यौन शोषण सामाजिक कलंक–संभागायुक्त

sambhag striya karyashala  (3)बिलासपुर—-बच्चों और महिलाओं का यौन शोषण समाज का सबसे बड़ा कलंक है। थोड़ी सावधानी  और जागरूकता से इसे रोका जा सकता है। देखने में आया यह अपराध नजदीक के लोगों,रिश्तेदारों में हीं सबसे ज्यादा होता है। यह बातें आज संभागायुक्त सोनमणि बोरा ने यौन शोषण से पीडि़त महिलाओं एवं बच्चों की चिकित्सीय कानूनी देखभाल एवं उपचार पर आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला में कही।  कार्यशाला यूनिसेफ एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

                  कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभागायुक्त बोरा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का यौन शोषण किसी न किसी रूप में घरों एवं रिश्तों में अधिकांश देखने को मिलता है। सभ्रांत परिवारों में भी देखने को मिला है। इसे सावधानी और जागरूकता से रोका जा सकता है। बच्चे और महिलायें लोक-लाज के कारण अपने दर्द को सामने रख नहीं पाती हैं।यौन शोषण के शिकार बच्चे एवं महिलाओं को चिकित्सकीय उपचार और कानूनी सहायता के दौरान मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। कार्यशाला का मकसद भी उन्हें सही उपचार, न्याय और उनके सामुदायिक पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण दिशा देना है।

                     यौन शोषण को रोकने और पीडि़तों के सामुदायिक पुनर्वास के लिए पुलिस, डाक्टर, न्यायिक अधिकारी, प्रशासन ऐसे मामले में कार्यवाही करते वक्त संवेदनशीलता का परिचय दें। उन्हें जागरूक और प्रशिक्षित कराना आवश्यक है। स्वयंसेवी संगठनों और संस्थाओं को इस दिशा में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में इस दिशा में जागरूकता बढ़ी है।

            कार्यशाला में मुख्य प्रवक्ता और प्रशिक्षणकर्ता डॉ. शाइव्या ने बताया कि बच्चों एवं महिलाओं के यौन शोषण का उपचार एवं पुलिस अधिकारियों के विश्लेषण करते वक्त पीडि़ता के उम्र एवं स्थिति को देखते हुए उपचार और कानूनी सहायता दिया जाना चाहिए।   जिससे शोषित दोबारा प्रताड़ना का शिकार न हो।

           कार्यशाला में संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवा डॉ. एस.पी. सक्सेना ने भी अपने विचार लोगों के सामन रखा। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो.नदीम मोहसीन और बैंगलोर के डॉ. शाइव्या ने यौन शोषण से पीडि़त महिलाओं एवं बच्चों की चिकित्सीय कानूनी देखभाल एवं उपचार पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में संभाग के सभी पांचों जिलों के संबंधित चिकित्सक शामिल भी  हुए।

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