डीएम से खौफ क्यों

FB_IMG_1441516484068(संजय दीक्षित)डीएम अवस्थी के डीजी बनने के पश्चात कुछ आईपीएस अफसरों के कैरियर पर काली छाया मंडराने लगी है। खौफ है, डीएम कहीं डीजीपी बन गए, तो अपना क्या होगा। दरअसल, डीजीपी बनने के बाद डीएम अगर क्रीज पर टिक गए तो आधा दर्जन से अधिक आईपीएस को डीजीपी बनने का अवसर नहीं मिलेगा। अप्रैल 2023 में डीएम का रिटायरमेंट है। याने आठ साल। सबसे लंबा। छत्तीसग़ढ़ में किसी भी डीजी का कार्यकाल इतना लंबा नहीं रहा। जाहिर है, नीचे वालों का ब्लडप्रेशर तो बढ़ेगा ही। अवस्थी से जस्ट नीचे 87 बैच के विनय कुमार सिंह और स्वागत दास हैं। दोनों भारत सरकार में डेपुटेशन पर हैं। इनमें से सिंह 2019 और दास 2022 में रिटायर हो जाएंगे। अब 88 बैच। इनमें सबसे सीनियर संजय पिल्ले। जुलाई 23 में वे रिटायर होंगे। डीएम के रिटायर होने के बाद उनके पास महज तीन महीने का समय रहेगा। इसके बाद आरके विज दिसंबर 21 और मुकेश गुप्ता सितंबर 22 में सेवानिवृत होंगे। 89 बैच के अशोक जुनेजा भी जून 23 में बिदा हो जाएंगे। सो, संजय पिल्ले कहीं आखिरी तक डीजीपी रहे, तो जुनेजा को उनसे एक महीना पहले नौकरी को बाय-बाय करना पड़ेगा। मगर यह तभी होगा, जब डीएम आउट नहीं हुए।

आईपीएस आगे, आईएएस पीछे

कैडर रिव्यू न हो पाने का खामियाजा सूबे के ताकतवर नौकरशाहों को इस तरह भुगतना पड़ रहा है कि प्रमोशन के लिए उन्हें आईपीएस अफसरों का सहारा लेना पड़ रहा है। डीएस मिश्रा से लेकर बैजेंद्र कुमार तक का प्रमोशन आईपीएस का हवाला देकर हुआ। आपको याद होगा, 82 बैच के रामनिवास 2011 में एडीजी बन गए थे। जबकि, 82 बैच के आईएएस डीएस मिश्रा का प्रमोशन नहीं हो रहा था। तब के चीफ सिकरेेट्री सुनिल कुमार ने रामनिवास की आड़ में डीएस का प्रमोशन कराया था। इसके बाद, फरवरी 2014 में 85 बैच के अमरनाथ उपध्याय डीजीपी बने तो 84 बैच के एमके राउत और 85 बैच के एन बैजेंद्र कुमार को इसी पैटर्न पर एसीएस प्रमोट किया गया। असल में, कैडर रिव्यू न होने का खामियाजा आईएएस को भुगतना पड़ रहा है। ब्यूरोक्रेसी में उपर लेवल पर अफसर बढ़ गए मगर पोस्ट बढ़ा नहीं। यही वजह है कि प्रिंसिपल सिकरेट्री सुनील कुजूर और अजयपाल सिंह एसीएस नहीं बन पा रहे हैं। सरकार ने उनके लिए दो स्पेशल पोस्ट मांगा है, मगर भारत सरकार से हरी झंडी मिल नहीं पा रही। जबकि, उन्हीं के 86 बैच के आईपीएस डीएम अवस्थी डीजी बन गए हैं। एसीएस और डीजी का पोस्ट समतुल्य होता है। सो, सामान्य प्रशासन विभाग अब डीएम का हवाला देकर अब भारत सरकार से फिर गुजारिश करने जा रहा है।

और मजबूत होगा एसीबी

सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को और मजबूत करने का फैसला किया है। गृह विभाग ने कुछ दिन पहले ब्यूरो से जिन 26 अफसरों एवं जवानों को वापिस बुलाने का फरमान जारी कर दिया था, सरकार के हस्तक्षेप के बाद इसे निरस्त किया जा रहा है। यही नहीं, पहली बार एसीबी को सिके्रट सर्विस मनी का प्रावधान किया जा रहा है। इतना सब हो रहा है तो आपको यह मानना पड़ेगा कि एसीबी चीफ मुकेश गुप्ता का जलजला कम नहीं हुआ है। वरना, 26 लोगों का ट्रांसफर केंसिल तो कदापि नहीं होता।

कांग्रेस के साथ पारी

आईजी रविंद्र भेडि़या 31 जनवरी को रविवार होने के चलते एक दिन पहले 30 को ही रिटायर हो जाएंगे। रिटायरमेंट के बाद वे कांग्रेस के साथ अपनी नई पारी की शुरूआत करेंगे। वैसे भी, वे कांग्रेसी परिवार से ही आते हैं। उनकी पत्नी अनिला भेडि़या डौंडीलोहारा से कांग्रेस से विधायक हैं। रविंद्र के बड़े भाई डोमेंद्र भेडि़या भी डौंडीलोहरा से कई बार विधायक रह चुके हैं। बहरहाल, छत्तीसगढ़ बनने के बाद भेडि़या कांग्रेस में शामिल होने वाले पहले रिटायर आईपीएस होंगे। यह भी हो सकता है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में डौंडीलोहारा से पत्नी की बजाए वे मैदान में उतर जाएं। इससे पहले, आरसी पटेल की तब के पीसीसी चीफ नंदकुमार पटेल के साथ निकटता रही। पिछले विधानसभा चुनाव के समय टिकिट उनको मिलने की चर्चा भी खूब रही मगर उन्होंने कांग्रेस ज्वाईन नहीं किया।

विपक्ष को वेटेज

कांग्रेस को अबकी बजट में शिकायत नहीं रहेगी कि उनके इलाके को इगनोर किया गया है। सीएम डा0 रमन सिंह ने पहली बार अबकी कांग्रेस विधायकों को भी बजट पर सुझाव के लिए बुला रहे हैं। सरगुजा संभाग से विधायकों के साथ नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव भी एक जनवरी को शाम सीएम हाउस में अपनी बात रखेंगे। चलिये, बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस को यह शिकवा नहीं होगी कि उन्हें नहीं सुना गया।

अफसर रहेंगे टारगेट में

बजट के लिए सीएम से वन-टू-वन मुलाकात में सुझाव कम, जाहिर तौर पर शिकायतें अधिक हांेगी। और, टारगेट में रहेंगे अफसर। पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने आज इसका आगाज कर भी दिया। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने मंत्रालय में अफसरों के टाईम से न आने पर अफसरशाही को निशाने पर लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि सुनिल कुमार जब सीएस थे तो अफसर कैसे 10 बजे मंत्रालय पहुंच जाते थे। वे सीएम से इस बारे में बात करेंगे।

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