मेरी नज़र में… Archive

टूटे हुए पेड़ बोल रहे-मुझमें..कहीं थोड़ी सी..अभी बाकी है जिन्दगी..

Tweet बिलासपुर(विशेष संवाददाता)।फिल्म अग्निपथ का मशहूर गाना..अभी मुझमें कहीं बाकी..थोड़ी सी है जिन्दगी..।मिट्टी तेल हॉकर गली उजड़ने के बाद..अस्त व्यस्त लेटे  दो आम के पेड़ों को देखकर अग्निपथ गाना बरबस ही याद आ गया। कभी मिट्टी तेल हॉकर गली में रौनक हुआ करती थी। चहल पहल इतनी कि चार पहिया वाहनों का निकालना मुश्किल था।

देखें VIDEO:बिलासपुर से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर बारिश में एक सफर…

Tweet बिलासपुर।छत्तीसगढ़ को कुदरत ने कई अनमोल तोहफे दिए हैं…उसमें सबसे नायाब तोहफा है,हरियाली का…बिलासपुर इलाके  के खाते में भी इसका एक हिस्सा आया है….।इसे महसूस करना है तो हम निकल सकते हैं कोटा रोड पर..।महज बीस से तीस किलोमीटर का फासला तय करने के बाद सावन की हरियाली आपका स्वागत करेगी..। सड़क के दोनों

आज उनका जन्मदिन है, जिनका नाम प्रभाष जोशी था :

Tweet हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में जो नाम अमर हैं, उनमें श्रद्धेय प्रभाष जोशी जी का भी नाम है। उनका जन्मदिवस 15 जुलाई को है। सहजता – सरलता तो किसी का भी व्यक्तित्व निखार देती है। लेकिन यही सहजता – सरलता लेखन में उतर जाए तब तो निश्चित ही वह लेखन अमर हो जाता है….

कांग्रेस को मिल गए दो केन्डीडेट,बिलासपुर में मजबूत हुई पार्टी…?

Tweet इश्क का जौक–ए-नजारा मुफ्त में बदनाम है, हुश्न खुद बेताब है,जलवे दिखाने के लिए !! मशहूर शायर मजाज लखनवी साहब की ये लाइने यकीनन हुस्न- ओ- इश्क की दुनिया को लेकर लिखी गईं हैं। लेकिन बिलासपुर शहर में कांग्रेस की राजनीति में उम्मीदवारों की दावेदारी  को लेकर जो कुछ चल रहा है, उसके पेशे

‘‘ऊँची उड़ान” के लिए शैलेष का ‘ARRIVAL’

Tweet राजधानी रायपुर में जगह है…. स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा ………. , जहाँ से बहुत दूर – दूर तक के लिए उड़ान भरने वाले लोग हवाई जहाज तक  पहुंचते है …..ऐसे प्रवेश द्वार से  ….. जिस पर हिंदी में आगमन और अँग्रेजी में ARRIVAL साफ – साफ लिखा है ……. इसी गेट के ठीक सामने………

रंगों के संगम में..जो डूबा सो पार..

Tweet (रुद्र अवस्थी)ठाकुर- अभी तक दिल नहीं भरा होली से ?जया भादुड़ी-ये…ठाकुर चाचा……होली रंगो का त्यौहार है…….लाल, पीले, नीले, हरे…कैसे दिल भरेगा इन रंगो से….जरा आप ही सोचिए- अगर ये रंग न हों तो कैसे बेरंग लगेगी ये दुनिया?यह डॉयलाग शोले का है।हिंदुस्तानी सिनेमा में सबसे अधिक आम जन-जीवन के संवादों में अपना असर डालने

पैंतालिस साल पुरानी–“शेर दरोगा”की कहानी-लोककला की जुबानी…

Tweet (रुद्र अवस्थी)“मेरे पास आओँ,मेरे दोस्तों…एक किस्सा सुनों…”यह गीत महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज में है।अपने समय की सुपरहिट फिल्म “मि.नटवरलाल” के इस गाने में अमिताभ बच्चन ने एक शेर का किस्सा सुनाया था। यह फिल्मी किस्सा बहुत से लोगों को याद भी होगा लेकिन “नटवरलाल” के आने और जाने के करीब सात साल पहले

वो…सोलह मिनट…एक अकेले कलाकार के साथ,झूम उठा देवकीनंदन हॉल…

Tweet (रुद्र अवस्थी)तुम्हे दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी,मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो। तड़पपने पे मेरे ना ,फिर तुम हंसोगे,कभी दिल किसी पे लगाकर तो देखो।। मरहूम नुसरत फतेह अली खाँ  साहब का यह सूफियाना कलाम पूरे सोलह मिनट –तिरालिस सेकेंड का है…….।जिसकी धुन पर थिरकते हुए वो पूरे समय लट्टू की मानिंद घूम-घूम कर

बिल्हा का उड़गन गांवःजहां गूँजता है पत्थरों का संगीत…

Tweet (रुद्र अवस्थी)मुंबई- हावड़ा मेन रेल लाइन से धड़धड़ाते हुए गुजरने वाली तेज रफ्तार रेलगाड़ियों में कई बड़ी हस्तियों के साथ ही बड़े-बड़े कलाकार भी आते-जाते हैं…।दुनिया जहान को जानने वाले सैकड़ों-हजारों मुसाफिर भी वहां से गुजरते हैं…।लेकिन किसी को कभी यह मालूम नहीं हो पाता कि बिल्हा- दगौरी स्टेशनों के बीच इसी रेल लाइन

चंदखुरी-बैतलपुर में गाँधी यात्रा के “निशान’’

Tweet (रुद्र अवस्थी )“कुष्ठ रोगियों के अस्पताल का उद्घाटन मैं नहीं करूंगा…।यह काम किसी और से करा लीजिए…।लेकिन यह अस्पताल जिस दिन बंद करना होगा,उस दिन मुझे बुलाइएगा…।मैं जरूर आउंगा…। मैं चाहता हूं कुष्ठ रोग पूरी तरह से खत्म हो जाए।इसके रोगी ही न रहे और ऐसे अस्पताल की जरूरत ही न पड़े…।“ये बातें राष्ट्रपिता