रिकार्ड दुुरूस्त करने..15 लाख की डिमांड…पटवारी ने कहा…सरकारी बना दूंगा जमीन

IMG20170718140954 बिलासपुर— पटवारी हल्का नम्बर 22 के पटवारी ने रिकार्ड दुरूस्त करने की बोली प्रति डिसमिल 50 हजार लगाया है। सतीश कुर्रे ने पन्द्रह लाख रूपए नहीं दिया तो तीस डिसिमिल पुस्तैनी जमीन निगम की हो जाएगी। सतीश कुर्रे ने मुख्यमंत्री जनदर्शन, निकाय मंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन किया। लेकिन पटवारी योग आनन्द बिना पन्द्रह लाख रूपए लिए डायवर्र्टेड प्लाट को रिकार्ड दुरूस्त नहीं करने का फैसला किया है। फिलहाल योग आनन्द दक्षिण के तीर्थ में हैं। पी़ड़ित सतीश कुर्रे राजस्व विभाग का चक्कर काट रहा है। जानकारी के अनुसार योग आनन्द साहू की खबर राजस्व प्रशासन को भी है।

                सतीश कुर्रे की 30 डिसिमिल पुश्तैन जमीन भारतीय नगर चौक मोड़ पर है। मिसल रिकार्ड के अनुसार जमीन सतीश कुर्रे के पिता काशीप्रसाद के नाम पर है। काशी प्रसाद का जमीन पर दशकों से कब्जा है। जमीन डायवर्टेड है..और उस पर दुकान भी है। पटवारी योग आनन्द को भारतीय नगर की जमीन इतनी अच्छी लगी कि तहसीलदार को विवादित प्रतिवेदन बनाकर दे दिया। जबकि मिसल रिकार्ड में खसरा नम्बर 258 को पीढियों से काशीप्रसाद के पूर्वजों का बताया गया है।

                                      काशी प्रसाद का बेटा सतीश ने बताया कि मिसल में खसरा नम्बर 258 में कुल एक एकड़ 48 डिसिमिल जमीन है। बाद में इसके 21 टुकड़े हुए। 258/5  पिता काशीप्रसाद के हिस्से में आया। खसरा नम्बर 258/5  में कुल साढ़े 29 डिसिमिल जमीन भारतीय नगर चौक मोड़ पर है। पटवारी ने जानबूझकर किसी मनोहर लाल जासवानी पिता तोलाराम जैसवानी के नाम एक डिसिमिल का कब्जा बता दिया है। जबकि रिकार्ड में ना तो मनोहर का जिक्र है और ना ही परिवार के अन्य किसी सदस्य का। सतीश के अनुसार डायवर्सन जमीन के खसरा में काशीप्रसाद को मालिक बताया गया है। लेकिन राजस्व रिकार्ड से पिता का नाम गायब है।

रिकार्ड दुरूस्त करने का आदेश

                      सतीश के अनुसार रिकार्ड दुरूस्त करने का आवेदन किया। अतिरिक्त कलेक्टर ने तहसीलदार को रिकार्ड दुरूस्त करने के लिए कहा। बावजूद इसके पिछले चार महीने से पटवारी योग आनन्द साहू घूमा रहा है…मै परेशान हो चुका हूं। सतीश ने बताया कि जमीन मेरी है…मिसल रिकार्ड भी मेरे पक्ष में है। बावजूद इसके पटवारी योग आनन्द रिकार्ड दुरूस्त करने पन्द्रह लाख रूपए की मांग कर रहा है।

प्रति डिसिमिल पचास हजार की मांग

                  सतीश के अनुसार पटवारी ने जमीन को विवादित बना दिया। इसकी वजह समझ में आ गयी है। योग आनन्द ने मुझसे कहा कि प्रति डिसिमिल पचास हजार और कुल पन्द्रह लाख रूपए देने पर रिकार्ड दूरूस्त करूंगा। अन्यथा जमीन को सरकारी बना दूंंगा।

                  सतीश ने बताया कि एक व्यक्ति को मेरे पास सौदे के लिए भेजा था। उसने कहा कि यदि पटवारी को पन्द्रह लाख रूपए नहीं दोगे तो जमीन निगम के नाम कर दिया जाएगा। मामले में पटवारी ने भी वही दुहराया। उसने कहा कि पन्द्रह लाख में पांच लाख रूपए ऊपर पहंचाउंगा। इसके बाद मनोहर का नाम जमीन से काट दूंगा।

तहसीलदार और कलेक्टर आदेश को मानने से इंकार

                                 सतीश कुर्रे ने बताया कि जमीन पुश्तैनी है। पन्द्रह लाख रूपए नहीं दूंगा। जमीन डायवर्टेड है। मैने जमीन के लिए सीएम जनदर्शन, निकाय मंत्री जनदर्शन, बाद में कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन किया। लेकिन पटवारी पर कोई असर नहीं हुआ। कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर खसरा नम्बर  258/5 के रिकार्ड को दुरूस्त करने को कहा। लेकिन पटवारी एसडीएम और कमिश्नर से जमीन को सरकारी बता रहा है। जबकि मिसल में जमीन मेरे पिता की है। सारे रिकार्ड मेरे पक्ष में है। सतीश ने बताया कि पटवारी और सहायक की जमीन दुरूस्त करने पन्द्रह लाख रूपए की मांग करते हुए रिकार्ड भी है। रिकार्ड में योग आनन्द ने कहा है कि जमीन तुम्हारी है फिर भी पन्द्रह लाख रूपए देने होंगे।

योग आनन्द पटवारी कम भूमाफिया ज्यादा

                         सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार योग आनन्द पटवारी कम जमीन दलाल है। मौके की सभी जमीनों पर पटवारी की नजर रहती है। जो भी जमीन पसंद आती है….उसे विवादित बना देता है। सतीश कुर्रे की जमीन को भी विवादित बनाया। प्रतिवेदन में जमीन काशीप्रसाद का होना तो बताया लेकिन एक डिसिमिल चहेते का हिस्सा बता दिया। सूत्र ने बताया कि योग आनन्द 15 लाख रूपए लिए बिना सतीश को जमीन नहीं देगा।

रैपिड से चलता है पटवारी

                पटवारी योग आनन्द रैपिड की सवारी करता है। इसलिए उसका सारा काम रैपिड होता है। जिस जमीन को उसने पसंद किया। उसका विवादास्पद होना स्वभाविक है। जैसे की सतीश की जमीन के साथ हुआ। सतीश ने बताया कि पटवारी कभी भी अपने कार्यालय में नहीं बैठता है।

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