ई.एण्ड.एमः सरकार का अनोखा विभाग…डुप्लीकेट कारोबार

images बिलासपुर—कहा और सुना जाता है कि दिल्ली का डी मॉल भारत के कोने कोने में खपता है। डी मॉल कहां कहां खपता है इसका आंकलन करना नामुकिन नहीं तो असंभव जरूर है। लेकिन बिलासपुर के इलेक्ट्रिक और मेकेनिकल विभाग के अधिकारियों को डी मॉल खपाने का लम्बा अनुभव है। दरअसल ईएन्डएम विभाग इलेक्ट्रानिक सामान खपाने का सबसे बड़ा सरकारी हब है। यहां अधिकारी और ठेकेदार मिलकर पोलीकैब वायर, स्विच, पंखा, पीवीसी कमोबेश सारे इलेक्ट्रिक सामान डी माल का प्रयोग करते हैं।  90 प्रतिशत टेण्डर में डी माल का उपयोग होता है। इस गोरखधंधे में ठेकेदार समेत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और बाबू वर्ग बराबर का हिस्सेदार है। सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी आंख पर पर्दा डालकर बैठे हैं..क्योंकि उन्हें आंख बंद करने का हर्जाना जो मिलता है।

                       हाल फिलहाल छापामार कार्रवाई के दौरान रिंग रोड दो के पास शहर के मशहूर ठेकेदार और इलेक्ट्रॉनिक दुकान संचालक के ठिकाने से  डी मॉल का जखीरा बरामद हुआ। ठेकेदार ने मिली भगत कर मामले को सस्ते में निपटा लिया। पुलिस ने भी बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया। ध्यान नहीं देने के कारण भी हैं। ठेकेदार ने डी मॉल से कमाए पैसों से  अपने दामन को साफ कर लिया।

                                        ईएण्डएम विभाग यानी इलेक्ट्रिक और मेकेनिकल डी माल खपाने का बिलासपुर में सबसे बड़ा सरकारी केन्द्र है। 99 प्रतिशत टेण्डर डी माल के भरोसे चलता है। यद्यपि अधिकारी और ठेकेदार लो टेन्डर का रोना रोते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक ठेकेदार ने बताया कि हम घर से लुटाने के लिए धंधा नहीं करते । टेन्डर लो जाएगा तो माल भी हल्का लगेगा। इस बात को अधिकारी भी अच्छी तरह से जानते हैं।

                विभाग से प्रत्येक साल करोड़ों रूपए का टेन्डर जारी होता है। सरकारी भवन में बिजली,पंखा लगाने का काम ईएण्डएम विभाग करता है। प्रक्रिया के दौरान ठेकेदार अधिकारियों से सांठ गांठ कर टेण्डर हासिल कर लेते हैं। गुणवत्ता रिपोर्ट अधिकारी ही तैयार करते है।

                                 हाल फिलहाल सरकारी भवनों में ईएण्डएम का काम राम भरोसे है। मानक वायर की जगह डुप्लीकेट पोलीकेब का इस्तेमाल किया जारहा है। कभी कम गेज के नाम पर तो कभी लोकल तार लगाकर कार्य काम पूरा किया जाता है। सरकारी भवनों की फिटिंग और तार की गुणवत्ता बहुत ही घटिया होती है। मजेदार बात है कि यह जानते हुए भी ईई,एसडीओ,इंजीनियर, ठेकेदारों से समझौता कर बिना वेरीफिकेशन बिल को पास कर देते हैं। ठेकेदार की माने तो साहब लोगों को काम से नहीं केवल जेब से मतलब होता है।images (6)

                                           जानकारी के अनुसार पिछले कुछ सालों से सरकारी भवनों में लगाए गए ज्यादातर पंखे डूप्लीकेट हैं। बाजार में इनकी कीमत मात्र तीन सौ रूपए है। शर्तों के अनुसार पंखा ऊषा पोलों का लेकिन ओरिजनल होना चाहिए। लेकिन ज्यादातर ऐसा होता नहीं है। यहां तक कि कई आलाधिकारियों के के सरकारी बंगले में 900 रूपए की जगह तीन सौ रूपए वाले पंखे लगाए गए हैं।

  ठेकेदार ने बताया कि अधिकारियों के कई दुकानों से बांडिग हैं। इन दुकानों से डुप्लीकेट सामानों की सप्लाई की जाती है। अधिकारियों को इसके लिे कमीशन भी मिलता है। ठेकेदार ने बताया कि मैं खुद इलेक्ट्रिक सामान का सप्लायर हूं। साथ में ठेकेदारी का भी काम करता हूं। साहब के इशारे पर जांजगीर चांपा, कोरबा, रायगढ़ तक सामानों सप्लाई होती है। करोंडों के खेल में लाखों का कमीशन बनता है।

                     ठेकेदार उषा पोलों का सस्ता पंखा लगाते हैं। एक ओरिजनल पंखे की कीमत 900 रूपए है। ऊषा पोलों के डुप्लीकेट पंखे की कीमत सिर्फ तीन सौ रूपए है। ओरिजनल और डूप्लीकेट पंखे में बाहर से बहुत अन्तर नहीं होता है। लेकिन इंजीनियरों और अधिकारियों को ओरिजनल और डुप्लीकेट के बीच अंतर मालूम होता है। आज सभी सरकारी भवनों में ईएन्डएम विभाग ब्राण्डेड डी माल का पंखा लगाया है।

                                        यद्यपि कुछ दिन पहले एक ठेकेदार के ठिकाने से  डूप्लीकेट पालीकेब का जखीरा बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि बरामद जखीरा का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी छापामार कार्रवाई के पहले ईएण्एम के कई ठेकेदारों के पास आज भी है। पोलीकेब डुप्लीकेट वायर का प्रयोग आज भी किया जा रहा है। यह सब अधिकारियों के इशारे पर ही हो रहा है। रायगढ़ में डुप्लीकेट सामानों का सर्वाधिक काम किया जा रहा है। डुप्लीकेट सामानों की सप्लाई बिलासपुर से ही होती है। डी मॉल खपाने और कमीशन के चक्कर में ईएन्डएम के एक अधिकारी को शर्मसार भी होना पड़ा है।

                                                           जारी है….कौन अधिकारी हैं… खेल का सरगना…

 

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