सुधीर गुप्ता को कोर्ट ने भेजा जेल..अनुपातहीन संपत्ति का मामला

IMG-20170710-WA0003बिलासपुर—बिलासपुर निगम अधीक्षण अभियंता सुधीर गुप्ता को भ्रष्टाचार निवारण न्यायधीश खिलावन राम रिगरी की कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है। सुधीर गुप्ता को न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया है। मामले में अगली  सुनवाई 25 जुलाई को होगी। एसीबी ने सुधीर गुप्ता के खिलाफ 2002 छापामार कार्रवाई में अनुपातहीन संपत्ति मामले में आज न्यायधीश रिगरी के कोर्ट में चालान पेश किया था।

                     मालूम हो कि साल 2002 में सुधीर गुप्ता और फरीद कुरैशी के ठिकानों में एसीबी ने छापामार कार्रवाई की थी। मामले में फरीद कुरैशी को जेल भेज दिया गया था। बाद में कुरैशी को जमानत पर छोड़ा गया। मामले में अभी भी सुनवाई चल रही है। एसीबी ने आज सुधीर गुप्ता के करीब पन्द्रह साल पुराने मामले को न्यायधीश रिगरी के अदालत में पेश किया।

                      एसीबी ने कोर्ट को बताया कि छापामार कार्रवाई में सुधीर गुप्ता के ठिकाने से अनुपातहीन संपत्ति बरामद हुई थी। छापामार कार्रवाई के बाद निगम अधीक्षण अभियंता पर 13(1)ई और 13 (2) का मामला दर्ज किया गया है। सुधीर गुप्ता के वकील रूपेश त्रिवेदी ने बताया कि कोर्ट में सुधीर गुप्ता के लिए जमानत को लेकर बहस हुई। न्यायालय ने जमानत की अर्जी अस्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 25 जुलाई को निश्चित किया है। रूपेश त्रिवेदी ने बताया कि सुधीर गुप्ता से प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांगा था। अधीक्षण अभियंता ने साल 2007 में स्पष्टीकरण भी दिया था। बावजूद इसके गुप्ता पर चालानी कार्रवाई की गयी।

                                  मालूम हो कि 13(1)ई तहत अनुपातहीन संपत्ति का मामला शामिल होता है। 13(2) के तहत आरोप की पुष्टि पर अधिकतम सजा दस साल की होती है। लेकिन मामला 2002 का है। तात्कालीन नियम के अनुसार आरोप की पुष्टि पर सुधीर गुप्ता को अधिकतम सजा सात साल की हो सकती है।

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