                आशीष ने बताया कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण सेमेस्टर परीक्षामें 80 फीसदी विद्यार्थी फेल हो गए है।  दरअसल विवि में प्रश्रपत्रों को सेट करने के लिए माडेरशन कमेटी को गठन ही नही किया गया। प्रश्नपत्र में सिलेबस के बाहर का प्रश्न पूछा गया। जानकारी नहीं होने के कारण छात्रों को प्रश्न छोडना पड़ जाता है। जाहिर सी बात है कि इसका असर परिणाम पर पड़ेगा। इन्ही गलतियों के कारण सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम मात्र बीस प्रतिशत है।

                      एनएसयूआई छात्र नेता ने बताया कि यदि परीक्षा के पहले माडेरेशन कमेटी का गठन जरूरी है। कमेटी प्रश्नपत्रों की त्रुटियों पर नजर रखती है।  पेपर बनाते समय सिलेबस का ध्यान रखने को कहा जाता है। लेकिन बिलासपुर विवि में ऐसा कुछ नहीं होता। आशीष के अनुसार मामले कुलपति प्रो जीडी शर्मा ने बताया कि काफी देर हो जाने के कारण माडरेशन कमेटी का गठन संभव नही है। इसके चलते छात्रों में भारी नाराजगी है।

क्या है माडरेशन कमेटी

                                           माडरेशन कमेटी में विवि और महाविद्यालय के प्राध्यापक शामिल होते हैं। कमेटी के सदस्य परीक्षाओं के लिए प्रश्र का चयन करते हैं। कमेटी इस बात का ध्यान रखती है कि सिलेबस से बाहर के प्रश्र ना पूछे जाएं। प्रश्र को पूरी तरह से जांच के बाद ही रिलीज किया जाता है।

अवैध वसूली

            आशीष समेत अन्य एनएसयूआई नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय के नाक के नीचे महाविद्यालयों में नोड्यूज के नाम से 3 से 5 सौ रूपए की अवैध वसूली हो रही है। प्रैक्टिकल परीक्षा के नाम पर भी विद्यार्थियों से पांच सौ रूपए अतिरिक्त लिया जा रहा है। शिकायत के बाद भी अवैध वसूली हो रही है। आशीष ने बताया कि प्रतिवर्ष परीक्षा में सिलेबस से बाहर के प्रश्र पूछे जाते हैं। हर बार शिकायत होती है। बावजूद इसके ना तो गलतियों को टीक किया जाता है और ना ही बोनस अंक ही दिया जाता है।

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