मुंगेली में अफसरों और दिव्यांग – आम जनता के प्रसाधन का फर्क , बयां कर रहा स्वच्छ भारत की कहानी

IMG-20170724-WA0006मुंगेली ( आकाश दत्त मिश्रा ) ।      निर्माण कार्य चाहे कितने भी ऊँचे  दर्जे का हो  उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किंस कंधे पर है ये मायने रखता है। हम बात कर रहे है मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के पिटारे से निकले नौ रत्नों में से एक रत्न मुंगेली जिले की । मुंगेली जिला प्रशासन अब अपने नए विशाल भवन में कम्पोजिट बिल्डिंग की शक्ल में संचालित है ।चारो ओर खूबसूरती फैली है।  ज्यादातर विभागों को इस भवन में जगह मिली है । सभी के दफ्तर और उनमें मौजूद सुविधाएं उसे एक आदर्श दफ्तर साबित कर रहे है। ठीक इसके विपरीत  आम जनता और दिव्यांगजनो के लिए भवन के पीछे मोटरसायकल पार्किंग से लगकर बने प्रसाधन की हालत बद से बदतर हो चुकी है । टाइल्स उखड़  चुके है । वाश बेसिन में नल चोरी का शिकार हो चुके है। यूरिनल पॉट गन्दगी से भरा है। शौच की जगह इतनी गन्दी है कि यदि कोई इसे उपयोग कर ले तो तृप्त होना तो दूर की बात है उसे संक्रमण की बीमारी हो जाएगी ये तय है।IMG-20170724-WA0004

इस बुरी स्थिति के बाद भी मजबूरी में आम जनता को इन प्रसाधनों का उपयोग करना पड़ रहा है।  महिलाओं को इस दौरान भयँकर समस्याओं का सामना करना पड़ता है । आपको जानकर हैरानी होगी कि इन प्रसाधनों से लगकर  दिव्यांगजनो के लिए बनाया गया प्रसाधन हमेशा बन्द रखा जाता है । करोड़ो की भव्य इमारत का पिछवाड़ा  इतना विभत्स देखने के बाद यह बात सिद्ध होती है कि निर्माणकार्य कितने भी ऊँचे दर्जे का हो मायने नही रखता । बल्कि रखरखाव किंस कंधे पर है ये मायने रखता है। रखरखाव के नज़रिए से  जिला प्रशासन के भवन और किसी शॉपिंग मॉल के भवन की तुलना करना गलत नही होगा। क्योकि हर विभाग् के लिए कर्मचारी दोनों जगह नियुक्त किये गए है ।यदि फर्क है तो बस इतना कि ये सरकारी है और वे निजी…..।  इसके बावजूद भी दोनों भवनों के प्रसाधन की स्थिति पर गौर करे तो कौन सफाई को लेकर कितना गम्भीर है  । आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितना ज़िम्मेदार है, ये साफ पता चलता है। इनामो की घोषणा के बाद अपने पुरस्कार बटोर कर धीरे धीरे मुंगेली में  सिमटता स्वच्छ भारत का अभियान अपनी असली कहानी जिला प्रशासन के भवन के पिछले हिस्से से बयाँ कर रहा है। हालात बदलने चाहिए, सूरत बदलनी चाहिए इस उद्देश्य के साथ आमजनता और दिव्यांगजनो के लिए बने प्रसाधन भी चमकने चाहिए जैसे अधिकारियों के दफ्तर के निजी प्रसाधन चमकते है।

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