स्वास्थ्य मंत्री को दी पैरामेडिकल पाठ्यक्रम की जानकारी

jogi_febरायपुर—- ध्यानाकर्षण चर्चा के दौरान अमित जोगी ने पैरामेडिकल का मुद्दा उठाया। चर्चा के दौरान जोगी ने कहा कि पैरामेडिकल चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही पर समुचित निर्णय लिया जाना जरूरी है। 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार के प्रयास से शुरू तीन वर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम में एमसीआई ने थोड़ा बहुत परिवर्तन करने के लागू करने को कहा था। एमसीआई ने कहा था कि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा मिल सकेगी।

                          अमित जोगी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने बताया कि एमसीआई ने ऐसे किसी पाठ्यक्रम को मान्यता नहीं दी है। चन्द्राकर ने जोगी को एमसीआई से पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के समर्थन में साक्ष्य देने कहा था। जोगी ने दस्तावेज के साथ बताया कि 24 सितम्बर 2012 को एमसीआई ने 3 वर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम को अनुमति दी थी।

                  जोगी ने कहा कि एमसीआई बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन डॉ के के तलवार ने बताया था  12 वी पास विज्ञान के छात्र मेरिट के आधार पर पैरामेडिकल में एडमिशन ले सकते है। कोर्स अप्रैल 2013 से शुरू किया जाएगा। डॉ तलवार ने कहा था कि पैरामेडिकल कोर्स करने वाले स्वास्थ्यकर्मी प्राथमिक, प्रारंभिक और आपातकालीन चिकित्सा देने के काबिल होंगे। कोर्स के शुरू होने से ग्रामीण जनता को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं में राहत मिलेगी।

                           25 नवम्बर 2012 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य  और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने भी पाठ्यक्रम को 2013 से संचालित करने को कहा था। जोगी ने सदन को बताया कि प्रमाण पेश कर दिया है। अब छत्तीसगढ़ सरकार को निर्णय लेना है कि इस कोर्स को छत्तीसगढ़ में लागू करे या ना करे।

                              जोगी ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि  केंद्रीय स्वास्थ्य  मंत्रालय ने 2001 में छत्तीसगढ़ में शुरू किये गए 3 वर्षीय चिकित्सा डिप्लोमा कोर्स को पूरे देश में संचालित करने 2011 में कदम उठाये थे। केंद्रीय स्वास्थ्य  विभाग ने एमसीआई के जरिये प्रदेश से कोर्स का प्रारूप मंगवाया था। 11 जनवरी 2011 से 13 जनवरी 2011 के बीच हैदराबाद में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य  विभाग की सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक में विचार भी किया गया ।

                     प्रदेश के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने भी  पाठ्यक्रम को स्वीकार किया था। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने 3 वर्षीय चिकित्सा डिप्लोमा कोर्स का प्रारूप माँगा है और उम्मीद जताई थी कि कोर्स को जल्द ही मॉडल रूप में अपनाया जाएगा। जोगी ने कहा कि विधानसभा में मंत्री की गयी घोषणा अनुसार राज्य सरकार ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य हितों के मद्देनजर पैरामेडिकल कोर्स को प्रदेश में लागू करेगी।

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